बिहार में बनेगा सब्जी मॉलबिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार कृषि और सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने में जुटी है. इसी दिशा में सहकारिता विभाग ने बड़ा कदम उठाते हुए राज्य में आधुनिक “सब्जी मॉल” और “तरकारी आउटलेट” खोलने की योजना बनाई है.
सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समिति (PVCS) का दायरा बढ़ाकर इसे प्रखंड स्तर से पंचायत स्तर तक विस्तार दिया जाए. इसके लिए जल्द ही राज्यव्यापी महाअभियान चलाया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक किसानों को सहकारी ढांचे से जोड़ा जा सके.
सरकार अब राज्य में “तरकारी आउटलेट” की संख्या बढ़ाने पर जोर दे रही है. मंत्री ने पटना, मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर, दरभंगा और पूर्णिया जैसे बड़े शहरों की आवासीय सोसाइटियों में भी सब्जी बिक्री केंद्र खोलने की संभावनाएं तलाशने का निर्देश दिया है. पटना में इस योजना का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा, ताकि शहरी उपभोक्ताओं को ताजी और क्वालिटी वाली सब्जियां आसानी से मिल सकें.
बिहार पहले ही देश के प्रमुख सब्जी उत्पादक राज्यों में शामिल हो चुका है. अब सरकार इसे एक कदम आगे बढ़ाते हुए “सब्जी मॉल” विकसित करने की दिशा में काम कर रही है.
मंत्री ने अधिकारियों को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का निर्देश दिया है. इन मॉल के जरिए किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा, बिचौलियों की भूमिका कम होगी और उपभोक्ताओं को एक ही जगह पर अच्छी क्वालिटी की सब्जियां मिलेंगी.
डिजिटल युग को ध्यान में रखते हुए सहकारिता विभाग “फार्म टू डेस्क मॉडल” को बढ़ावा दे रहा है. इसके लिए एक समर्पित मोबाइल ऐप तैयार किया जाएगा, जो किसानों और उपभोक्ताओं को सीधे जोड़ेगा. इस ऐप के जरिए किसान सीधे अपनी उपज बेच सकेंगे. ग्राहक बिना बिचौलिया ताजी सब्जियां खरीद सकेंगे और सप्लाई चेन ज्यादा पारदर्शी और मजबूत होगी.
बैठक में 750 मीट्रिक टन क्षमता वाले बहुउद्देशीय शीत भंडारण (Cold Storage) परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के निर्देश भी दिए गए. इससे सब्जियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी. साथ ही, किसानों को आधुनिक खेती और मार्केटिंग तकनीक सिखाने के लिए मास्टर ट्रेनर्स के जरिए ट्रेनिंग कार्यक्रम भी बढ़ाया जाएगा.
सरकार की इन योजनाओं से किसानों की आमदनी बढ़ने की संभावना है और उनकी उपज को बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी. शहरी उपभोक्ताओं को बेहतर और सस्ती सब्जियां मिलेंगी और
खेती और मार्केटिंग में पारदर्शिता आएगी.
कुल मिलाकर, बिहार सरकार का यह कदम राज्य में कृषि मार्केटिंग सिस्टम को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है.
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