Cotton Import Duty: कॉटन की इंपोर्ट ड्यूटी खत्म करने से खुश हुआ अमेरिका, भारतीय किसानों में भारी गुस्सा

Cotton Import Duty: कॉटन की इंपोर्ट ड्यूटी खत्म करने से खुश हुआ अमेरिका, भारतीय किसानों में भारी गुस्सा

अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) ने भारत सरकार कि ओर से कपास पर 11 फीसदी  इंपोर्ट ड्यूटी हटाने के निर्णय का स्वागत किया है. वहीं, दूसरी ओर देश के किसान सरकार के इस फैसले से काफी नाखुश हैं. किसानों का कहना है कि सरकार ने ये फैसला अमेरिका के दबाव में लिया है.

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कॉटन की इंपोर्ट ड्यूटी खत्म करने से खुश हुआ अमेरिका, भारतीय किसानों में भारी गुस्साकॉटन की इंपोर्ट ड्यूटी

एक ओर जहां भारत सरकार की ओर से कॉटन की इंपोर्ट ड्यूटी खत्म करने के फैसले से देश के किसानों में भारी गुस्सा है तो वहीं, दूसरी और अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने इस पर खुशी जताई है. उसने ड्यूटी हटाने के निर्णय का स्वागत किया है. यूएसडीए के बयान के अनुसार, फ्री इंपोर्ट ड्यूटी से अमेरिकी कपास की बुकिंग बढ़ने की उम्मीद है. इसके अलावा, बयान में कहा गया है कि कपास पर 11 फीसदी आयात शुल्क को हटाने से भारत के कपड़ा उद्योग को भी राहत मिलेगी, जो अमेरिका में बढ़े हुए अमेरिकी टैरिफ और घरेलू फाइबर की बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं.

भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री को होगा फायदा

अमेरिकी कृषि विभाग के बयान में कहा गया है कि इस कदम से भारतीय कपड़ा निर्यातकों को सस्ता और बेहतर क्वालिटी वाला कच्चा माल मिल सकेगा. साथ ही बांग्लादेश, इंडोनेशिया, कंबोडिया और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों को अमेरिका में बहुत कम टैरिफ दरें मिलती हैं, जिससे भारतीय निर्यातक असहज स्थिति में हैं उन्हें भी फायदा होगा. 

11 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी को किया खत्म 

बता दें कि वित्त मंत्रालय ने 18 अगस्त को एक अधिसूचना जारी कर कपास पर 11 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी को खत्म कर दिया था. इसमें कॉटन पर 10 फीसदी सीमा शुल्क और इसके ऊपर 1 फीसदी का एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर सेस शामिल है.

फैसले से भारतीय किसानों में भारी गुस्सा

सरकार ने किसान विरोधी फैसले लेते हुए 28 अगस्त को ही कपास पर इंपोर्ट ड्यूटी को 30 सितंबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दिया है. इससे देश के किसानों में काफी नाराजगी है. किसानों का कहना है कि इस फैसले से उनकी नई फसलों को भी दाम नहीं मिलेगा, जिससे उनकी लागत को निकालना भी मुश्किल हो सकता है, ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान होने का खतरा मंडरा रहा है. वहीं, सरकार के इस फैसले से देश के कई राज्यों में खासतौर पर महाराष्ट्र में किसान विरोध और प्रदर्शन कर रहे हैं. साथ ही किसानों का कहना है कि खुद को किसान हितैशी कहने वाली सरकार ने ये फैसला अमेरिका के दबाव में लिया है.

सरकार ने मार लिया किसानों का हक

सरकार के फैसले ने पर किसानों की रोजी-रोटी और हक को मारने जैसा काम किया है. ऐसा इसलिए क्योंकि आने वाले मार्केट सीजन में किसानों को कपास की बेहतर कीमत ना मिलने की आशंका अभी से दिखने लगी है. वहीं, इस फैसले के चलते कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी गई कपास की कीमतों में लगातार गिरावट देखी जा रही है.

सरकार ने किसानों के साथ किया विश्वासघात 

हालांकि, इस फैसले को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है. कल ही किसानों पक्ष में आम आदमी पार्टी के संयोजक और पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर अमेरिकी दबाव में भारतीय कपास किसानों से विश्वासघात करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि 11 प्रतिशत शुल्क की वजह से अमेरिकी कपास महंगा पड़ता था और भारतीय किसानों की कपास आसानी से बिक जाती थी. लेकिन अब इंपोर्ट ड्यूटी खत्म करने से अमेरिकी कपास का दबदबा बढ़ेगा और देश के किसानों को नुकसान होगा.

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