कम अवधि वाली धान की खेतीओडिशा में जून महीने में सामान्य से कम बारिश होने के बाद राज्य सरकार ने किसानों के लिए नई कृषि सलाह जारी की है. सरकार ने किसानों से अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए कम अवधि वाली धान की किस्मों की खेती करने की अपील की है. इसके साथ ही किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सभी जिलों में पर्याप्त मात्रा में बीज भी उपलब्ध कराए गए हैं. ओडिशा के उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने बताया कि यह फैसला केंद्र सरकार की सलाह के आधार पर लिया गया है. उन्होंने कहा कि मई में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी राज्यों के साथ बैठक कर अल नीनो के संभावित असर को देखते हुए कम अवधि वाली फसलों की खेती और उनके लिए बीजों की उपलब्धता तय करने के निर्देश दिए थे.
उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने बताया कि केंद्र की सलाह मिलने के बाद राज्य सरकार ने सभी जिलों के कलेक्टरों, कृषि विभाग के अधिकारियों, कृषि सचिव और कृषि और बागवानी निदेशकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बैठक की. बैठक में मौसम की स्थिति और किसानों की जरूरतों की समीक्षा की गई. इसके बाद सभी जिलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए.
कनक वर्धन सिंह देव ने कहा कि मौसम विभाग के अनुसार, जून में बारिश कम रही, जबकि जुलाई में सामान्य बारिश होने की संभावना है. हालांकि, अगस्त में फिर से बारिश कम होने की आशंका जताई गई है. ऐसे में किसानों को लंबी अवधि वाली करीब 120 दिन में तैयार होने वाली धान की किस्मों के बजाय 60 से 70 दिन में तैयार होने वाली कम अवधि की किस्में लगाने की सलाह दी गई है. इससे कम बारिश की स्थिति में भी फसल को बचाया जा सकेगा. उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध करा दिए गए हैं, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि जून महीने में राज्य के सभी 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई. केवल ढेंकनाल जिले में बारिश की कमी करीब 1.2 प्रतिशत रही, जबकि बाकी सभी जिलों में औसत से काफी कम वर्षा हुई. इससे खरीफ सीजन की शुरुआत प्रभावित हुई और किसानों की चिंता बढ़ गई. हालांकि, 1 जुलाई से राज्य में लगातार बारिश हो रही है. बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के कारण कई जिलों में सामान्य से अधिक और कई जगह सामान्य बारिश दर्ज की गई है, लेकिन सरकार का मानना है कि यह स्थिति लंबे समय तक नहीं रह सकती.
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि लगातार बारिश से जहां जल संकट में कुछ राहत मिली है, वहीं अत्यधिक पानी के कारण कई इलाकों में खेतों की जुताई और बुवाई का काम भी प्रभावित हुआ है. खेतों में पानी भर जाने से किसान खेती शुरू नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे में किसानों को जलस्तर कम होने का इंतजार करना होगा. उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने पहले ही बुवाई कर ली है, उन्हें मौजूदा बारिश का फायदा मिल सकता है. सरकार को उम्मीद है कि किसान कृषि विभाग की सलाह के अनुसार कम अवधि वाली फसलों का चयन करेंगे, जिससे मौसम की अनिश्चितता के बावजूद उत्पादन पर कम असर पड़ेगा और किसानों को नुकसान से बचाया जा सकेगा. (ANI)
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