अब आम के किसानों को मिलेगी राहतओडिशा में साल 2026 का आम सीजन बहुत अच्छे तरीके से शुरू हुआ है. इस बार किसानों के लिए खुशखबरी आई है, क्योंकि सीजन की शुरुआत में ही अच्छी बिक्री देखने को मिली है. राज्य के ढेंकानाल जिले से पहली बार 3 टन अच्छे क्वालिटी के आम पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी भेजे गए हैं. इस काम को मदनमोहन किसान उत्पादक कंपनी (FPC) ने पूरा किया, जिसे नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की मदद मिली. यह पहली बड़ी खेप किसानों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है और इससे उन्हें अपनी मेहनत का अच्छा दाम मिल रहा है.
इस बार आम बेचने पर किसानों को पहले से ज्यादा पैसे मिल रहे हैं. पिछले साल जहां आम की कीमत करीब 25 रुपये प्रति किलो थी, वहीं इस साल यह बढ़कर 45 रुपये प्रति किलो हो गई है. यानी किसानों को लगभग 80 प्रतिशत ज्यादा फायदा हुआ है. इससे किसानों के चेहरे पर खुशी साफ देखी जा सकती है. जब मेहनत का अच्छा फल मिलता है, तो किसानों का मन और भी ज्यादा काम करने के लिए उत्साहित हो जाता है. इस अच्छी शुरुआत से पूरे सीजन में किसानों को और भी बेहतर कमाई की उम्मीद है.
इस पूरे काम में सरकार और कई संस्थाएं मिलकर किसानों की मदद कर रही हैं. यह योजना ‘प्रमोशन एंड स्टेबलाइजेशन ऑफ फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन’ (PSFPO) के तहत चलाई जा रही है. इसे कृषि और किसान सशक्तिकरण विभाग के बागवानी निदेशालय द्वारा शुरू किया गया है. इस योजना को लागू करने में पैलेडियम कंसल्टिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, गेट्स फाउंडेशन और हर्षा ट्रस्ट जैसी संस्थाएं भी मदद कर रही हैं. इन सभी के सहयोग से किसानों को सही जानकारी, अच्छी तकनीक और बाजार तक पहुंच मिल रही है.
जो आम सिलीगुड़ी भेजे गए, उनकी क्वालिटी बहुत अच्छी पाई गई. इससे खरीदारों का भरोसा बढ़ा है और भविष्य में भी वे ओडिशा से आम खरीदना चाहेंगे. जब कोई चीज अच्छी होती है, तो लोग उसे बार-बार खरीदते हैं. यही वजह है कि अब ओडिशा के आम की मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है.
पिछले साल ओडिशा से 120 टन से ज्यादा आम 11 से अधिक देशों में भेजे गए थे. इस साल सरकार और संस्थाएं मिलकर इस व्यापार को और बढ़ाने की योजना बना रही हैं. इस बार लक्ष्य रखा गया है कि 500 टन से ज्यादा आम का व्यापार किया जाए. अगर ऐसा होता है, तो किसानों को और ज्यादा फायदा होगा और उनकी आमदनी भी बढ़ेगी.
ओडिशा में आम का यह सीजन किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है. अच्छी कीमत, सही मार्गदर्शन और बाजार से जुड़ाव के कारण किसान अब ज्यादा आत्मनिर्भर बन रहे हैं. यह पहल दिखाती है कि अगर सही समय पर सही मदद मिले, तो किसान अपनी मेहनत से बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं. आने वाले समय में ओडिशा का आम देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान बना सकता है.
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