Animal Pregnancy Care: गाय-भैंस को बच्चा देने से पहले और बाद में न हो परेशानी, करें ये 20 काम Animal Pregnancy Care: गाय-भैंस को बच्चा देने से पहले और बाद में न हो परेशानी, करें ये 20 काम
Animal Pregnancy Care गाय-भैंस के गाभिन होने और बच्चा देने के बाद देशभाल इसलिए भी जरूरी है कि बच्चा हेल्दी होगा तो मुनाफा कराएगा. वहीं बच्चा आराम से हो गया और भैंस भी हेल्दी और स्वस्थ्य है तो फिर वो दूध उत्पादन भी भरपूर करेगी.
इन 5 खास गाय का पालन आपको फायदा देगा. (Photo: Pixabay)नासिर हुसैन - New Delhi,
- Jan 18, 2026,
- Updated Jan 18, 2026, 10:25 AM IST
Animal Pregnancy Care गाय-भैंस का गर्भकाल अच्छे से पूरा हो जाए. बिना किसी परेशानी के पशु बच्चा दे दे. बच्चा होने के बाद पशु दूध उत्पादन भी करने लगे. ये वो परेशानियां हैं जो गाय-भैंस के गाभिन होते ही शुरू हो जाती हैं. 2 गाय-भैंस वाला पशुपालक हो या फिर 100 गाय-भैंस वाला, सभी की ये एक सामान्य परेशानी है. जब तक गाय-भैंस बच्चा नहीं दे देती है तो कुछ न कुछ परेशानी पशुओं के साथ लगी ही रहती है. खासतौर से बच्चा देने के बाद तो प्रसूति ज्वर जानलेवा बन जाता है. केन्द्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान (सीआईआरबी), हिसार, हरियाणा साइंटिस्ट का कहना है कि गाय-भैंस के गर्भकाल के दौरान तीन महीने आठवां, नौंवा और 10वां बहुत मायने रखते हैं.
वहीं जब बच्चा हो जाए तो फिर कम से कम 20 दिन तक बच्चे की खास तरह से देखभाल बहुत जरूरी हो जाती है. भैंस का गर्भकाल 310 से 315 दिन तक का होता है. गर्भकाल का हर एक दिन बहुत खास होता है, लेकिन आखिर के 90 दिन गर्भवती भैंस के लिए बहुत ज्यादा खास बताए जाते हैं. गर्भकाल के दौरान भैंस की अच्छी तरह से देखभाल की जाए तो बच्चा हेल्दी होगा और भैंस भी स्वच्छ रहेगी. इतना ही नहीं दूध का उत्पादन भी भरपूर होगा.
खानपान में कमी हो तो होते हैं नुकसान
- खानपान की कमी से बच्चा कमजोर और अंधा पैदा हो सकता है.
- बच्चा देने के बाद भैंस को मिल्क फीवर हो सकता है.
- भैंस फूल दिखा सकती है और जेर रूक सकती है.
- भैंस की बच्चेदानी में मवाद पड़ सकता है.
- बच्चा देने के बाद दूध उत्पादन घट सकता है.
खास होना चाहिए गर्भवती भैंस का शेड
- आठवें महीने के बाद से भैंस को दूसरे पशुओं से अलग रखना चाहिए.
- भैंस का बाड़ा उबड़-खाबड़ तथा फिसलन वाला नहीं होना चाहिए.
- बाड़ा हवादार और भैंस को सर्दी, गर्मी और बरसात से बचाने वाला हो.
- बाड़े में रेत-मिट्टी का कच्चा फर्श हो और सीलन न हो.
- ताजा पीने के पानी का इंतजाम होना चाहिए.
गर्भकाल में बहुत जरूरी है 90 दिन की देखभाल
- भैंस तंदुरुस्त रहेगी और दूध भी खूब देगी.
- जन्म के फौरन बाद बच्चे को भैंस के सामने रखा जाता है.
- बच्चा सामने हो तो भैंस उसे चाटकर साफ करती है.
- बच्चे को चाटने से बच्चे की त्वचा जल्दी सूख जाती है.
- भैंस बच्चे को चाटती है तो इससे बच्चे का तापमान नहीं गिरता है.
- चाटने से बच्चे का शरीर साफ हो जाता है खून दौड़ने लगता है.
- चाटने से भैंस और बच्चे के बीच दुलार बढ़ता है.
- बच्चे को चाटने से भैंस को सॉल्ट और प्रोटीन मिलता है.
- भैंस अगर बच्चे को नहीं चाटे तो उसे साफ तौलिए से रगड़ कर साफ कर दें.
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