बदलते मौसम के बीच किसानों को सलाह, 15 मई से हल्दी-अदरक और 25 मई से खरीफ मक्का की करें बुवाई

बदलते मौसम के बीच किसानों को सलाह, 15 मई से हल्दी-अदरक और 25 मई से खरीफ मक्का की करें बुवाई

मौसम में आए बदलाव और राज्य में हुई मध्यम वर्षा के बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों के लिए साप्ताहिक कृषि सलाह जारी की है. वैज्ञानिकों के अनुसार खेतों में पर्याप्त नमी होने के कारण 15 मई से हल्दी और अदरक की बुवाई के लिए समय अनुकूल है. हल्दी की उन्नत किस्में ‘राजेंद्र सोनिया’, ‘राजेंद्र सोनाली’ और अदरक की ‘मरान’ और ‘नदिया’ किस्म उत्तर बिहार के लिए अनुशंसित की गई हैं.

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बदलते मौसम में किसानों को सलाह, 15 मई से हल्दी-अदरक और 25 मई से मक्का की करें बुवाईमई महीने में करें खरीफ मक्के की बुवाई

अप्रैल महीने के अंत और मई महीने के शुरुआती सप्ताह में मौसम में काफी बदलाव देखने को मिला है. मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए वैज्ञानिकों ने किसानों को खरीफ फसलों की खेती को लेकर सलाह दी है. डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने खेती को लेकर किसानों के लिए साप्ताहिक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों को अदरक, हल्दी और खरीफ मक्का की बुवाई के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं. इसके साथ ही ओल की खेती के लिए भी समय को अनुकूल बताया गया है.

बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त नमी, हल्दी की करें खेती

विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अपने सुझाव में बताया है कि राज्य में हुई मध्यम वर्षा के कारण खेतों में पर्याप्त नमी है, जो हल्दी की खेती के लिए काफी उपयुक्त है. इसलिए किसान 15 मई से हल्दी की बुवाई शुरू कर सकते हैं. हल्दी की उन्नत किस्मों में ‘राजेंद्र सोनिया’ और ‘राजेंद्र सोनाली’ को उत्तर बिहार के लिए अनुशंसित किया गया है.

खेत की तैयारी के साथ बीज उपचार भी जरूरी

वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि हल्दी की बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई कर लें. जुताई के दौरान 25 से 30 टन गोबर की सड़ी खाद, 60 से 75 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50 से 60 किलोग्राम स्फूर, 100 से 120 किलोग्राम पोटाश और 20 से 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करें. हल्दी के लिए बीज दर 20 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रखने की सलाह दी गई है. इसके साथ ही बुवाई से पहले बीज उपचार जरूर करें. हल्दी की रोपाई 30×20 सेंटीमीटर की दूरी और 5 से 6 सेंटीमीटर की गहराई पर करें.

अदरक की बुवाई के लिए भी समय अनुकूल

अदरक की खेती करने वाले किसान 15 मई से इसकी बुवाई शुरू कर सकते हैं. कृषि वैज्ञानिकों ने उत्तर बिहार के किसानों को विशेष रूप से ‘मरान’ और ‘नदिया’ किस्म के चयन का सुझाव दिया है. वैज्ञानिकों ने खेत की जुताई के दौरान 20 से 30 टन गोबर की सड़ी खाद, 30 से 40 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50 किलोग्राम स्फूर, 80 से 100 किलोग्राम पोटाश, 20 से 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट और 10 से 12 किलोग्राम बोरेक्स प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करने की सलाह दी है. अदरक के लिए 18 से 20 क्विंटल बीज प्रति हेक्टेयर उपयोग करने का सुझाव दिया गया है. वहीं अदरक की रोपाई 30×20 सेंटीमीटर की दूरी पर करने की सलाह किसानों को दी गई है.

इन फसलों की खेती भी शुरू करें किसान

कृषि वैज्ञानिकों द्वारा जारी साप्ताहिक सुझाव में कहा गया है कि जो किसान खरीफ मक्का की खेती करना चाहते हैं, वे खेत की तैयारी शुरू कर दें और 25 मई से मक्का की बुवाई कर सकते हैं. इसके साथ ही किसान धान की रोपाई के लिए ‘गजेंद्र’ किस्म का चयन कर सकते हैं.

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