FMD Vaccination: शुरू हो गया जानलेवा एफएमडी का वैक्सीनेशन, ऐसे करें पहचान और रोकथाम

FMD Vaccination: शुरू हो गया जानलेवा एफएमडी का वैक्सीनेशन, ऐसे करें पहचान और रोकथाम

FMD Vaccination एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) को लेकर समय-समय पर एडवाइजरी भी जारी होती रहती है. बावजूद इसके बहुत सारे पशुपालन आज भी कई तरह की भ्रांतियों के चलते अपने पशुओं का टीकाकरण नहीं कराते हैं. जबकि अभी इस बीमारी का एकमात्र इलाज टीकाकरण ही है. 

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FMD Vaccination: शुरू हो गया जानलेवा एफएमडी का वैक्सीनेशन, ऐसे करें पहचान और रोकथामIVF तकनीक से एक साल में एक ही जर्सी गाय से जन्मे तीन बछड़े

खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) एक जानलेवा बीमारी है. ये खुर वाले ऐसे पशु जिनके दोनों खुर के बीच में गैप है ज्यादातर उन्हीं को होती है. इसका एक ठोस इलाज सिर्फ वैक्सीनेशन (टीकाकरण) ही है. बाकी इसकी रोकथाम के कई तरीके हैं. केन्द्र सरकार इस बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए कई चरण में वैक्सीनेशन का अभि‍यान चला रही है. अभी दो दिन पहले एक बार फिर से केन्द्र सरकार ने वैक्सीनेशन अभि‍यान शुरू कर दिया है. गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और यूपी समेत तमाम राज्यों में अभि‍यान की शुरुआत हो गई है. 

इस अभि‍यान के तहत पशुओं को एफएमडी का टीका लगाया जाता है, फिर चाहें उस पशु को कभी ये बीमारी हुई हो या नहीं. खुर वाले सभी पशु जैसे गाय-भैंस, भेड़-बकरी को ये टीका लगाया जाता है. जानकारों की मानें तो अलग-अलग राज्यों में टीकाकरण का छठे से लेकर आठवां चरण है. सरकार का मकसद एफएमडी को जड़ से खत्म कर डेयरी एक्सपोर्ट को बढ़ावा देना है. साथ ही इस बीमारी के चलते पशुओं की मौत के रूप में होने वाले नुकसान को रोकना भी है.

ये हैं एफएमडी बीमारी के लक्षण 

एनिमल एक्सपर्ट और रिटायर्ड साइंटिस्ट डॉ. सज्जन सिंह का कहना है कि एफएमडी पीड़ित किसी भी पशु जैसे गाय-भैंस, भेड़-बकरी के लक्षण ये हैं कि उन्हें 104 से 106 एफ तक तेज बुखार आएगा. भूख कम हो जाएगी. पशु सुस्त रहने लगता है. मुंह से बहुत ज्यादा लार टपकना शुरू हो जाती है. मुंह में फफोले हो जाते हैं. खासतौर पर जीभ और मसूड़ों पर फफोले बहुत ज्यादा हो जाते हैं. पशु के पैर में खुर के बीच घाव हो जाते हैं, जो अल्सर होता है. गाभिन पशु का गर्भपात हो जाता है. थन में सूजन और पशु में बांझपन की बीमारी आ जाती है. 

ऐसे जल्दी फैलता है एफएमडी      

डॉ. सज्जन ने बताया कि दूषित चारा और दूषित पानी पीने से पशुओं में एफएमडी रोग जल्दी फैलता है. बरसात के दौरान खासतौर पर पशु खुले में चरने के दौरान दूषित चारा-पानी खा और पी लेते हैं. खुले में पड़ी कुछ सड़ी-गली चीजें खाने से भी होता है. फार्म पर नए आने वाले पशु से भी ये बीमारी लग जाती है. पहले से ही एफएमडी से पीड़ित पशु के साथ रहने से भी हो जाती है. 

ऐसे करें एफएमडी की रोकथाम 

डॉ. सज्जन का कहना है कि पशुओं में एफएमडी की रोकथाम करना बहुत आसान है. इसमे कोई पैसा भी खर्च नहीं होता है. सबसे पहले तो अपने पशु का रजिस्ट्रेशन कराएं. उसके कान में ईयर टैग डलवाएं. किसी भी पशु स्वास्य्ले केन्द्र पर साल में दो बार फ्री लगने वाले एफएमडी के टीके लगवाएं. टीका लगवाने के बाद इस बात का खास ख्याल रखें कि टीका लगने पर 10 से 15 दिन में पशु में प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है. इसलिए तब तक पशु का खास ख्याल रखें. बरसात के दौरान पशु के बैठने और खड़े होने की जगह को साफ और सूखा रखें. 

ऐसे करें एफएमडी का उपचार 

डॉ. सज्जन बताते हैं कि एफएमडी का कोई इलाज तो नहीं है, लेकिन कुछ जरूरी उपाय जरूर अपनाए जा सकते हैं. जैसे पीड़ित पशु को बाकी सभी पशुओं से अलग रखें. मुंह के घावों को पोटेशियम परमैंगनेट सॉल्यूशन से धोएं. इसके अलावा बोरिक एसिड और ग्लिसरीन का पेस्ट बनाकर उससे पशु के मुंह की सफाई करें. खुर के घावों को पोटेशियम सॉल्यूगशन या बेकिंग सोडा से धोएं. कोई एंटीसेप्टिक क्रीम लगाएं.

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