सोयाबीन की सरकारी खरीद पर लगा ब्रेक? कागजों में धरा रह गया 15 फीसद नमी का नियम

सोयाबीन की सरकारी खरीद पर लगा ब्रेक? कागजों में धरा रह गया 15 फीसद नमी का नियम

मध्य प्रदेश के खरीदी केंद्रों पर सरकार की ओर से 12 फीसद नमी वाला सोयाबीन खरीदने का नियम है. लेकिन किसानों के सोयाबीन में नमी की मात्रा 12 परसेंट से लेकर 15 परसेंट तक आ रहा है. इस आधार पर किसानों की उपज को लौटाया जा रहा है. किसानों से कहा जा रहा कि वे उपज को सुखाकर दोबारा ले आएं. इससे किसानों में नाराजगी है. उनका कहना है कि बार-बार मंडी में उपज लाने का खर्चा बढ़ता है.

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सोयाबीन की सरकारी खरीद पर लगा ब्रेक? कागजों में धरा रह गया 15 फीसद नमी का नियमसोयाबीन की खरीद एमएसपी पर नहीं होने से किसान नाराज

मध्य प्रदेश के कई जिलों के किसान परेशान हैं. वजह है सोयाबीन की सरकारी बिक्री न हो पाना. दरअसल, किसानों का सोयाबीन मंडियों से इसलिए लौट जा रहा है कि उनकी उपज में अधिक नमी है. हालांकि नमी की मात्रा इतनी भी अधिक नहीं है कि उसे खरीदने से पहले ही नकार दिया जाए. किसानों के साथ यह स्थिति तब है जब इसी मध्य प्रदेश से आने वाले कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान बता चुके हैं कि 15 फीसद नमी वाला सोयाबीन भी खरीदा जाएगा. लेकिन खरीदी केंद्र के अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस निर्देश को महज कागजी बना कर रख दिया है.

सबसे पहले बात बुरहानपुर जिले की. यहां कई साल बाद न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी कि MSP पर सोयाबीन खरीदने की घोषणा की गई. खरीदी की भी जा रही है, लेकिन कई किसानों की मुसीबत इसलिए बढ़ गई है क्योंकि उनकी उपज में नमी की मात्रा 12 फीसद से जरा भी अधिक पाए जाने पर लौटा दिया जा रहा है. सरकार ने सोयाबीन के लिए 4892 रुपये एमएसपी की घोषणा की है. इस दाम से खुशकर 1049 किसानों ने बिक्री के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था. लेकिन नमी ने उनकी बिक्री पर ब्रेक लगा दिया है. 

बुरहानपुर के किसान परेशान

बुरहानपुर जिले में 25 अक्टूबर से सोयाबीन की खरीद शुरू की गई थी. फसल कटाई के वक्त अचानक बारिश से उपज में नमी की मात्रा बढ़ गई थी. इससे परेशान किसान कुछ दिनों तक सोयाबीन को सुखा कर बेचने के लिए मंडी ले गए, लेकिन वहां से बैरंग लौटना पड़ा. वजह, उपज में नमी की अधिक मात्रा पाई गई. 

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मध्य प्रदेश के खरीदी केंद्रों पर सरकार की ओर से 12 फीसद नमी वाला सोयाबीन खरीदने का नियम है. लेकिन किसानों के सोयाबीन में नमी की मात्रा 12 परसेंट से लेकर 15 परसेंट तक आ रहा है. इस आधार पर किसानों की उपज को लौटाया जा रहा है. किसानों से कहा जा रहा कि वे उपज को सुखाकर दोबारा ले आएं. इससे किसानों में नाराजगी है. उनका कहना है कि बार-बार मंडी में उपज लाने का खर्चा बढ़ता है. 

इन किसानों ने पूछा कि जब कृषि मंत्री खुद ही 15 फीसद नमी वाला सोयाबीन खरीदने की बात कह चुके हैं तो किसानों को क्यों लौटाया जा रहा है. 15 फीसद नमी वाले कृषि मंत्री के बयान पर सेंट्रल वेयरहाउस कॉरपोरेशन के प्रबंधक ओपी चौकसे कह चुके हैं कि यह केंद्र सरकार का निर्देश है. जबतक राज्य सरकार को इसका निर्देश नहीं मिलेगा तब तक 12 फीसद वाले सोयाबीन को ही समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा. चौकसे के इस बयान से किसानों में नाराजगी है.

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