पंजाब के कृषि विशेषज्ञों ने वसंत मक्के की खेती पर जताई चिंता, किसानों से की ये खास अपील

पंजाब के कृषि विशेषज्ञों ने वसंत मक्के की खेती पर जताई चिंता, किसानों से की ये खास अपील

कृषि निदेशक जसवन्त सिंह के अनुसार, वसंत मक्के को 15 से 18 सिंचाई चक्रों में लगभग 105 सेमी पानी की आवश्यकता होती है, हालांकि जब इसकी बुआई मार्च या उससे आगे खिसक जाती है, तो इसके पानी का उपयोग काफी बढ़ जाता है.

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पंजाब के कृषि विशेषज्ञों ने वसंत मक्के की खेती पर जताई चिंता, किसानों से की ये खास अपीलपंजाब में वसंत मक्के की खेती और भूजल स्तर. (सांकेतिक फोटो)

पंजाब में भूजल स्तर तेजी के साथ नीचे जा रहा है. ऐसे में सरकार किसानों से कम सिंचाई वाली फसलों की खेती करने की सलाह दे रही है. इसके बावजूद भी अधिक पानी की खपत वाली फसलों का रकबा बढ़ता ही जा रहा है. पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) के आंकड़ों के अनुसार, 2023 के दौरान राज्य में वसंत मक्के का क्षेत्रफल 1.5 लाख हेक्टेयर था. लेकिन इस साल वसंत मक्के का रकाब बढ़कर 1.8 लाख हेक्टेयर तक पहुंच सकता है, जो पंजाब के लिए चिंता का विषय है.

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएयू के कुलपति एसएस गोसल ने किसानों से फरवरी-जून महीने में मक्के की खेती बंद करने का आग्रह किया है. लेकिन वे चाहते हैं कि धान की जगह खरीफ सीजन के तहत मक्के का रकबा बढ़ाया जाए. दरअसल, वसंत मक्का आम तौर पर जालंधर, होशियारपुर, रोपड़, नवांशहर, लुधियाना और कपूरथला जिले में बड़े स्तर पर उगाया जाता है. क्योंकि यह न केवल गेहूं की तुलना में प्रति एकड़ अधिक उपज देता है, बल्कि इथेनॉल उद्योग में इसकी उच्च मांग भी है. राज्य में एक दर्जन से अधिक इथेनॉल विनिर्माण संयंत्र हैं, जिनकी उत्पादन क्षमता हर दिन 30 लाख लीटर है.

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105 सेमी पानी की होती है जरूरत

कृषि निदेशक जसवन्त सिंह के अनुसार, वसंत मक्के को 15 से 18 सिंचाई चक्रों में लगभग 105 सेमी पानी की आवश्यकता होती है, हालांकि जब इसकी बुआई मार्च या उससे आगे खिसक जाती है, तो इसके पानी का उपयोग काफी बढ़ जाता है. इसकी तुलना में, पारंपरिक रूप से रोपाई प्रणाली के तहत धान को 140-160 सेमी पानी की आवश्यकता होती है, जबकि छोटी अवधि के पीआर126 को 125 सेमी पानी की आवश्यकता होती है.

किसान क्यों करते हैं वसंत मक्के की खेती

1990 के दशक में दोआबा क्षेत्र के कुछ उद्यमशील किसानों ने आलू और मटर की खेती शुरू की. आलू, मटर की कटाई करने के बाद कुछ किसानों ने धान की बुवाई करने से पहले तीसरी फसल के रूप में वसंत मक्के की खेती करने का प्रयोग किया, जिसमें उन्हें सफलता मिली. धीरे-धीरे राज्य में वसंत मक्के का रकबा बढ़ता गया. खास बात यह है कि वसंत मक्की की बुवाई फरवरी महीने में की जाती है, जो पांच महीने में तैयार हो जाती है. वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रमुख मक्का प्रजनक सुंदर संधू ने कहा कि यहां 110 साइलेज इकाइयां हैं जो हरे चारे का उपयोग करती हैं और 13 इथेनॉल उत्पादक इकाइयां हैं, जिसके कारण मक्का की उच्च मांग है. इससे वसंत मक्के की खेती करने वाले किसानों की अच्छी कमाई हो जाती है.

कितनी है वसंत मक्के की पैदावार

उन्होंने कहा कि वसंत मक्के की उपज प्रति एकड़ 40 क्विंटल तक होती है, और यह 1,600 और 1,700 रुपये प्रति क्विंटल के बीच की कीमत पर बिकती है. यानी एकड़ से 65,000 रुपये की कमाई हो जाती है. इसलिए किसान धान की अपेक्षा मक्का को प्राथमिकता देते हैं. धान की एक एकड़ में उपज 22 क्विंटल तक होती है और इसका एमएसपी 2,090 रुपये तय किया गया है.

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किसान करें इसकी खेती

पीएयू के वीसी ने कहा कि सक्रिय विकास अवधि गर्मियों और वर्षा-कम मौसम में पड़ने के कारण, वसंत मक्का सिंचाई जल आवश्यकताओं में चावल से बहुत पीछे नहीं है. गोसल ने कहा कि शुष्क मौसम में उगाया जाने वाला वसंत मक्का भूजल के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करता है, जो हर साल औसतन एक मीटर कम हो रहा है. उन्होंने कहा कि यह सिफ़ारिश की जाती है कि किसान पानी की अधिक खपत वाले धान की जगह खरीफ मक्का का रकबा बढ़ाएं.

 

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