महाराष्ट्र में प्याज किसानों पर छाया संकट (फाइल फोटो)महाराष्ट्र में प्याज की गिरती कीमतों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. NCP (SP) नेता जयंत पाटिल ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि उत्पादन लागत ऊंची होने के बावजूद बाजार में किसानों को बेहद कम दाम मिल रहे हैं, जिससे वे गहरे आर्थिक संकट में हैं. जयंत पाटिल ने कहा कि एक क्विंटल प्याज की लागत करीब 2200 रुपये तक पहुंच रही है, जबकि किसानों को बाजार में सिर्फ 900 से 1300 रुपये प्रति क्विंटल मिल पा रहे हैं.
उन्होंने इसे दोहरी मार बताते हुए कहा कि एक ओर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते निर्यात प्रभावित हुआ है, वहीं दूसरी ओर बेमौसम बारिश ने तैयार फसल को नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि प्याज निर्यात को जल्द बहाल करने के लिए केंद्र के साथ मिलकर ठोस प्रयास किए जाएं और किसानों को राहत देने के लिए एक उचित न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया जाए. पाटिल ने कहा कि मौजूदा हालात में किसान समुदाय भारी दबाव में है और उसे तुरंत सहारे की जरूरत है.
इधर, महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने इस संकट के लिए केंद्र और विपक्ष दोनों को जिम्मेदार ठहराया है. संगठन के संस्थापक-अध्यक्ष भारत दिघोले ने कहा कि 2023 में केंद्र द्वारा अचानक निर्यात प्रतिबंध लगाने और बाद में ड्यूटी और न्यूनतम निर्यात मूल्य जैसी शर्तों ने कीमतों को नीचे धकेल दिया, जिससे किसानों की आय बुरी तरह प्रभावित हुई.
भारत दिघोले ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष, खासकर महा विकास अघाड़ी के सांसदों ने इस मुद्दे पर अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई. उन्होंने कहा कि किसानों के समर्थन से चुने गए 31 सांसद भी इस संकट पर एकजुट होकर प्रभावी आवाज नहीं उठा सके.
उन्होंने बताया कि मंडियों में खरीफ प्याज 300 से 700 रुपये प्रति क्विंटल और रबी प्याज 500 से 1100 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रहा है, जबकि उत्पादन लागत 1800 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास है. ऐसे में किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं.
भारत दिघोले ने कहा कि कुल प्याज निर्यात में करीब 30 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि खाड़ी देशों को होने वाला निर्यात 55 से 60 प्रतिशत तक घट गया है. उन्होंने राज्य के सभी सांसदों और विधायकों से राजनीतिक मतभेद भुलाकर दिल्ली में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाने की अपील की, ताकि किसानों को राहत दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें. (पीटीआई)
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