मांग के हिसाब से कपास का उत्पादन कम रहने का अनुमान है. कपास उत्पादन में 7 फीसदी गिरावट का अनुमान लगाया गया है. पिछले सीजन में कपास का उत्पादन 325.29 लाख गांठ दर्ज किया गया था. इस सीजन कपास के रकबे में गिरावट की वजह बारिश से फसल खराब होने और किसानों के दूसरी फसलों की ओर शिफ्ट होने को माना जा रहा है. वहीं, भारतीय कपास संघ के अनुसार कपास की खपत 170 किलोग्राम की 313 लाख गांठ रहने का अनुमान है, जो बीते साल के समान है. इसका मतलब है कि मांग के हिसाब से उत्पादन कम रहने वाला है. ऐसे में कपास की घरेलू और वैश्विक कीमतें प्रभावित होने की आशंका है.
भारतीय कपास संघ ((Cotton Association of India CAI) का मानना है कि 2024-25 में कपास की फसल पिछले साल के मुकाबले 7 फीसदी घटकर 170 किलो की 302.25 लाख गांठ रह जाएगी. पिछले सीजन में उत्पादन 325.29 लाख गांठ था. कपास के उत्पादन में गिरावट कुछ इलाकों में फसल पर प्रतिकूल मौसम और कम रकबे के कारण है. इस खरीफ सीजन में कपास की बुआई में लगभग 10 फीसदी की गिरावट आई है, जो पिछले वर्ष के 126.9 लाख हेक्टेयर से घटकर 112.9 लाख हेक्टेयर रह गई है, जो औसत 129.34 लाख हेक्टेयर से काफी कम है.
भारतीय कपास संघ के अनुसार 2024-25 के दौरान कपास की खपत 170 किलोग्राम की 313 लाख गांठ रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के समान है. ऐसे में 1 अक्टूबर से शुरू हुए नए सीजन में भारत का कपास आयात बढ़कर 25 लाख गांठ होने की उम्मीद है, जो एक साल पहले 17.5 लाख गांठ था. इसके विपरीत देश का कपास निर्यात एक साल पहले के 28.5 लाख गांठ से घटकर 18 लाख गांठ रहने का अनुमान है.
कपास उत्पादन में यह अनुमानित गिरावट घरेलू कपड़ा उद्योग और वैश्विक बाजारों दोनों की परेशानी बढ़ाएगी. क्योंकि भारत कपास के सबसे बड़े उत्पादकों और निर्यातकों में से एक है. कपास उत्पादन घटने से घरेलू स्तर पर कीमतें उछल सकती हैं. इससे भारत के कपड़ा क्षेत्र के लिए कच्चे माल की लागत पर असर पड़ सकता है. वहीं, वैश्विक कपास बाजार भी कीमतों में उछाल से प्रभावित होगा.
बेमौसम बारिश ने कपास उगाने वाले प्रमुख क्षेत्रों को काफी प्रभावित किया है, जिससे फसल को नुकसान पहुंचा है और उपज में कमी आई है. मौसम चुनौतियों के अलावा कपास की खेती के क्षेत्र में कमी किसानों के अधिक लाभदायक फसलों की ओर शिफ्ट होने को दर्शाती है. ज्यादातर किसान कपास की जगह मूंगफली या धान की खेती की ओर शिफ्ट हो रहे हैं. इसके अलावा प्रमुख कपास उत्पादकों में शामिल पंजाब में पिछले साल कपास की फसल में कीटों के प्रकोप के चलते क्वालिटी में गिरावट दर्ज की गई थी, जिससे किसानों को बाजार में सही दाम नहीं मिला था.
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