पशुओं को खिलाएं हरा चाराबरसात के मौसम में ताजा हरा चारा खिलाना किसी भी पशु को फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचाता है. इसके पीछे कई वजह हैं. इसीलिए एनिमल एक्सपर्ट पशु छोटा भेड़-बकरी हो या फिर बड़े पशु गाय-भैंस, सभी का बरसात के दौरान हरा चारा कम खिलाने की सलाह देते हैं. यहां तक की पशुओं को खुले में चराने के लिए भी मना करते हैं. अब इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बरसात के दौरान हरा चारा पशुओं के लिए कितना नुकसानदायक हो जाता है. एक्सपर्ट तो यह सलाह देते हैं कि जब तक बहुत जरूरी न हो तो पशुओं को खुले में चराने न ले जाएं और बहुत ही कम मात्रा में उन्हें हरा चारा खिलाएं.
एक्सपर्ट की एक सलाह ये भी है कि बरसीम, ओट और चरी पतले तने वाली चारे की फसल हैं. इन्हें आसानी से सुखाकर स्टोर किया जा सकता है. बरसात के दिनों में ये फसल बहुत काम आती हैं. लेकिन इसके साथ चेतावनी ये भी है कि इनका स्टोर उतना ही करना चाहिए जितना बरसात के दिनों में इस्तेमाल हो जाए.
डेयरी एक्सपर्ट का कहना है कि मॉनसून के दौरान उगे हरे चारे में नमी की मात्रा काफी होती है. पशु जब इस दौरान हरा चारा ज्यादा खाता है तो उसे डायरिया समेत और भी दूसरी बीमारी होने का खतरा बना रहता है. इतना ही नहीं उस चारे में मौजूद नमी के चलते ही दूध की क्वालिटी पर भी असर आ जाता है. इसलिए ये बेहद जरूरी है कि जब हमारा पशु हरा चारा खा रहा हो या बाहर चरने के लिए जा रहा हो तो हम पहले उसे सूखा चारा और मिनरल्स जरूर दें.
सूखा चारा खूब खिलाने से हरे चारे में मौजूद नमी का स्तर सामान्य हो जाता है. वहीं मिनरल्स की पूरी मात्रा देने से दूध में फैट और दूसरी चीजों का स्तर भी बढ़ जाता है और दूध की क्वालिटी खराब नहीं होती है. एनीमल एक्सपर्ट की मानें तो पशु को सूखे चारे के तौर पर कई तरह का भूसा दिया जा सकता. वहीं मिनरल्स में खल, बिनौले, चने की चूनी आदि दी जा सकती है.
एक्सपर्ट का कहना है कि हरा चारा स्टोर करने के लिए हमेशा पतले तने वाली फसल का चुनाव करें. क्योंकि पतले तने वाली फसल जल्दी सूखेगी. कई बार ज्यादा लम्बे वक्त तक सुखाने के चलते भी चारे में फंगस की शिकायत आने लगती है.जिस चारे को स्टोर करना है उसे पकने से कुछ दिन पहले ही काट लें. इसके बाद उसे धूप में सुखाने रख दें. लेकिन चारे को सुखाने के लिए कभी भी उसे जमीन पर डालकर न सुखाएं. चारा सुखाने के लिए जमीन से कुछ ऊंचाई पर जाली वगैरह रखकर उसके ऊपर चारे को डाल दें.
इसे लटका कर भी सुखाया जा सकता है. क्योंकि जमीन पर डालने से चारे पर मिट्टी लगने का खतरा रहेगा जो फंगस आदि की वजह बन सकती है. जब चारे में 15 से 18 फीसद के आसपास नमी रह जाए, यानि चारे का तना टूटने लगे तो उसे सूखी जगह पर रख दें. इस बात का ख्याल रहे कि अगर चारे में नमी ज्यादा रह गई तो उसमे फंगस आदि लग जाएंगे और चारा खराब हो जाएगा. इतना ही नहीं इस खराब चारे को गलती से भी पशु ने खा लिया तो वो बीमार हो जाएगा.
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