कर्नाटक की GI टैग तुअर दाल पहुंची मालदीव, किसानों को बाजार से 30% से ज्यादा मिला भाव

कर्नाटक की GI टैग तुअर दाल पहुंची मालदीव, किसानों को बाजार से 30% से ज्यादा मिला भाव

कर्नाटक की GI टैग गुलबर्गा तुअर दाल का मालदीव निर्यात शुरू हो गया है. APEDA की पहल से किसानों को 60 रुपये प्रति किलो के बाजार भाव के मुकाबले 82 रुपये प्रति किलो मिले हैं. इससे किसानों के लिए विदेशी बाजार में नए अवसर खुलने की उम्मीद है.

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कर्नाटक की GI टैग तुअर दाल पहुंची मालदीव, किसानों को बाजार से 30% से ज्यादा मिला भावगुलबर्गा तुअर दाल का निर्यात

कर्नाटक की प्रसिद्ध GI टैग गुलबर्गा तुअर दाल ने विदेशी बाजार में दस्तक दी है. कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने कर्नाटक से मालदीव के लिए एक मीट्रिक टन गुलबर्गा तुअर दाल के निर्यात की सुविधा दिलाई है. खास बात यह है कि इस निर्यात से जुड़े चैनल के जरिए किसानों को स्थानीय बाजार के मुकाबले 30 फीसदी से ज्यादा कीमत मिली है.

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मुताबिक, इस खेप को 24 सितंबर को रवाना किया गया. स्थानीय बाजार में तुअर दाल का मौजूदा भाव करीब 60 रुपये प्रति किलो है, जबकि निर्यात से जुड़े चैनल के माध्यम से किसानों को 82 रुपये प्रति किलो की कीमत मिली. इस तरह किसानों को प्रति किलो करीब 22 रुपये ज्यादा मिले हैं.

इस खेप का निर्यात मैसूर स्थित Silken Global Exports and Imports ने अपने FPO आधारित ब्रांड के माध्यम से किया है. दाल की खेप समुद्री रास्ते से मालदीव भेजी जाएगी.

सरकार का मानना है कि इस पहल से किसान उत्पादक संगठनों यानी FPOs को निर्यात आधारित सप्लाई चेन से जुड़ने का अवसर मिलेगा. साथ ही किसान अपने क्षेत्रीय कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाकर बेहतर कीमत हासिल कर सकेंगे.

सरकार के मुताबिक, गुलबर्गा तुअर दाल का मालदीव निर्यात भविष्य में नियमित आपूर्ति का रास्ता भी खोल सकता है. ऐसा होने पर कर्नाटक के किसानों और निर्यातकों के लिए एक स्थायी विदेशी बाजार तैयार होने की संभावना है.

2019 में मिला था GI टैग

गुलबर्गा तुअर दाल कर्नाटक के कलबुर्गी क्षेत्र की खास पहचान है. इसे 2019 में भौगोलिक संकेतक यानी GI टैग मिला था. अपने खास स्वाद और क्वालिटी के लिए पहचानी जाने वाली यह दाल क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखती है. कलबुर्गी कर्नाटक में तुअर की खेती और उत्पादन के प्रमुख केंद्रों में शामिल है.

APEDA के चेयरमैन अभिषेक देव ने कहा कि भारत के GI टैग वाले कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने से उनकी वैश्विक पहचान मजबूत करने के साथ किसानों के लिए नए बाजार भी तैयार किए जा सकते हैं.

APEDA की यह पहल GI टैग और वैल्यू एडेड कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की कोशिशों का हिस्सा है. इसके जरिए FPO आधारित ब्रांडों को विदेशी खरीदारों से जोड़ने और किसानों की अंतरराष्ट्रीय वैल्यू चेन में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.(ANI)

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