रामनाथपुरम जिले में किसानों ने शुरू की धान की कटाई. (सांकेतिक फोटो)तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के कुछ हिस्सो में धान की फसल तैयार हो गई है. ऐसे में किसानों ने आरएनआर और एनएलआर जैसी मध्यम अवधि की किस्मों की कटाई शुरू कर दी है. किसानों का कहना है कि इस बार अच्छा मुनाफा होगा, क्योंकि पिछले साल के मुकाबले धान की कीमतें थोड़ी अधिक हैं. हालांकि, कुछ किसानों का कहना है कि पिछले साल दिसंबर महीने में अधिक बारिश होने से धान की फसल को नुकसान भी पहुंचा था. ऐसे में कई इलाकों में किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा. ऐसे रामनाथपुरम में 1.3 लाख हेक्टेयर से अधिक रकबे में धान की खेती की जाती है.
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नागरिक आपूर्ति विभाग ने सांबा धान की खरीद के लिए जिले में पहले से ही 70 से अधिक प्रत्यक्ष खरीद केंद्र खोले हैं. इस वर्ष, डीपीसी में अच्छी किस्मों के लिए कीमतें 2,310 रुपये प्रति क्विंटल और बोल्ड किस्मों के लिए 2,265 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित की गई हैं. सूत्रों ने कहा कि इस साल बड़े पैमाने पर किसानों का रुझान निजी व्यापारियों को धान बेचने की ओर है.
खुले बाजार में आरएनआर और अन्य बेहतर किस्मों की कीमतें डीपीसी की तुलना में अधिक हैं. जो किसान पारंपरिक किस्मों की खेती करते हैं, वे डीपीसी का विकल्प चुन रहे हैं. विशेष रूप से, पिछले साल 60 किलोग्राम बैग की कीमत 900 रुपये से 1,200 रुपये तक पहुंच गई थी. वहीं, रवि नाम का एक किसान ने कहा कि बेमौसम बारिश के कारण किसानों को कटाई की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अपनी जेब से 4,000 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं. उसकी माने तो धान की कीमतों में बढ़ोतरी से किसानों को फायदा होगा.
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किसानों ने यह भी दावा किया कि चूंकि दिसंबर की बाढ़ में दक्षिणी जिले में अधिकांश धान क्षतिग्रस्त हो गया था, इसलिए खुले बाजार में मांग में मामूली वृद्धि देखी गई है. संपर्क करने पर, तमिलनाडु राइस मिल ओनर्स एंड राइस मर्चेंट्स एसोसिएशन के संयुक्त सचिव ए अनबरसन ने कहा कि कोविड के बाद से, धान का निर्यात बढ़ गया है, जिससे इसकी मांग बढ़ गई है.
वर्तमान में, कर्नाटक में पुराने चावल के लिए 40 रुपये प्रति किलोग्राम और नए चावल के लिए 38 रुपये है. तमिलनाडु में, आरएनआर धान की दर 29 रुपये से ऊपर है. खास बात यह है कि तमिलनाडु चावल के मामले में आत्मनिर्भर नहीं है. केवल 40 प्रतिशत ही स्थानीय स्तर पर खरीदा जाता है, जबकि शेष की खरीद कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में की जाती है. पिछले कुछ वर्षों में, तमिलनाडु में धान का रकबा काफी हद तक कम हो गया है. मांग में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार रकबा सुधारने के लिए कार्रवाई कर सकती है, जिससे निर्यात में भी बढ़ोतरी होगी.
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