कपास की नई फसल की आवक हुई शुरू कपास की नई फसल की आवक शुरू हो गई है. साथ ही इस साल के सीजन के लिए मंडियों में खरीदारी भी शुरू हो गई है. महाराष्ट्र देश का प्रमुख कपास उत्पादक है और जलगांव महाराष्ट्र में इसके उत्पादन के लिए जाना जाता है. यहां नए सीजन के कपास को 7053 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिला है. जबकि पुराना कपास 7600 रुपये के भाव पर बिक रहा है. हालांकि सभी जगहों पर इतना दाम नहीं मिल रहा. दूसरी ओर लंबे रेशे वाले कपास की एमएसपी 7020 रुपये जबकि मध्यम रेशे के कपास की एमएमपी 6620 रुपये क्विंटल तय है. हालांकि, कपास की उत्पादन लागत को देखते हुए राज्य के किसान 10 हजार रुपये प्रति क्विंटल का भाव मांग रहे हैं. अब देखना यह है कि इस बार किसानों की उम्मीद पूरी होती है या फिर उन्हें निराशा हाथ लगती है.
गणेश चतुर्थी के अवसर पर हर साल जलगांव जिले के धरनगांव में श्री जी कॉटन जिनिंग में कपास खरीदने का मुहूर्त होता है. राज्य के मंत्री गुलाबराव पाटिल ने इस बार मुहूर्त की खरीदारी का शुभारंभ किया है. हर साल के शुरुआती मौके पर कपास हमेशा ऊंचे दाम पर खरीदा जाता है. लेकिन इस साल कपास की कीमत कम होने से किसान चिंता व्यक्त कर रहे हैं. साल 2021 और 2022 में कपास का दाम 12000 से 14000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया था.
ये भी पढ़ें- एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाने के खिलाफ बंद रहेंगी नासिक की प्याज मंडियां, गुस्से में किसान और व्यापारी
किसानों का कहना है कि कपास उत्पादन की लागत को देखते हुए अभी इसका बाजार भाव फिलहाल कम है. कई किसानों के घरों में अभी भी पिछले साल का कपास बचा हुआ है, जबकि नए कॉटन को लेकर घरेलू और विदेशी बाजार की तस्वीर अभी भी साफ नहीं है. कपास खरीददारों ने बेहद सतर्कता वाला रुख अपनाते हुए मुहूर्त के अवसर पर नई कपास का भाव 7053 जबकि पुरानी कपास का रेट 7600 रुपये दिया. ताकि मध्य प्रदेश के खरगोन जैसे झगड़े की नौबत न आए.
कपास की कीमत अब 7000 रुपये के आसपास है, लेकिन भविष्य में देश और विदेश में होने वाले उत्पादन को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि कपास की कीमत में उतार-चढ़ाव होगा. किसानों को उम्मीद है कि इस साल भी 2021 की तरह कपास की अच्छी कीमत मिलेगी. लेकिन 2022 में इसमें मामूली कमी आ गई थी. इसीलिए कई किसानों का पुराना कपास अभी भी घर पर है. अच्छे दाम की उम्मीद में किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है.
उधर, इस साल कम बारिश के कारण कपास की फसल को पहले ही काफी नुकसान हो चुका है. ऐसे में देखना यह है इस साल आगे चलकर भाव कैसा रहने वाला है. क्या बाजार किसानों के नुकसान की भरपाई करेगा या फिर नुकसान की खाई को और गहरा कर देगा.
ये भी पढ़ें- Tomato Price: किसानों ने सड़क पर फेंका टमाटर, खेत से मंडी तक ले जाने का खर्च तक निकालना मुश्किल
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today