यूपी गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष का बढ़ा कार्यकाल, गोवंश संरक्षण और प्राकृतिक खेती पर रहेगा जोर

यूपी गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष का बढ़ा कार्यकाल, गोवंश संरक्षण और प्राकृतिक खेती पर रहेगा जोर

उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता समेत सभी पदाधिकारियों और सदस्यों का कार्यकाल बढ़ा दिया गया है. आगामी कार्यकाल में गोवंश संरक्षण, गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने, प्राकृतिक खेती, जैविक खाद और गौ आधारित बायोगैस को बढ़ावा देने पर विशेष जोर रहेगा.

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यूपी गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष का बढ़ा कार्यकाल, गोवंश संरक्षण और प्राकृतिक खेती पर रहेगा जोरमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश में गौवंश संरक्षण और गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहे गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष और सभी सदस्यों का कार्यकाल बढ़ा दिया गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, उपाध्यक्ष अतुल सिंह उर्फ जसवंत सिंह और महेश शुक्ल सहित सभी सदस्यों के कार्यकाल का विस्तार किया गया है. इस फैसले के बाद आयोग की टीम आगे भी गोवंश संरक्षण, हरे चारे की उपलब्धता, प्राकृतिक खेती और गौशालाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए काम करेगी.

अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कार्यकाल बढ़ाए जाने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार जताया है. उन्होंने कहा कि आयोग की पूरी टीम गोसेवा और गोवंश संरक्षण के संकल्प को नई ऊर्जा और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाएगी.

किन पदाधिकारियों का बढ़ा कार्यकाल?

उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के जिन पदाधिकारियों और सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाया गया है, उनमें अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, उपाध्यक्ष अतुल सिंह उर्फ जसवंत सिंह और महेश शुक्ल शामिल हैं. इनके अलावा सदस्य राजेश सिंह सेंगर, रमाकांत उपाध्याय और दीपक गोयल का कार्यकाल भी बढ़ाया गया है. कार्यकाल बढ़ने के बाद आयोग की टीम गोवंश की देखभाल, संरक्षण और उनसे जुड़े संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर काम जारी रखेगी.

गोवंश संरक्षण और हरे चारे की उपलब्धता पर जोर

आयोग के आगामी कार्यकाल में गोवंश की सुरक्षा और देखभाल के साथ गौशालाओं में हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. गौशालाओं में पशुओं को पर्याप्त चारा और बेहतर सुविधाएं मिलना उनकी देखभाल के लिए जरूरी है. इसके साथ ही गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे. इसका उद्देश्य गौशालाओं को इस तरह विकसित करना है कि वे अपने संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर सकें और आर्थिक रूप से मजबूत बनें.

प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा

आयोग की आगामी योजनाओं में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना भी शामिल है. इसमें गाय के गोबर और गोमूत्र से तैयार होने वाले उत्पादों के इस्तेमाल पर जोर दिया जाएगा. इनके माध्यम से प्राकृतिक खाद और कीट नियंत्रक तैयार किए जा सकते हैं, जो खेती में उपयोगी साबित हो सकते हैं. प्राकृतिक खेती में स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल बढ़ने से किसानों को खेती के वैकल्पिक तरीकों को अपनाने का अवसर मिलता है. साथ ही, गोवंश से मिलने वाले संसाधनों का उपयोग खेती से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा सकता है.

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