पंजाब में 10 जून से शुरू होगी धान की रोपनीपंजाब में धान की रोपाई की तारीख तय हो गई है. कृषि विभाग ने इस तारीख का ऐलान कर दिया है. कृषि विभाग ने कहा है कि पूरे पंजाब में 10 जून से धान की रोपनी शुरू होगी. केवल संगरूर आसपास के क्षेत्रों में यह काम 21 जून से होगा. धान की खेती के लिए कृषि विभाग ने पंजाब को चार हिस्सों में बांटा है. साथ ही, कृषि विभाग ने धान की ऐसी किस्मों पर जोर दिया है जो कम समय में अधिक झाड़ देने वाली हों और अधिक उपज मिले. संगरूर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का इलाका है जहां कृषि विभाग ने 21 जून से धान की खेती करने का निर्देश दिया है. पंजाब देश के उन राज्यों में शुमार है जहां लाखों किसान धान की खेती करते हैं और बड़ी मात्रा में धान की पैदावार लेते हैं.
देश में सबसे ज्यादा अनाज पैदा करने में पंजाब राज्य सबसे आगे है. इस बार धान की रोपाई के लिए पंजाब सरकार की ओर से पूरे पंजाब को चार भागों में बांटा गया है. बॉर्डर एरिया में 10 जून से धान की बुवाई का काम शुरू होगा. सबसे बाद में पंजाब के मालवा इलाके और मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिला संगरूर में 21 जून से धान की रोपाई होगी. पंजाब में धान की रोपाई के लिए सरकार ने कई तैयारियां की हैं और इसी सिलसिले में किसानों को अलग-अलग निर्देश दिए जा रहे हैं. इस बारे में संगरूर के चीफ एग्रीकल्चर ऑफिसर डॉक्टर हरबंस सिंह चहल ने 'पंजाब तक' से एक खास बातचीत की और धान की खेती के बारे में जानकारी दी.
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डॉक्टर हरबंस सिंह ने बताया कि इस बार धान की बुवाई के लिए पूरे पंजाब को चार हिस्सों में बांटा गया है. धान की रोपाई सबसे पहले बॉर्डर एरिया में होगी और सबसे अंत में संगरूर, पटियाला और उसके आसपास के इलाके आएंगे. इन क्षेत्रों में धान की खेती इसलिए देर से होगी क्योंकि यहां की धरती का भूजल स्तर सबसे नीचे है और ये इलाके डार्क जोन में आते हैं. यही वजह है कि संगरूर, पटियाला जैसी जगहों को सबसे अंत में धान की रोपाई के लिए चुना गया है.
कृषि अधिकारी ने बताया कि अगर किसान 21 जून से पहले खेत में धान लगाएगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी. उन्होंने कहा कि इस बार किसानों से अपील की जा रही है कि वे धान की किस्म पूसा 144 को छोड़कर पीआर 126-28 और बासमती धान की किस्मों पर जोर दें. इन किस्मों पर जोर इसलिए दिया जा रहा है क्योंकि एक तो पकने में कम समय लेती हैं. दूसरी, इनकी बुवाई का सीजन जुलाई से अगस्त के बीच रहता है और इसे कम पानी की जरूरत होती है. इन किस्मों का झाड़ भी बहुत अच्छा रहता है और इसमें बीमारी भी बेहद कम लगती है. पौधे में झाड़ अधिक होने से पशुओं के लिए पर्याप्त चारा मिल जाता है. कृषि अधिकारी ने कहा कि पंजाब के किसान इस बार ज्यादा पीआर किस्म की धान और बासमती धान लगाएं ताकि अधिक उपज मिल सके.
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किसानों के लिए पंजाब सरकार ने एक और बड़ी तैयारी की है. इस बार हर खेत में पाइपलाइन के जरिये पानी पहुंचाया जाएगा. इसके लिए खेतों तक कंक्रीट के बने नाले पहुंचाए जा रहे हैं. इस पाइपलाइन को नजदीक की नहर से जोड़ दिया जाएगा ताकि सिंचाई का पानी सीधा खेत तक पहुंच जाए. पाइपलाइन के जरिये पानी पहुंचाने से पानी की बर्बादी रुकेगी. पंजाब में जिस तरह से भूजल स्तर तेजी से कम हो रहा है, उसे देखते हुए सरकार ने पाइपों की मदद से सिंचाई का पानी खेत-खेत तक देने का ऐलान किया है. पूरे पंजाब में इस पाइपलाइन पर काम हो रहा है. सबसे पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान के क्षेत्र धूरी में इसके शुरू होने की संभावना है. धान की खेती से पहले कई इलाकों में इस प्रोजेक्ट के चालू हो जाने की उम्मीद जताई जा रही है.
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