
मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सोयाबीन खरीद के आंकड़े जारी किए. मध्य प्रदेश में सोयाबीन किसानों से फसल की सरकारी खरीद जारी है. लेकिन, किसानों ने धीमी खरीद प्रक्रिया को लेकर नाराजगी जताई है. कहा जा रहा है कि उपज में नमी के चलते खरीद प्रक्रिया थोड़ा धीमी है, जो अगले कुछ दिनों में फुल स्पीड में पहुंच जाएगी. न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सोयाबीन की खरीद की शुरुआत के 40 दिन बाद भी केवल 2.04 लाख मीट्रिक टन ही खरीद की जा सकी है. जबकि, खरीद अवधि खत्म होने में करीब 25 दिन का समय ही बचा है और कुल खरीद टारगेट 13 लाख टन से अधिक है.
मध्य प्रदेश में सोयाबीन बिक्री को लेकर किसानों में कम उत्साह की बात कही जा रही है. जानकारों का कहना है कि किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने अभी भी उपज बिक्री के लिए रजिस्ट्रेशन सुविधा खोल रखी है. जबकि, सितंबर महीने में ही किसानों के रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिए गए थे. अक्टूबर के पहले सप्ताह तक 4 लाख किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया था. जबकि, अब तक खरीद केवल 77 हजार किसानों से ही जा सकी है. ऐसे में राज्य के कुछ इलाकों के किसानों ने धीमी खरीद प्रक्रिया को लेकर नाराजगी जताई है. हालांकि, यह कहा जा रहा है कि उपज में नमी की अधिक मात्रा इसका कारण है. अगले कुछ दिनों खरीद फुल स्पीड में पहुंचने की बात कही गई है.
मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बुधवार को सोयाबीन खरीद के आधिकारिक आंकड़े जारी करते हुए बताया कि राज्य में अब तक 2.04 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन की खरीद की जा चुकी है. उन्होंने कहा कि सोयाबीन की यह खरीद 77 हजार से अधिक किसानों से की गई है. राज्य की मंडियों और निर्धारित खरीद केंद्रों पर हर दिन 20 हजार मीट्रिक टन सोयाबीन की आवक हो रही है.

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सभी मंत्रियों को खरीद केंद्रों का दौरा करने को कहा है और वहां की व्यवस्था को जांचने और किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हो इसका इंतजाम करने को कहा है. बता दें कि किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP 4892 रुपये प्रति क्विंटल पर सोयाबीन की खरीद राज्य में की जा रही है. एमएसपी में बीते साल से 292 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी भी की गई है. उन्होंने कहा कि यह पहली बार है कि राज्य में सोयाबीन की पहली बार एमएसपी पर खरीदी हो रही है.
सोयाबीन की खेती में मध्य प्रदेश ने राजस्थान, महाराष्ट्र को पीछे छोड़ दिया है. राज्य में इस बार 55 लाख हेक्टेयर एरिया में सोयाबीन की खेती की गई है और 52 लाख मीट्रिक टन से अधिक उत्पादन का अनुमान जताया गया है. सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने साल 2024 में सोयाबीन का राष्ट्रीय स्तर पर उत्पादन 125.817 लाख टन रहने का अनुमान जताया है, जो पिछले साल की तुलना में 5.96 फीसदी अधिक है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार इस बार खरीफ सीजन में किसानों ने जमकर सोयाबीन की खेती है. इसके चलते राष्ट्रीय स्तर पर सोयाबीन का रकबा पिछले साल की तुलना में करीब 2 लाख हेक्टेयर बढ़कर 125.11 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है.
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