सरकार के द्वारा जैविक खेती को बढ़ावा देने के 13 जिलों को चयनित किया गया है.फोटो -किसान तक आधुनिकता के इस युग में रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों तथा खरपतवारनाशियों के उपयोग से खेतों की उर्वरा शक्ति खत्म हो रही है. साथ ही लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है. वहीं इन समस्याओं का रामबाण जैविक खेती के रूप में देखा जा रहा है. विश्व के करीब सभी देश जैविक खेती (Organic Farming) की ओर कदम बढ़ाना शुरू कर चुके हैं. इसी कड़ी में भारत में भी जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा हैं. बिहार सरकार भी राज्य में ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए अनेक तरह से कार्य कर रही है. कृषि विभाग ने जैविक कॉरीडोर योजना के तहत करीब 20 हजार एकड़ में जैविक खेती का लक्ष्य निर्धारित किया है. इसके साथ ही लोगों को ऑर्गेनिक फार्मिंग के प्रति जागरूक करने और उत्पादों के बेहतर बाजार के लिए जैविक मेले का भी आयोजन करेगी.
जैविक खेती और मेले के लिए राज्य की सरकार ने कृषि विभाग को करीब 32 करोड़ रुपये जारी किए हैं. कृषि विभाग 2023 -24 वर्ष में दो जैविक मेले का आयोजन करेगा. वहीं अभी राज्य सरकार के द्वारा प्रदेश के 38 जिलों में से करीब 13 जिलों को जैविक खेती के लिए हाल के समय में चयनित किया गया है.
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कृषि विभाग ने 2023-24 के लिए जैविक कॉरीडोर योजना के तहत 13 जिलो में जैविक खेती करने के लिए करीब 20 हजार एकड़ जमीन का लक्ष्य निर्धारित किया है. कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जैविक खेती के लिए चयनित किसानों को दूसरे साल खेती करने के लिए प्रति एकड़ 6500 रुपये दिया जाएगा. यह राशि अधिकतम ढाई एकड़ के लिए होगी. इसके साथ ही प्रगतिशील किसानों को अन्य राज्यों में खेती से जुड़ी जानकारी हासिल कराने के लिए भेजा जाएगा. मिट्टी, निबंधन, पैकेजिंग, लेबलिंग, ब्रांडिंग के लिए भी एक निश्चित राशि दी जाएगी.
राज्य सरकार ऑर्गेनिक फार्मिंग करने वाले किसानों के उत्पाद को बेचने के लिए जैविक मेला और विपणन मीट का आयोजन साल में दो बार करेगी. इसके साथ ही ऑनलाइन उत्पाद बेचने के लिए वेबसाइट का भी निर्माण करेगी. ताकि किसान अपने उत्पाद को दूसरे राज्यों में आसानी से बना सकें. वहीं जैविक खेती करने वाले किसानों का कहना है कि अगर बेहतर बाजार मिल जाए तो जैविक उत्पादों को बेचने में आने वाली दिक्कत से काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है.
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राज्य सरकार ने पटना, बक्सर, भोजपुर, वैशाली, नालंदा, समस्तीपुर, सारण, बेगूसराय, लखीसराय, खगड़िया, भागलपुर, मुंगेर और कटिहार जिले को जैविक खेती के लिए चयनित किया गया है. इन जिलों के चयनित किसान अगर जैविक खेती से जुड़ी योजना का लाभ लेने के बाद खेती छोड़ देते हैं. तो वैसे किसान या समूह को कृषि विभाग की अन्य योजनाओं से तीन साल के लिए वंचित कर दिया जाएगा. साथ ही काली सूची में डाल दिया जाएगा.
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