पंजाब सरकार ने तैयार की नई कृषि पॉलिसी, क्या अब किसान नहीं कर पाएंगे धान की खेती, जानें क्या है खास

पंजाब सरकार ने तैयार की नई कृषि पॉलिसी, क्या अब किसान नहीं कर पाएंगे धान की खेती, जानें क्या है खास

साथ ही मसौदे में प्रगतिशील किसान समूह बनाने और बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए मूल्य स्थिरीकरण कोष स्थापित करने की सिफारिश की गई है. इसके अलावा सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लिए कानूनी गारंटी की सिफारिश की गई है.

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पंजाब सरकार ने तैयार की नई कृषि पॉलिसी, क्या अब किसान नहीं कर पाएंगे धान की खेती, जानें क्या है खासपंजाब में आई नई कृषि नीति. (सांकेतिक फोटो)

पंजाब में नई कृषि नीति का मसौदा तैयार हो गया है. नए मसौदे में लंबी अवधि वाली धान की किस्मों और 15 ब्लॉकों में धान की खेती पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई. कहा जा रहा है कि प्रदेश में गिरते भूजल स्तर को देखते हुए यह सिफारिश की गई है. मसौदा तैयार करने वाले विशेषज्ञों को उम्मीद है कि लंबी अवधी वाली धान की किस्मों की खेती रोकने से पानी की बर्बादी कम होगी. इससे भूजल स्तर में सुधार आएगा. हालांकि, मुख्यमंत्री भगवनत मान की सरकार पानी की बर्बाद रोकने के लिए कई तरह की योजनाएं भी चला रही है. धान की जगह दूसरी फसल की खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है. साथ ही धान की सीधी बुवाई करने के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है. बड़ी बात यह है कि धान की सीधी बुवाई करने वाले किसानों को 1500 रुपये प्रति हेक्टेयर प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है.

कृषि मसौदे में कहा गया है कि राज्य में 13.91 लाख ट्यूबवेल और कृषि पंप हैं, जिससे फसलों की सिंचाई की जा रही है. खास बात यह है कि ट्यूबवेल और कृषि पंपों को सरकार सब्सिडी पर बिजली मुहैया करा रही है. इसके लिए वह साल में बिजली सब्सिडी के रूप में 7,294 करोड़ रुपये खर्च कर रही है. साथ ही मसौदे में कहा गया है कि पंजाब के 150 में से 15 ब्लॉक में भूजल का गंभीर संकट है. इन ब्लॉक में 300 फीसदी से अधिक भूजल का दोहन हो रहा है. 

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इन फसलों की खेती को मिलेगा बढ़ावा

मसौदे में राज्य सरकार ने कम पानी की खपत वाली फसलों की खेती पर जोर दिया है. इसके लिए वह धान के रकबे को धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से कम करना चाहती है. यही वजह है कि वह पंजब के एक- दो ब्लॉकों में धान की खेती पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है. अब इन ब्लॉकों में किसानों को धान की जगह पर कपास, मक्का, गन्ना और सब्जियों की खेती करने के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि जमीन को बंजर होने से बचाया जा सके. वहीं, इन ब्लॉकों के किसानों को धान की जगह दूसरी फसल की खेती करने के लिए मुआवजा भी दिया जाएगा, ताकि उनका मुनाफा धान के तुलना में कम न हो.

कम भूमि वाले किसानों के लिए पेंशन योजना

साथ ही मसौदे में प्रगतिशील किसान समूह बनाने और बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए मूल्य स्थिरीकरण कोष स्थापित करने की सिफारिश की गई है. इसके अलावा सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लिए कानूनी गारंटी की सिफारिश की गई है. 5 एकड़ से कम भूमि वाले किसानों और मजदूरों के लिए पेंशन योजना का सुझाव दिया गया है. साथ ही बिजली बचाने वालों के लिए 'पानी बचाओ, पैसा कमाओ योजना' का सुझाव दिया गया है.

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महिलाओं और बुजुर्गों के लिए क्या है सिफारिश

वहीं, मसौदे में 60 वर्ष से अधिक आयु के किसानों के लिए पेंशन योजना बनाने, छोटे किसानों के लिए ऋण माफी योजना बनाने, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में सुधार और जैविक खेती और विविधीकरण को बढ़ावा देने की भी सिफारिश की गई है. इसके अलावा पंजाब को बीज हब बनाने, कृषि विपणन अनुसंधान और खुफिया संस्थान (AMRII) की स्थापना करने और सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने का भी प्रस्ताव है. 

 

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