Wheat Farming New Technology: इस तरीके से करें गेहूं की बुवाई, पानी और बीज लगेगा कम, पैदावार बहुत ज्यादा

Wheat Farming New Technology: इस तरीके से करें गेहूं की बुवाई, पानी और बीज लगेगा कम, पैदावार बहुत ज्यादा

ट्रांसप्लांट विधि गेहूं की खेती के लिए आधुनिक और उपयोगी तकनीक है, खासकर तब जब खेत देर से खाली हो, पानी सीमित हो या किसान अधिक अंकुरण और बेहतर विकास चाहते हों. सही नर्सरी, सटीक रोपाई और समय पर सिंचाई करने से यह विधि पारंपरिक बुवाई से बेहतर परिणाम दे सकती है.

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इस तरीके से करें गेहूं की बुवाई, पानी और बीज लगेगा कम, पैदावार मिलेगी बहुत ज्यादाट्रांसप्लांट तरीके से गेहूं की बुवाई

अगर आपने अभी तक गेहूं की बुवाई नहीं की है तो आज हम आपको एक ऐसा तरीका बता रहे हैं जिसके बाद आप हमेशा के लिए गेहूं बुवाई का पारंपरिक तरीका छोड़ देंगे. आमतौर पर सभी किसान गेहूं की बुवाई सीधी ड्रिलिंग से करते हैं. ऐसे में अगर आपको एक ऐसा तरीका मिल जाए, जिससे गेहूं की फसल में पानी की भी जरूरत कम पड़ेगी और खेत देर से खाली होने का भी झंझट खत्म हो जाएगा. साथ ही इस नए तरीके में आपको अंकुरण भी अधिक मिलेगा. गेहूं की बुवाई का ये तरीका ट्रांसप्लांट कहलाता है. इसे आप आसान भाषा में रोपाई विधि भी कह सकते हैं. इस विधि में गेहूं की पहले नर्सरी तैयार की जाती है और फिर इसकी पौध खेत में सीधे रोप दी जाती है. रोपाई विधि से गेहूं की फसल में आपको पैदावार ज्यादा मिलेगी और अनियमित मौसम से भी अधिक सुरक्षा मिलती है.

नर्सरी की तैयारी कैसे करें?

सबसे पहले ये समझिए कि नर्सरी की तैयारी कैसे होगी. क्योंकि ट्रांसप्लांट विधि की शुरुआत नर्सरी बनाने से ही होती है. इसके लिए अगर आपको1 एकड़ खेत में गेहूं लगाना है तो लगभग 6 से 8 किलो बीज नर्सरी में लगाया जाता है. जहां नर्सरी बना रहे हैं उस स्थान को समतल और उपजाऊ करें. पास में पानी का स्रोत होना भी जरूरी है. ये इंतजाम हो जाने के बाद नर्सरी की मिट्टी को भुरभुरा करें और फिर 1-2 टन अच्छी गोबर की खाद मिलाए. इसके छोटे-छोटे बेड बनाकर बढ़िया सिंचाई करें. अब इसमें बीज डालने के पहले बीजोपचार जरूर कर लें.

गेहूं के बीज को 15 से 20 मिनट तक फफूंदनाशक घोल में उपचारित करें. इससे रोग कम होंगे. इसके बाद नर्सरी में बुवाई का तरीका सबसे अहम है. नर्सरी में 1 से 1.5 सेंटीमीटर गहराई पर गेहूं के बीज बोने हैं. फिर हल्की सिंचाई करें. इसके बाद 3 से 4 दिन में अंकुरण होना शुरू हो जाएगा. इस नर्सरी में गेहूं के पौधों को 18 से 22 दिन तक बढ़ने दें. ध्यान रहे कि खेत में रोपाई के लिए 12 से 15 सेंटीमीटर लंबाई वाले पौधे सबसे बेहतर रहेंगे.

खेत की तैयारी और रोपाई

अब समय से बुवाई के लिए जब तक नर्सरी तैयार होती है, तब तक खेत भी तैयार कर लें. इसके लिए खेत में दो बार जुताई करें और एक बार पाटा लगाकर खेत को समतल करें. खेत बनाते हुए ये ध्यान रहे कि पानी की रुकावट न हो पाए. खेत तैयार करने के लिए खाद की मात्रा का भी संतुलन बनाना होगा. इसके लिए प्रति एकड़ 40 से 45 किलो नाइट्रोजन डालें. 20 से 25 किलो फॉस्फोरस डालें और 15 से 20 किलो पोटाश डालिए. खेत में आधी मात्रा पहले ही डाल दें.

जब खेत तैयार हो जाए तो बारी आती है रोपाई की. करीब 18 से 22 दिन बाद नर्सरी से पौधे निकालने का समय आता है. रोपाई करने के लिए पौधों को जड़ों सहित हल्के हाथों से निकालें. ध्यान रहे कि खेत में रोपाई 2 से 3 पौधों के छोटे गुच्छों में करें. पौधे 20×20 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाएं. बहुत गहराई में न लगाएं, बस जड़ तक मिट्टी रहे इतना जरूरी है.

सिंचाई और खरपतवार प्रबंधन

अब रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें ताकि पौधे खेत में जल्दी सेट हो जाएं. खेत में ट्रांसप्लांट किए गए गेहूं में शुरुआती 25-30 दिन ध्यान रखना जरूरी है. इसकी पहली सिंचाई रोपाई के 5–7 दिन बाद करना होगा. इसके बाद जरूरत के हिसाब से कल्ले आने के समय सिंचाई सबसे जरूरी है. खरपतवार नियंत्रण करना भी अहम है. रोपाई के 20 से 25 दिन बाद उचित खरपतवारनाशक का उपयोग करें. इससे पौधे पोषक तत्व और जगह पूरी तरह ले पाते हैं.

ट्रांसप्लांट विधि के फायदे

  • देर से बुवाई की स्थिति में भी अच्छी पैदावार मिलती है
  • बुवाई के वक्त बीज की बचत होती है
  • पौधों की समान दूरी से अच्छा विकास होता है
  • इस विधि में पानी की कम जरूरत पड़ती है
  • अनियमित मौसम में जोखिम कम रहता है

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