झारखंड के किसानों के लिए जारी कृषि सलाह फाइल फोटोझारखंड में मौसम विज्ञान विभाग ने राज्य के किसानों लिए कृषि सलाह जारी किया है. इस सालह को मानकर किसान खेती कर सकते हैं औऱ अच्छी उपज हासिल कर सकते हैं. किसानों के लिए जारी सलाह में कहा गया है कि आने वाले दिनों में मौसम को ध्यान में रखते हुए किसान उन फसलों की कटाई कर उसे सुरक्षित रख लें जो कटाई के लिए तैयार हो रही है. अगर खेतों में किसी भी प्रकार का छिड़काव करना है तो वो अक्टूबर के बाद ही करें. खरीफ फसल की कटाई के बाद खाली हुए खेत में हरा चारा लगा सकते हैं या फिर अगर सिंचाई की कम सुविधा है तो सरसो की खेती कर सकते हैं.
जिन किसानों के पास सिंचाई की बेहतर सुविधा है वो आलू, हरा मटर से साथ साथ विभिन्न सब्जियां जैसे फूलगोभी, पत्तागोभी, फ्रेंचबीन, टमाटर और प्याज के साथ-साथ मसाला वाली फसलें जैसे धनिया, अजवाइन, सौंफ और मेथी की खेती कर सकते हैं. इसके साथ ही किसान रबी की खेती के लिए खेत बनाने की तैयारी करें. साथ ही जरूरत के अनुसार खाद बीज और बीज को उपचारित करने के लिए राइजोबियम कल्चर आदि का प्रबंध करें.
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जिन किसानों ने देर से धान की खेती की है, उनके खेतों में अभी फसल फूलने की अवस्था में है. इसे देखते हुए किसानों को सलाह दी जाती है कि वो अपने खेत से अतिरिक्त पानी निकाल दें. इस दौरान खेत में सिर्फ पांच से 10 सेमी पानी ही जमा रखें. इसके साथ ही खेत में 17 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से यूरिया का भुरकाव करें. जिन खेतों में धान की खी पहले हुई है और बाद में जलजमाव की स्थिति हो गई है उनमें शिथ ब्लाइट का प्रकोप देखा जा सकता है. अगर खेत में इसका प्रकोप दिखाई दे तो दो ग्राम कार्बेंडाजिम प्रति दो लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. अगर धान के निचले हिस्से में सड़न दिखाई दे तो कार्बेंडाजिम या मैक्नोजेब का छिड़काव मौसम साफ होने पर करें.
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सब्जियों की खेती की बात करें तो जिन किसानों के खेत में बैंगन लगा हुआ है उनमें तना छेदक कीट का प्रकोप देखा जा सकता है. इसमें लार्वा फल में छेद करके अंदर घुस जाते हैं. इससे उपज की गुणवत्ता में असर पड़ता है. इससे बचावे के लिए किसान थायाक्लोप्रिड का छिड़काव एक मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं. जिन किसानों ने अगेती फूलगोभी की खेती करने के लिए बिचड़ा तैयार कर लिया है वो उन्हें खेतों में लगा दें. जिन किसानों के खेत में जलजमाव है वो अपने खेत से अतिरिक्त जल की निकासी कर लें. आलू की खेती करने वाले किसान खेत की तैयारी में जुट जाए.
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