कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीली मटर की कीमतों में लगातार हो रही गिरावट को लेकर चिंता जताई है. दरअसल, तेजी से बढ़ते हुए बाजार में चने के सस्ते विकल्प के रूप में इस्तेमाल होने वाले पीली मटर के लगातार इंपोर्ट फ्री आयात से कीमतों में गिरावट आ रही है. इसे लेकर शिवराज सिंह चौहान ने शिपमेंट पर 50 फीसदी शुल्क लगाने की मांग की है. खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी को हाल ही में लिखे एक पत्र में, चौहान ने कहा है कि पीली मटर के लगातार इंपोर्ट से घरेलू दालों की कीमतें गिर गई है और इससे किसान दालों के रकबे का विस्तार करने से संकोच कर रहे हैं.
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि मौजूदा समय में पीली मटर की लागत लगभग 3,351 रुपये प्रति क्विंटल है, जो कि तुअर, मूंग और उड़द जैसी प्रमुख दालों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और मंडी में मिलने वाली कीमतों से काफी कम है. उन्होंने कहा कि हमारे पास यह मानने के कारण हैं कि कम कीमतों पर पीली मटर का निरंतर आयात अन्य दालों में मिलावट को बढ़ावा दे रहा है, जो बाजार की कीमतों को भी प्रभावित कर रहा है.
'फाइनेंशियल एक्सप्रेस' के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि पीली मटर पर इंपोर्ट फ्री आयात को जारी रखने के मुद्दे पर कई अंतर-मंत्रालयी समिति (आईएमसी) की बैठकों में चर्चा हो चुकी है. इस महीने की शुरुआत में हुई दो आईएमसी बैठकों में पीली मटर की आयात नीति की समीक्षा की गई, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है.
इससे पहले भारतीय दलहन और अनाज संघ के सचिव सतीश उपाध्याय ने कहा कि हमने सरकार से कई बार पीली मटर पर कम से कम 50 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी लगाने का आग्रह किया है, ताकि घरेलू मंडी में कीमतें स्थिर रहें और किसानों को प्रोत्साहन मिले. बता दें कि दिसंबर 2023 में सरकार ने पीली मटर के इंपोर्ट फ्री आयात की अनुमति दी और समय-समय पर छूट बढ़ाई गई, जबकि वर्तमान छूट 31 मार्च 2026 तक है.
दिसंबर 2023 से अब तक 3.5 मीट्रिक टन से अधिक पीली मटर का इंपोर्ट किया जा चुका है. ऐसे में व्यापार सूत्रों ने कहा कि वर्तमान में लगभग 1 मीट्रिक टन मटर दाल आयातकों के पास है, जबकि घरेलू उत्पादन लगभग 0.45 मीट्रिक टन है, जो घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगा.
कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने रबी खरीद सीजन (2025-26) के लिए मूल्य नीति में पीली मटर के आयात पर रोक लगाने की सिफारिश की थी, जिसमें कहा गया था कि इस तरह के इंपोर्ट से घरेलू कीमतों और किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. इससे पहले 2017 में चना के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए दालों पर 50 फीसदी का इंपोर्ट ड्यूटी लगाया गया था.
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