मक्के को चार घंटे पानी में भिगाएं और हरा चारा तैयार, गोवा में तैयार हुई ये नई टेक्नोलॉजी 

मक्के को चार घंटे पानी में भिगाएं और हरा चारा तैयार, गोवा में तैयार हुई ये नई टेक्नोलॉजी 

गोवा अपनी रोजाना की दूध की जरूरत का एक तिहाई हिस्‍सा यानि करीब चार लाख लीटर दूध का उत्‍पादन करता है. जबकि बाकी की जरूरत के लिए वह पूरी तरह से दूसरे राज्यों पर निर्भर है. गोवा में डेयरी फार्मिंग की सबसे बड़ी समस्या चारा और सही चारे का नहीं मिलना है. राज्य के ज्‍यादातर किसानों के पास एक हेक्टेयर से भी कम की जमीन है.

Advertisement
मक्के को चार घंटे पानी में भिगाएं और हरा चारा तैयार, गोवा में तैयार हुई ये नई टेक्नोलॉजी गोवा में हरा चारा तैयार करने के लिए डेवलप की गई खास टेक्निक

गोवा अपनी रोजाना की दूध की जरूरत का एक तिहाई हिस्‍सा यानि करीब चार लाख लीटर दूध का उत्‍पादन करता है. जबकि बाकी की जरूरत के लिए वह पूरी तरह से दूसरे राज्यों पर निर्भर है. गोवा में डेयरी फार्मिंग की सबसे बड़ी समस्या चारा और सही चारे का नहीं मिलना है. राज्य के ज्‍यादातर किसानों के पास एक हेक्टेयर से भी कम की जमीन है. इसलिए राज्य को चरागाह के लिए जमीन की समस्या का सामना करना पड़ रहा है. यह समस्या छोटे जोत के आकार, मिट्टी में मौजूद नमक, बाड़ लगाने की ज्‍यादा लागत और मजदूरी के कारण बरकरार है.   राज्य में हर साल चारा, हरा चारा और सूखे चारे की जरूरत क्रमशः करीब 1.23, 10.08 और 1.67 लाख टन है. लेकिन सप्‍लाई इस जरूरत को पूरा नहीं कर पाती है.  

बाजार में चारे की लागत ज्‍यादा 

चारे और चारे की बाजार लागत भी बहुत ज्‍यादा है. ऐसे में यहां पर एक खास टेक्निक को डेवलप किया गया है जिसका फायदा भी लोगों को मिल रहा है.  डेयरी व्यवसाय की बेहतरी के लिए भारत सरकार की राष्‍ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के तहत गोवा डेयरी की तरफ से पुराने गोवा में आईसीएआर रिसर्च कैंपस में एक हाइड्रोपोनिक्स हरा चारा उत्पादन की यूनिट लगाई गई है. आरकेवीवाई के तहत गोवा की कई डेयरी सहकारी समितियों में 10 और यूनिट्स लगाई गईं.  हर यूनिट सात दिनों में प्रतिदिन 600 किलोग्राम हरा चारा उत्पादन की क्षमता है. गोवा के आईसीएआर रिसर्च कैंपस ने हाइड्रोपोनिक्स हरे चारे के उत्पादन और फीडिंग प्रैक्टिस को स्‍टैंडर्डइज्‍ड किया है. साथ ही डेयरी किसानों को तकनीकी सलाह भी मुहैया कराई है. यह हरा चारा मक्का द्वारा उगाया जाता है. 

यह भी पढ़ें-मक्के की फसल में जिंक की कमी के क्या हैं लक्षण, कैसे दूर होगी समस्या?

इस चारे में प्रोटीन भी ज्‍यादा 

मक्का के बीज को भिगोने के लिए सिर्फ 4 घंटे का समय काफी होता है. 1.25 किलोग्राम बिना भिगोए मक्का के बीज से तैयार भिगोए हुए बीज को 90X32 सेमी ट्रे में लोड किया जाता है. पीले मक्का (CT-818) और सफेद मक्का (GM-4)के हर किलोग्राम से क्रमशः करीब 3.5 किलोग्राम और 5.5 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक्स हरा चारा तैयार किया गया. सफेद मक्का (4 रुपये) से हाइड्रोपोनिक्स हरा चारा की उत्पादन लागत, पीले मक्का (5 रुपये) से कम थी. पारंपरिक हरे चारे की तुलना में, हाइड्रोपोनिक्स हरे चारे में अधिक कच्चा प्रोटीन (13.6 बनाम 10.7 फीसदी ) और कम कच्चा फाइबर (14.1 बनाम 25.9फीसदी) होता है.  

यह भी पढ़ें-बिहार में नलकूप और बोरिंग के लिए किसानों को मिलेगी 50 प्रतिशत की सब्सिडी, ये है शर्त

डेयरी पशुओं के लिए हाइड्रोपोनिक्स हरे चारे का सेवन 24 किलोग्राम/पशु/दिन तक था. चूंकि हरा चारा डेयरी राशन का एक अभिन्न हिस्‍सा है तो ऐसी स्थितियों में जहां चारा सफलतापूर्वक नहीं उगाया जा सकता है या डेयरी झुंड वाले एडवांस्‍ड मॉर्डन डेयरी किसान अपने डेयरी पशुओं को खिलाने के लिए हाइड्रोपोनिक्स हरा चारा पैदा कर सकते हैं. 

यह भी पढ़ें- तेलंगाना में कम बारिश से किसानों ने बदला खेती का पैटर्न, कपास और मक्के की बुवाई पर जोर   

चारा खिलाने पर बढ़ा दूध 

गोवा के पेरनेम तालुका के मंड्रेम गांव के सूर्यकांत बी गावड़े के पास 12 हाइब्रिड गायों और चार बछियों का झुंड है. वह रोजाना 60-70 लीटर दूध की सप्‍लाई करते हैं. उनकी सबसे बड़ी समस्या गुणवत्ता वाले हरे चारे का नहीं मिलना था. उनके खेत में हाइड्रोपोनिक्स ग्रीन फॉडर प्रोडक्‍शन यूनिट लगाई गई थी.  तब से ही वह हाइड्रोपोनिक्स टेक्निक से हरा चारा मक्का पैदा कर रहे हैं.

यह भी पढ़ें- Crop MSP : केंद्र सरकार कैसे तय करती है फसलों की MSP! क्‍या है फार्मूला...


एक गाय को 10 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक्स चारा मक्का खिलाने पर, उन्होंने प्रति गाय 1.0 किलोग्राम कंसनट्रेट मिक्‍सचर की बचत की. वहीं, प्रति गाय प्रति दिन 1.0 लीटर दूध में इजाफे का भी अनुभव किया जो दूध उत्पादन के 12.5 फीसदी ​​के बराबर था. 

1-2 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक्स चारा खिलाए गए छोटे बछड़ों का शरीर का वजन भी 200 ग्राम से बढ़कर 350 ग्राम हो गया. उनकी स्किन भी बेहतर हुई.  प्रति गाय प्रतिदिन दूध उत्पादन में वृद्धि पर 30 रुपये की बचत होती है. प्रतिदिन प्रति गाय 10 रुपये का अतिरिक्त शुद्ध लाभ होने के साथ-साथ पशु स्वस्थ रहते हैं. 

POST A COMMENT