उत्तर प्रदेश के पशुपालकों को मिली बड़ी राहत, GPS से लैस वैन करेगी घर बैठे इलाज, बस डायल करें..

उत्तर प्रदेश के पशुपालकों को मिली बड़ी राहत, GPS से लैस वैन करेगी घर बैठे इलाज, बस डायल करें..

UP News: एसीएस पशुपालन मुकेश मेश्राम बताते हैं कि वैन में पशुओं के खून, गोबर समेत जांच के लिए एक छोटा लैब की सुविधा भी उपलब्ध है. इस एंबुलेंस सेवा में डॉक्टर और स्टाफ गांव तक पहुंचकर पशुओं का इलाज करते हैं. बड़े पशुओं के इलाज के लिए प्रति पशु 150 रुपये का शुल्क लिया जाता है.

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उत्तर प्रदेश के पशुपालकों को मिली बड़ी राहत, GPS से लैस वैन करेगी घर बैठे इलाज, बस डायल करें..अब इंसानों की तरह ही जानवरों को भी मिलेगी एंबुलेंस जैसी सुविधा (Photo-Kisan Tak)

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने पशुपालकों को बड़ी राहत दी है. दरअसल, अब इंसानों की तरह ही जानवरों को भी एंबुलेंस जैसी सुविधा उपलब्ध होगी. इसके लिए पशुपालकों को 1962 डायल करना होगा. इसी क्रम में प्रदेश के अपर मुख्य सचिव पशुपालन मुकेश मेश्राम ने बताया कि 1962 मोबाइल वैन के तहत पशुपालकों को उनके घर पर ही मुफ्त पशु चिकित्सा सेवा प्रदान की जाती है. यह जीपीएस से लैस एक चलता-फिरता अस्पताल है, जिसमें पशु चिकित्सक, सहायक, आवश्यक दवाइयां, छोटे ऑपरेशन की सुविधा, कृत्रिम गर्भाधान और बीमार पशुओं को ड्रिप लगाने की व्यवस्था होती है. यह सेवा 1962 पर कॉल करने पर उपलब्ध होती है.

पशुओं को अस्पताल ले जाने की आवश्यकता नहीं

उन्होंने बताया कि इस सुविधा से पशुपालकों को अपने पशुओं को अस्पताल ले जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, क्योंकि डॉक्टर और आवश्यक दवाइयाँ उनके दरवाजे पर पहुँच जाती हैं. वहीं बीमार पशुओं का मुफ्त इलाज किया जाता है और दवाइयां भी प्रदान की जाती हैं. वैन में छोटे ऑपरेशन के लिए औजार, मरहम-पट्टी और इंजेक्शन जैसी चिकित्सा उपकरण भी उपलब्ध हैं.

मोबाइल वैन में कई प्रकार की सुविधाएं

इसके अलावा, मोबाइल वैन में पशुओं में होने वाली बीमारियों जैसे खुरपका-मुंहपका (FMD) और गलघोंटू सहित अन्य संक्रामक रोगों से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण की सुविधा भी मिलती है. पशुओं की नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा भी प्रदान की जाती है.

पशुओं के खून, गोबर समेत जांच के लिए लैब

एसीएस पशुपालन मुकेश मेश्राम बताते हैं कि वैन में पशुओं के खून, गोबर समेत जांच के लिए एक छोटा लैब की सुविधा भी उपलब्ध है. इस एंबुलेंस सेवा में डॉक्टर और स्टाफ गांव तक पहुंचकर पशुओं का इलाज करते हैं. बड़े पशुओं के इलाज के लिए प्रति पशु 150 रुपये का शुल्क लिया जाता है. यह सुविधा खासतौर पर दूरस्थ क्षेत्रों के पशुपालकों के लिए राहत लेकर आई है. किसान 1962 टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके बीमार पशुओं के लिए आपातकालीन सेवा का लाभ उठा सकते हैं.

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