नदी का जलस्तर बढ़ने से किसानों की चिंता बढ़ी (AI Image)देश में मॉनसून सीजन अब जल्द खत्म होने को है और बिहार में इस दौरान बारिश सामान्य से करीब 31 फीसदी कम रही. लेकिन, मॉनसून के वापसी के समय अब बिहार की कई नदिया एक बार फिर उफान पर है. हालात ऐसे हैं कि कई जिलों में तेज धूप और सूखा पड़ा है तो कहीं इलाके बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं. अगस्त के आखिरी हफ्ते और सितंबर के शुरुआती महीने में जहां बिहार के लोगों को बाढ़ की वजह से काफी नुकसान हुआ था, जिसका आकलन अभी तक सरकार कर ही नहीं पाई थी कि एक बार फिर गंडक नदी बेसिन के नेपाल जलग्रहण क्षेत्रों में अल्प-अवधि में हुए अत्यधिक भारी बारिश के बाद बिहार के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं.
मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के वैज्ञानिक डॉ. आनंद शंकर के अनुसार, बिहार में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सामान्य से करीब 30 से 35 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है. वर्ष 2018 से अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2020 को छोड़कर अधिकांश वर्षों में राज्य में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जो 20 प्रतिशत से लेकर 31 प्रतिशत के बीच है. साल 2020 में सामान्य से करीब 28 फीसदी अधिक बारिश बिहार में दर्ज की गई थी. उसके बाद करीब 8 सालों के दौरान बारिश का ग्राफ सामान्य से कम ही है.
बारिश में कमी के कारणों पर डॉ. आनंद शंकर बताते हैं कि वैश्विक स्तर के कई पैरामीटर मॉनसून को प्रभावित करते हैं. इनमें अल नीनो और ला नीना जैसे कारक भी शामिल हैं, हालांकि इनका प्रभाव बहुत अधिक नहीं है. इसके अलावा कई अन्य फैक्टर में भी बदलाव देखने को मिल रहा है.
उन्होंने बताया कि समुद्र की सतह के तापमान (Sea Surface Temperature) में बढ़ोतरी के कारण मॉनसून के दौरान सिस्टम आधारित बारिश का योगदान बढ़ रहा है. सिस्टम आधारित बारिश में डिप्रेशन और लो-प्रेशर एरिया का बड़ा योगदान है. इसका प्रभाव मॉनसून के कोर रीजन में अधिक देखने को मिलता है.
मॉनसून के कोर रीजन में ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड और उत्तरी छत्तीसगढ़ जैसे क्षेत्र शामिल हैं. बिहार इस मॉनसून कोर रीजन से बाहर स्थित है. ऐसे में मॉनसून सिस्टम का प्रभाव बिहार पर अपेक्षाकृत कम पड़ने की वजह से राज्य में सामान्य से कम बारिश देखने को मिल रही है.
बिहार के करीब 13 से 14 जिले बीते दिनों बाढ़ की वजह से प्रभावित थे, जिनमें पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिले भी शामिल थे. अभी ये जिले बीते दिनों आई बाढ़ की वजह से संभल ही नहीं पाए थे कि एक बार फिर गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से इन जिलों के कुछ इलाकों में बाढ़ दोबारा आ गई है.
जल संसाधन विभाग के अनुसार, गंडक नदी के बढ़े हुए जलस्तर के कारण 28-29 सितंबर की मध्यरात्रि में पश्चिम चंपारण जिले के अंतर्गत गंडक नदी के बाएं तट पर निर्मित चंपारण तटबंध दो स्थलों पर (1. ग्राम-खैरतवा, प्रखंड-बगहा-1 एवं 2. ग्राम-फुलियाखाड़, प्रखंड-बैरिया) क्षतिग्रस्त हुआ है.
इसके अलावा उत्तर प्रदेश प्रभाग में कुशीनगर जनपद के अंतर्गत गंडक नदी के दाएं तट पर निर्मित तटबंध एक स्थल पर क्षतिग्रस्त हुआ है. जल संसाधन विभाग एवं जिला प्रशासन पश्चिम चंपारण की टीम द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा रही है.
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