बारिश-ओलावृष्टि का असर, भारत में गेहूं उत्पादन 5-10% तक घटने की आशंका

बारिश-ओलावृष्टि का असर, भारत में गेहूं उत्पादन 5-10% तक घटने की आशंका

बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण भारत में गेहूं उत्पादन 5-10% तक घट सकता है. हालांकि पर्याप्त भंडार होने से सप्लाई पर असर सीमित रहने की उम्मीद है.

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बारिश-ओलावृष्टि का असर, भारत में गेहूं उत्पादन 5-10% तक घटने की आशंकाबारिश से कई राज्यों में गेहूं की फसल को नुकसान

भारत का गेहूं उत्पादन 2025 के स्तर से 5% से 10% तक कम होने की संभावना है. 'रॉयटर्स' ने एक रिपोर्ट में जानकारी दी है. गेहूं कटाई से ठीक पहले हुई बारिश और ओलावृष्टि के कारण पैदावार में कमी हो सकती है, जिससे उत्पादन में बढ़ोतरी के सरकारी अनुमान भी पूरे नहीं हो पाएंगे.

हालांकि कम उत्पादन से सरकारी एजेंसियों की खरीद पर रोक लग सकती है—जो पिछले चार सालों से गेहूं खरीद के अपने लक्ष्य पूरे नहीं कर पाई हैं. लेकिन इससे गेहूं की कमी होने की संभावना नहीं है, क्योंकि भारत के पास जरूरत से लगभग तीन गुना ज्यादा गेहूं का भंडार मौजूद है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

कृषि कमोडिटी ट्रेडर कंपनी 'ओलम एग्री इंडिया' के डिप्टी कंट्री हेड नितिन गुप्ता ने रॉयटर्स को बताया, "गेहूं की फसल अच्छी हालत में थी, लेकिन कटाई से ठीक पहले हुई बेमौसम बारिश के कारण उत्पादन पिछले साल के स्तर से कम होने की संभावना है."

भारत का 80% से ज्यादा गेहूं मध्य प्रदेश और उत्तरी राज्यों—उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान—से आता है. मार्च से अप्रैल के मध्य तक चलने वाली कटाई के मौसम में इन सभी राज्यों में औसत से ज्यादा बारिश हुई थी. सरकार ने इस साल 120.21 मिलियन मीट्रिक टन गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान लगाया है.

लेकिन गुप्ता और तीन अन्य डीलरों का मानना ​​है कि 2026 में उत्पादन पिछले साल के रिकॉर्ड 117.9 मिलियन टन से लगभग 5% कम हो सकता है. वहीं, कुछ अन्य डीलरों का अनुमान है कि उत्पादन में लगभग 10% की गिरावट आ सकती है, जिससे उत्पादन घटकर लगभग 106.1 मिलियन टन रह सकता है—जो पिछले सात सालों में सबसे कम होगा. डीलरों ने अपना नाम बताने से इनकार कर दिया.

गोदामों में गेहूं का भंडार

2025 में गेहूं की अच्छी फसल होने से सरकारी गोदामों में गेहूं का भंडार बढ़ गया था, इसलिए उम्मीद है कि इस बार भी सप्लाई स्थानीय मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगी और कीमतों को नियंत्रण में रखने में मदद मिलेगी.

अप्रैल की शुरुआत में, सरकारी गोदामों में भारत का गेहूं भंडार पिछले साल के मुकाबले 85% बढ़कर 21.8 मिलियन टन हो गया. यह पिछले पांच सालों में सबसे ज्यादा है और सरकार के निर्धारित लक्ष्य से लगभग तीन गुना ज्यादा है.

कमोडिटी ब्रोकरेज फर्म 'वासेडा ग्लोबल' के CEO सुमित गुप्ता ने बताया कि सरकार के पास जरूरत से कहीं ज्यादा गेहूं का भंडार मौजूद है, जिससे वह गेहूं के निर्यात के लिए और कोटा जारी कर सकती है. वहीं, दूसरी ओर व्यापारी गेहूं के उत्पादन को लेकर चिंतित हैं.

5 लाख टन गेहूं निर्यात

इस सप्ताह की शुरुआत में, भारत सरकार ने 2.5 मिलियन टन अतिरिक्त गेहूं के निर्यात को मंजूरी दे दी, जिससे गेहूं के निर्यात का कुल कोटा बढ़कर 5 मिलियन टन हो गया है. सरकारी एजेंसियों का लक्ष्य इस साल 30.3 मिलियन टन गेहूं खरीदना है, लेकिन शुरुआती खरीद उम्मीद से धीमी रही, जिसके चलते नई दिल्ली को क्वालिटी संबंधी नियमों में ढील देनी पड़ी.

सरकारी एजेंसियां ​​किसानों से गेहूं खरीदती हैं, ताकि सरकार राशन वितरण जैसे प्रोग्राम चला सके. नई दिल्ली स्थित एक ग्लोबल ट्रेडिंग हाउस के डीलर ने बताया कि एजेंसियां ​​शायद 26 मिलियन से 28 मिलियन टन तक ही गेहूं खरीद पाएंगी.

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