खराब सोयाबीन बीज ने किसानों की मुश्किलें बढ़ाईंमहाराष्ट्र के अमरावती संभाग में एक बार फिर सोयाबीन बीजों की खराब उगवण ने हजारों किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं. एक महीने की देरी से मॉनसून आने के बाद किसानों ने जैसे-तैसे बुवाई पूरी की, लेकिन अब महंगे दामों में खरीदे गए बीजों के कम अंकुरण की समस्या सामने आ रही है. कृषि विभाग को 7 जुलाई तक अमरावती संभाग के पांच जिलों से कुल 907 शिकायतें मिली हैं. आंकड़ों के अनुसार, बुलढाणा में 407, अमरावती में 231, अकोला में 197, यवतमाल में 60 और वाशिम में 12 शिकायतें दर्ज की गई हैं. किसानों का आरोप है कि नामी कंपनियों के बीज खरीदने के बावजूद खेतों में केवल 10 से 20 प्रतिशत तक ही अंकुरण हो रहा है. इसके कारण उन्हें दोबारा बुवाई करनी पड़ रही है, जिससे आर्थिक बोझ और बढ़ गया है.
अकोला जिले के डोंगरगांव निवासी किसान दिलीप काकड़े ने करीब पौने चार एकड़ खेत में बुवाई के लिए लगभग 35 हजार रुपये के सोयाबीन बीज खरीदे थे. बुवाई और मजदूरी पर अलग से खर्च हुआ, लेकिन कुछ दिनों बाद खेत का निरीक्षण करने पर उन्हें केवल 10 से 15 प्रतिशत अंकुरण दिखाई दिया. दिलीप काकड़े का कहना है कि उन्होंने बैंक से एक लाख रुपये का कर्ज लिया है और परिवार पर पहले से बेटी की शादी का कर्ज भी है. उन्हें उम्मीद थी कि फसल से आर्थिक संकट कम होगा, लेकिन बीजों के नहीं उगने से अब दोबारा बुवाई के लिए धन जुटाना मुश्किल हो गया है. उन्होंने सरकार से मदद और दोषी कंपनियों पर कार्रवाई की मांग की है.
डोंगरगांव गांव के 20 से 25 किसानों सहित जिले के सैकड़ों किसान इसी समस्या का सामना कर रहे हैं. किसानों का आरोप है कि हर साल खराब क्वालिटी वाले बीजों की वजह से उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है, लेकिन जिम्मेदार कंपनियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से ऐसी घटनाएं लगातार दोहराई जा रही हैं. कम अंकुरण के कारण किसानों के सामने कई समस्याएं खड़ी हो गई हैं. महंगे बीज खरीदने के बावजूद फसल नहीं उग रही, दोबारा बुवाई का संकट पैदा हो गया है और पहले से बैंक लोन के बोझ तले दबे किसानों को अब साहूकारों से कर्ज लेने की नौबत आ रही है.
इस मुद्दे को लेकर अमरावती में युवा स्वाभिमानी पार्टी ने कृषि उपसंचालक कार्यालय पर प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने दोषी बीज कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की.
अकोला के जिला कृषि अधिकारी मुरली इंगले के अनुसार जिले में बड़ी संख्या में शिकायतें प्राप्त हुई हैं. किसानों से बीज का बिल, टैग और बीज का नमूना सुरक्षित रखने की अपील की गई है. मंडल कृषि अधिकारी, सहायक कृषि अधिकारी और तालुका स्तर की टीमें सात दिनों के भीतर जांच कर रिपोर्ट तैयार करेंगी.
कृषि विभाग ने सभी तालुकों में विशेष जांच समितियां गठित की हैं. उपविभागीय कृषि अधिकारी की अध्यक्षता में शिकायत निवारण समितियां खेतों का पंचनामा करेंगी. संबंधित बीज लॉट के कंट्रोल प्लॉट की जांच की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर बीज के नमूने सरकारी प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजे जाएंगे.
हर साल सोयाबीन बीजों की क्वालिटी और कम अंकुरण को लेकर शिकायतें सामने आती हैं. इस बार भी अमरावती संभाग में 907 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर किसानों को हर साल दोबारा बुवाई का नुकसान क्यों झेलना पड़ता है और जिम्मेदार बीज कंपनियों पर ऐसी कार्रवाई कब होगी, जिससे भविष्य में किसानों को इस समस्या का सामना न करना पड़े. फिलहाल किसान सरकार से मुआवजे के साथ-साथ दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today