सरसों की फसल पर माहू का हमला? अब बिना जहर के करें कीटों का सफाया

सरसों की फसल पर माहू का हमला? अब बिना जहर के करें कीटों का सफाया

सरसों की फसल में माहू कीट से किसान परेशान हैं. महंगे और जहरीले कीटनाशकों के बजाय स्टिकी ट्रैप एक सुरक्षित और सस्ता उपाय है. पीले स्टिकी ट्रैप से बिना रसायन माहू पर नियंत्रण किया जा सकता है. इससे खेती का खर्च कम होता है, फसल सुरक्षित रहती है और लोगों को जहरमुक्त, स्वस्थ भोजन मिलता है.

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सरसों की फसल पर माहू का हमला? अब बिना जहर के करें कीटों का सफायासरसों में माहू रोग का खतरा

भारत में इस साल सरसों और रेपसीड की खेती बहुत बड़े इलाके में हो रही है. लगभग 87 लाख हेक्टेयर जमीन पर किसान सरसों उगा रहे हैं. सरसों एक बहुत जरूरी फसल है, क्योंकि इससे तेल बनता है और यह हमारी रसोई में रोज काम आता है. लेकिन जैसे-जैसे सरसों की खेती बढ़ी है, वैसे-वैसे एक छोटे से कीट का खतरा भी बढ़ गया है. इस कीट का नाम माहू होता है, जिसे अंग्रेजी में एफिड कहते हैं.

माहू कीट कैसे करता है फसल को नुकसान

माहू बहुत छोटे और हरे रंग के कीट होते हैं. ये कीट सरसों के पौधों के फूलों और नई फलियों पर बैठ जाते हैं. दिसंबर के आखिरी हफ्ते से जनवरी के महीने तक जब मौसम में नमी होती है और आसमान में बादल छाए रहते हैं, तब ये कीट बहुत तेजी से बढ़ते हैं. माहू पौधों का रस चूस लेते हैं, जिससे पौधा कमजोर हो जाता है. धीरे-धीरे फूल झड़ने लगते हैं और फलियां ठीक से नहीं बन पातीं. इससे किसान की फसल खराब हो जाती है और पैदावार कम हो जाती है.

रसायन से होने वाला नुकसान

अधिकतर किसान माहू से बचने के लिए बाजार से महंगे कीटनाशक खरीदते हैं. इन रसायनों का छिड़काव करने से कीट तो मर जाते हैं, लेकिन इसके कई नुकसान भी होते हैं. सबसे पहले तो खेती का खर्च बहुत बढ़ जाता है. दूसरा, ये जहरीले रसायन फसल में रह जाते हैं और जब हम वह खाना खाते हैं, तो ये हमारे शरीर में चले जाते हैं. इससे कैंसर और दूसरी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए अब किसानों के लिए जरूरी है कि वे सुरक्षित और प्राकृतिक तरीकों को अपनाएं.

स्टिकी ट्रैप क्या है और कैसे काम करता है

सरसों की फसल को माहू से बचाने के लिए स्टिकी ट्रैप एक बहुत आसान और सुरक्षित तरीका है. स्टिकी ट्रैप पीले रंग की एक शीट होती है, जिस पर चिपचिपा पदार्थ लगा होता है. कीट विज्ञान के अनुसार, माहू कीट पीले रंग की ओर बहुत जल्दी आकर्षित होता है. जब किसान खेत में पीले स्टिकी ट्रैप लगाते हैं, तो माहू उस पर बैठ जाता है और गोंद में चिपक जाता है. इस तरह बिना किसी दवा के कीट मर जाते हैं और फसल सुरक्षित रहती है.

घर पर कैसे बनाएं स्टिकी ट्रैप

स्टिकी ट्रैप किसान बाजार से खरीद भी सकते हैं, लेकिन इसे घर पर बनाना और भी आसान है. इसके लिए किसी पीली पॉलीथीन, प्लास्टिक या टिन की शीट को लें. उस पर अरंडी का तेल या पुराना मोबिल ऑयल अच्छे से लगा दें. बस आपका स्टिकी ट्रैप तैयार है. एक ट्रैप बनाने में बहुत कम खर्च आता है. एक एकड़ सरसों की फसल के लिए 10 से 15 ट्रैप काफी होते हैं. इससे किसान अपने कीटनाशक पर होने वाले खर्च को बहुत कम कर सकते हैं.

स्टिकी ट्रैप लगाने का सही तरीका

स्टिकी ट्रैप को सरसों के पौधों से 1 से 2 फीट ऊपर बांधना चाहिए, ताकि कीट आसानी से उस तक पहुंच सकें. जब ट्रैप पर बहुत सारे कीट चिपक जाएं, तो 20 से 25 दिन बाद उसे बदल देना चाहिए. अगर सही तरीके से ट्रैप लगाए जाएं, तो माहू और सफेद मक्खी जैसे कीटों पर अच्छा नियंत्रण हो जाता है.

सेहत और पर्यावरण के लिए फायदेमंद तरीका

वैज्ञानिक बताते हैं कि भारत में खाने की चीजों में कीटनाशकों के अवशेष बहुत ज्यादा पाए जाते हैं. इससे लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है. स्टिकी ट्रैप जैसे तरीकों से खेती करने पर न तो मिट्टी खराब होती है और न ही पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है. इससे किसानों को अच्छी फसल मिलती है और लोगों को साफ और सुरक्षित खाना मिलता है.

कम खर्च में सुरक्षित खेती का रास्ता

सरसों की फसल पर माहू का खतरा जरूर है, लेकिन डरने की जरूरत नहीं है. किसान स्टिकी ट्रैप जैसी आसान तकनीक अपनाकर अपनी फसल को बचा सकते हैं. इससे खेती का खर्च कम होता है, फसल अच्छी होती है और सेहत पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता. यह तरीका किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए बहुत फायदेमंद है.

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