Green Fodder: बरसात हो या बाढ़, सिर्फ यही चारा भरेगा पशुओं का पेट, दूध मिलेगा भरपूर 

Green Fodder: बरसात हो या बाढ़, सिर्फ यही चारा भरेगा पशुओं का पेट, दूध मिलेगा भरपूर 

Green Fodder बाढ़-बरसात के दौरान सिर्फ साइलेज ही ऐसा चारा है जो पशुपालकों तक आसानी से पहुंचता है. अगर आम दिनों की बात करें तो तब भी साइलेज खूब मुनाफा कराता है. धीरे-धीरे ही सही, लेकिन साइलेज की डिमांड बढ़ रही है. अन्न फसल या चारे की फसल कटाई के दौरान उपज ज्यादा होने पर लोग साइलेज बनाकर रख रहे हैं. 

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Green Fodder: बरसात हो या बाढ़, सिर्फ यही चारा भरेगा पशुओं का पेट, दूध मिलेगा भरपूर silage

देश में हरे और सूखे चारे की कमी बनी हुई है. लगातार ये अंतर बना हुआ है. जबकि डिमांड बढ़ती ही जा रही है. आज हमारे देश में 30 करोड़ से ज्यादा दुधारू पशु हैं. हालांकि बरसात के मौसम में हरे चारे की कमी जरूरत थोड़ी बहुत दूर हो जाती है. क्योंकि बरसात के दिनों में हर तरफ हरा चारा बहुत होता है. लेकिन एक परेशानी ये भी है कि बरसात के दिनों में होने वाला ताजा हरा चारा सीधे तौर पर पशुओं को नहीं खिलाया जा सकता है. ये पशुओं के पेट को खराब करता है. जबकि बरसात और बाढ़ के दौरान चारा दूषि‍त हो जाता है. ऐसे में पशु यानि गाय-भैंस, भेड़-बकरी भी बुरी तरह से प्रभावित होते हैं.

चारा एक्सपर्ट की मानें तो किसान और पशुपालक एक छोटी सी ट्रेनिंग के बाद अपने पशुओं को पूरे साल सस्ता हरा चारा खिलाने के साथ ही उसकी बिक्री कर मुनाफा भी कमा सकते हैं. केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मथुरा समेत कई केन्द्र साइलेज बनाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं. ट्रेनिंग के बाद घर पर ही हे और साइलेज बनाकर चारे की कमी को पूरा किया जा सकता है. 

क्या है साइलेज बनाने का सही वक्त 

  • सावधानी बरतते हुए साइलेज और हे घर पर तैयार किया जा सकता है. 
  • बिना एक्सपर्ट सलाह-ट्रेनिंग के बनाया गया साइलेज-हे पशुओं को न खि‍लाएं. 
  • साइलेज बनाने के लिए उस हरे चारे की कटाई सुबह के वक्त कर लें जिसे साइलेज बनाना है. 
  • सुबह के वक्त कटाई करने करने से हमे दिन का वक्त उस चारे को सुखाने के लिए मिल जाएगा. 
  • साइलेज बनाने से पहले चारे के पत्तों को सुखाना जरूरी है. 
  • चारे को कभी भी जमीन पर सीधे ना सुखाएं. 
  • लोहे का कोई स्टैंड या किसी जाली पर रखकर ही हरे चारे को सुखाएं. 
  • चारे के छोटे-छोटे गठ्ठर बनाकर लटका कर भी चारे को सुखाया जा सकता है. 
  • जमीन पर चारा डालने से उसमे फंगस लगने के चांस ज्यादा रहते हैं. 
  • जब चारे में 15 से 18 फीसद नमी रह जाए तभी उसका साइलेज बनाएं. 
  • किसी भी हाल में पशुओं को फंगस लगा चारा खाने में ना दें. 

इस फसल का बनेगा अच्छा साइलेज 

  • साइलेज बनाने के लिए फसल का चुनाव करना भी बेहद जरूरी है. 
  • साइलेज बनाते वक्त ये देखें कि किस फसल के चारे में फंगस नहीं लगेगा. 
  • साइलेज बनाने के लिए हमेशा पतले तने वाली चारे की फसल का चुनाव करें. 
  • फसल को पकने से पहले ही तने को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें. 
  • उसके बाद उन्हें ऊपर बताए गए तरीके के मुताबिक सुखा लें. 
  • पतले तने वाली फसल जल्दी सूख जाती है. 
  • तने में नमी का पता तने को हाथ से तोड़कर लगाया जा सकता है.

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