Calf Care: सर्दियों में जन्म लेने वाले बछ़ड़े के लिए कैसा हो और कब शुरू करें हरा चारा 

Calf Care: सर्दियों में जन्म लेने वाले बछ़ड़े के लिए कैसा हो और कब शुरू करें हरा चारा 

Calf Care in Winter सर्दियों का मौसम इंसानों संग जानवरों के लिए भी परेशानी लेकर आता है. कड़ाके की ठंड दिसम्बर और जनवरी के दो महीने ज्यादा रहती है. इस मौसम में पशुओं की देखभाल के साथ ही उन्हें ठंड से बचाने वाली खुराक का इंतजाम करना ज्यादा टेढ़ा काम होता है. क्योंकि यह ये मौसम पशुओं की ब्रीडिंग का भी होता है.

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Calf Care: सर्दियों में जन्म लेने वाले बछ़ड़े के लिए कैसा हो और कब शुरू करें हरा चारा प्रतीकात्मक फोटो.

Calf Care in Winter सर्दियों में पैदा होने वाले बछड़े के साथ ही दो तरह की परेशानियां सामने होती हैं. एक उन्हें ठंड से बचाने वाली देखभाल कैसे की जाए. दूसरा जन्म के दिनों और मौसम को देखते हुए बछड़े को खाने में क्या दिया जाए. खाने में क्या दिया जाए ये तो ठीक है, लेकिन उम्र और मौसम को देखते हुए कब और कितना देना चाहिए ये जानकारी होना भी जरूरी होता है. वर्ना इसी तरह की छोटी-छोटी गलतियां या लापरवाही कह लें के चलते ही बछड़े बीमार हो जाते हैं या कभी-कभी उनकी मौत भी हो जाती है. 

सर्दियों में गाय-भैंस का प्रजनन होता है. नवजात बछड़े मौसम की चपेट में जल्दी आ जाते हैं. कई बार बीमारियों के चलते बछड़ों की मौत तक हो जाती है. बछड़ों की बात करें तो जन्म से तीन महीने की उम्र के बीच करीब 32 से 35 फीसद मौतें होती हैं. यही वजह है कि एनिमल एक्सपर्ट पशुपालकों को ठंड के मौसम से बछड़ों को बचाने के लिए बाड़े में सभी जरूरी इंतजाम कर लेने चाहिए. 

ठंड के मौसम में बछड़ों की ऐसी हो खुराक 

  • जन्म के साथ ही बछड़े का रूमेन (पेट) विकसित होना शुरू हो जाता है. 
  • पेट के हिसाब से बछड़ा ज्यादातर रेशेदार चीजें खाना शुरू कर देता है.  
  • तीन महीने की उम्र में जानवर हरा रेशेदार चारा खाने लगता है. 
  • रेशेदार चारे से बछड़े के रखरखाव और ग्रोथ में मदद मिलती है. 
  • रेशेदार चारे से ठंड का तनाव देर करने के लिए एनर्जी मिलती है.
  • बछड़े का पेट छह महीने की उम्र तक पूरी तरह से विकसित हो जाता है. 
  • पशु आमतौर पर अपने शरीर के वजन का करीब 2.5 फीसद ही खाते हैं.
  • पुआल, उपलब्ध हरी घास के साथ कंसंट्रेट और क्वालिटी का चारा खि‍लाएं. 
  • सर्दियों में चारे की रेगुलर सप्लाई देनी चाहिए. 
  • ज़्यादातर पशु खुराक में मोटे चारे को पसंद करते हैं.  
  • मोटा चारा पाचन प्रक्रिया के दौरान ज़्यादा गर्मी पैदा करता है. 
  • अगर चारे की सप्लाई सीमित है, तो कंसंट्रेट की क्वालिटी और मात्रा में बदलाव करें. 
  • अनाज एक बार में खिलाने के बजाय थोड़ी मात्रा में बार-बार दें. 
  • दिए जाने वाले कंसंट्रेट की मात्रा हर हफ़्ते 50-100 ग्राम बढ़ाई जा सकती है. 
  • बछड़े में एक्स्ट्रा थन हैं, तो उसे शुरुआत में ही निकलवा दें. 

एक साथ ज़्यादा खिलाने से एसिडोसिस हो सकता है दूध देने वाली गाय के दूध में फैट की मात्रा में कमी आना, डाइट में फाइबर की मात्रा में कमी का साफ संकेत है कमज़ोर और अच्छी/खराब हालत वाले जानवर ठंड बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं

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