
आलू किसानों पर संकटबंगाल चुनाव प्रचार का आज आखिरी दिन है. इस बीच गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान आलू किसानों की सबसे बड़ी परेशानी को उठाया है. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के किसानों को उनकी उपज का सही दाम नहीं मिल रहा है. अमित शाह ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के “अहंकार” के कारण बंगाल में उत्पादित आलू को ओडिशा और झारखंड भेजने की अनुमति नहीं दी जाती, जिसकी वजह से किसानों को 20 रुपये प्रति किलो मिलने के बजाय 2 रुपये प्रति किलो तक की कीमत मिल रही है.
गृह मंत्री अमित शाह ने वादा किया कि भाजपा की सरकार बनने के बाद पहले ही दिन से बंगाल का आलू पूरे देश में बेचा जाएगा और बेहतर बीज उत्पादन के लिए परियोजना भी शुरू की जाएगी, ताकि किसानों को पंजाब से बीज न मंगवाना पड़े.
दरअसल, इस बार पश्चिम बंगाल में आलू की रिकॉर्ड पैदावार किसानों के लिए राहत नहीं, बल्कि बड़ी परेशानी बन गई है. राज्य के सिंगूर इलाके, जिसे आलू उत्पादन का बड़ा केंद्र माना जाता है, वहां किसान भारी नुकसान झेल रहे हैं. गोदाम आलू से भरे पड़े हैं, लेकिन सही दाम नहीं मिलने से किसान परेशान हैं. राजधानी कोलकाता से करीब एक घंटे की दूरी पर स्थित सिंगूर में सुबह-सुबह जब खेतों और गोदामों का हाल देखा गया, तो हर जगह आलू के ढेर नजर आए. कहीं बोरी में भरा आलू पड़ा था, तो कहीं जमीन पर खुले में रखा था. कई जगह सड़े हुए आलू की बदबू भी फैल रही थी.

एक किसान ने बताया कि बाजार में आलू का भाव पूरी तरह गिर चुका है. उन्होंने कहा कि मेहनत का पैसा भी नहीं निकल पा रहा है. वहीं, दूसरे किसान ने कहा कि अगर आलू बिक जाता, तो घर जाकर परिवार के साथ आराम करता, लेकिन अब जेब खाली है और घर जाने का मन भी नहीं करता. स्थानीय किसान प्रदीप दास ने बताया कि इस बार उत्पादन बहुत ज्यादा हुआ है, लेकिन बिक्री नहीं हो पा रही. उन्होंने कहा कि एक बीघा जमीन में आलू उगाने पर करीब 32 हजार रुपये खर्च आता है, जबकि उन्हें सिर्फ 16 से 18 हजार रुपये ही मिल रहे हैं. यानी लागत का आधा पैसा भी वापस नहीं मिल रहा.
किसानों का कहना है कि दूसरे राज्यों में भी आलू की पैदावार बढ़ी है, जिससे बंगाल का आलू बाहर नहीं जा पा रहा है. कोल्ड स्टोरेज पूरी तरह भर चुके हैं और नए आलू रखने की जगह नहीं बची है. ऐसे में कई किसानों की फसल सड़ने लगी है. एक किसान ने डर के माहौल का भी जिक्र किया. उन्होंने कैमरे पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया और बाद में कहा कि अगर खुलकर बोलेंगे तो नुकसान हो सकता है. इससे साफ है कि किसान सिर्फ आर्थिक संकट ही नहीं, बल्कि मानसिक दबाव भी झेल रहे हैं.
किसान जोहर दत्ता ने कहा कि इस साल हालात बेहद खराब हैं. हर जगह आलू के ढेर लगे हैं, लेकिन खरीदार नहीं मिल रहे हैं. वहीं, किसान विश्वजीत ने दावा किया कि लगातार नुकसान के कारण कुछ किसानों ने आत्महत्या तक कर ली है. उन्होंने बताया कि आलू की उत्पादन लागत करीब 8 रुपये प्रति किलो है, लेकिन बाजार में बेहद सस्ते दाम पर आलू बिक रहा है. ऐसे में किसानों के सामने परिवार चलाने का संकट खड़ा हो गया है. ऐसे में बंपर पैदावार, गिरते दाम, भरे कोल्ड स्टोरेज और बाजार की कमी ने बंगाल के आलू किसानों की हालत बेहद खराब कर दी है. किसान अब सरकार से मदद और बेहतर व्यवस्था की मांग कर रहे हैं. (पीयूष मिश्रा की रिपोर्ट)
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