खेत बने तालाब, मक्का हुई बर्बाद!बिहार के नवगछिया के रंगरा प्रखंड में कोसी और गंगा के बढ़े पानी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. सधुवा और चापर गांव में बाढ़ का पानी खेतों में घुस गया है. इससे सैकड़ों एकड़ में लगी मक्का की फसल पानी में डूब गई है. किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन फसल बर्बाद होने से अब कर्ज चुकाने और परिवार का खर्च चलाने की चिंता बढ़ गई है.
सधुवा और चापर गांव के आसपास बाढ़ का पानी फैल गया है. खेत पूरी तरह पानी में डूबे हुए हैं. कई किसानों की तैयार मक्का की फसल भी बाढ़ की चपेट में आ गई है. किसानों के मुताबिक, खेती में बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई पर काफी पैसा खर्च किया गया था. लेकिन बाढ़ के पानी ने उनकी महीनों की मेहनत बर्बाद कर दी. किसानों का कहना है कि यहां हर साल बाढ़ की समस्या रहती है. इस बार भी पानी खेतों में लंबे समय से जमा है, जिससे फसल बचने की उम्मीद कम है.
किसान शिपक कुमार यादव ने बताया कि उन्होंने सात एकड़ जमीन में मक्का की खेती की थी. बाढ़ के कारण उनकी पूरी फसल बर्बाद हो गई है. उन्होंने बताया कि करीब डेढ़ लाख रुपये का नुकसान हुआ है. शिपक कुमार यादव ने कहा कि गांव के कई किसानों की फसल बर्बाद हुई है. किसान कर्ज लेकर खेती करते हैं. ऐसे में अगर सरकार फसल क्षति के बदले आर्थिक मदद देती है, तो उन्हें महाजन का कर्ज चुकाने में कुछ राहत मिल सकती है.
किसान अखिलेश यादव ने बताया कि उन्होंने छह बीघा जमीन में मक्का लगाया था, लेकिन पूरी फसल बाढ़ के पानी में बर्बाद हो गई. इससे उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है. उन्होंने बताया कि खेती के लिए कर्ज लिया था और अब फसल खराब होने के बाद कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया है. अखिलेश यादव के मुताबिक, बाढ़ का पानी घर तक पहुंच गया है. उन्होंने सरकार से फसल नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है.
किसान दीपक यादव ने बताया कि उन्होंने भी मक्का की खेती की थी, लेकिन बाढ़ के पानी में पूरी फसल बर्बाद हो गई. उनका कहना है कि खेती के लिए कर्ज लिया था और हर साल बाढ़ की वजह से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. दीपक यादव ने कहा कि किसान सरकार से सिर्फ फसल नुकसान की भरपाई की मांग कर रहे हैं, ताकि उन्हें इस मुश्किल समय में कुछ राहत मिल सके.
बाढ़ से फसल बर्बाद होने के बाद किसानों ने प्रशासन से खेतों का जल्द सर्वे कराने की मांग की है. किसानों का कहना है कि नुकसान का सही आकलन किया जाए और सरकारी नियमों के तहत उन्हें फसल क्षति का मुआवजा दिया जाए. किसानों के मुताबिक, फसल बर्बाद होने के बाद उनके सामने दोहरी परेशानी है. एक तरफ परिवार का खर्च चलाना है और दूसरी तरफ खेती के लिए लिया गया कर्ज चुकाना है. ऐसे में सरकारी मदद मिलने से उन्हें बड़ी राहत मिल सकती है.
किसानों का कहना है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी उनकी परेशानी खत्म नहीं होगी. खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से अगली फसल की तैयारी प्रभावित हो सकती है. ऐसे में किसानों को दोबारा खेती शुरू करने के लिए भी पैसे की जरूरत होगी. अब सधुवा और चापर गांव के किसानों की नजर प्रशासन पर है. किसान चाहते हैं कि जल्द से जल्द फसल नुकसान का सर्वे कराया जाए और उन्हें सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाए. (सुजीत कुमार का इनपुट)
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