
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड के सुदूर वनांचल ग्राम कच्चापाल में खेती और ग्रामीण विकास को लेकर नई पहल देखने को मिली. पारंपरिक घोटूल में आयोजित मैदानी संवाद कार्यक्रम में कृषि, उद्यानिकी और पशुपालन विभाग के अधिकारी ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर सीधे संवाद करते नजर आए. इस दौरान किसानों की आय बढ़ाने, खेती को लाभकारी बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए क्लस्टर खेती एवं कृषि विविधीकरण पर आधारित संयुक्त कार्ययोजना तैयार की गई.
अधिकारियों ने किसानों को बताया कि बदलते समय में बिखरी हुई खेती की बजाय क्लस्टर आधारित खेती ज्यादा फायदेमंद साबित हो रही है. समूह में एक जैसी फसलों की खेती करने से बीज, खाद और परिवहन जैसी लागत कम होती है, जबकि आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग आसान बनता है. इससे किसानों को बाजार तक बेहतर पहुंच मिलती है और वे सीधे व्यापारियों से जुड़कर बेहतर दाम प्राप्त कर सकते हैं.
कार्यक्रम में किसानों को केवल पारंपरिक धान खेती तक सीमित न रहने की सलाह दी गई. स्थानीय जलवायु और मिट्टी को ध्यान में रखते हुए फल और सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने की रणनीति साझा की गई. साथ ही पशुपालन, डेयरी और बैकयार्ड मुर्गीपालन जैसी गतिविधियों को अतिरिक्त आय का मजबूत माध्यम बताया गया.
पशुपालन विभाग ने ग्रामीणों को पशुओं के नियमित टीकाकरण, वैज्ञानिक देखभाल और डेयरी प्रबंधन की जानकारी दी, जबकि उद्यानिकी विभाग ने नकदी फसलों और बागवानी की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की.
घोटूल में आयोजित इस संवाद कार्यक्रम की खास बात यह रही कि ग्रामीणों ने खुलकर अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं. किसानों ने उन्नत बीज, कृषि सामग्री और जल संरक्षण के लिए तालाब निर्माण की मांग की. अधिकारियों ने इन मांगों को प्राथमिकता से पूरा करने का भरोसा दिया और लगातार तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने की बात कही.
कच्चापाल में आयोजित यह पहल केवल सरकारी बैठक नहीं, बल्कि वनांचल क्षेत्र में आत्मनिर्भर कृषि मॉडल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. क्लस्टर खेती, आधुनिक तकनीक और कृषि विविधीकरण के जरिए अबूझमाड़ क्षेत्र के किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है. ग्रामीणों और प्रशासन के बीच सीधे संवाद ने यह संकेत दिया है कि योजनाएं यदि चौपाल तक पहुंचें, तो गांवों की तस्वीर तेजी से बदल सकती है.
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