Seafood Export: सीफूड एक्सपोर्ट को एक लाख करोड़ पहुंचाने के लिए केन्द्र ने मछुआरों को दी ये बड़ी छूट

Seafood Export: सीफूड एक्सपोर्ट को एक लाख करोड़ पहुंचाने के लिए केन्द्र ने मछुआरों को दी ये बड़ी छूट

Seafood Export केन्द्र सरकार ने मछुआरों को स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एसईजेड) और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की सुविधा देने के लिए राष्ट्रीय पास की आनलाइन सुविधा शुरू की है. राष्ट्रीय पास पूरी तरह से फ्री बनेगा. हाल ही में केन्द्रीय मत्स्य और पशुपालन मंत्री राजीव रंजन ने मुम्बई में हुए एक कार्यक्रम के दौरान इसकी शुरआत की है. 

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Seafood Export: सीफूड एक्सपोर्ट को एक लाख करोड़ पहुंचाने के लिए केन्द्र ने मछुआरों को दी ये बड़ी छूटगहरे समुंद्र में घूमती टूना मछली. फोटो क्रेडिट-आईओटीसी

62 हजार करोड़ रुपये वाले सीफूड एक्सपोर्ट को बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार हर संभव कदम उठा रही है. सरकार का लक्ष्य सीफूड एक्सपोर्ट को एक लाख करोड़ रुपये पर पहुंचाने का है. इसके लिए समुद्र में मछली पकड़ने वाले मछुआरों को तरह-तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं. इसी कड़ी में सरकार ने मछुआरों को मछली पकड़ने के लिए फ्री राष्ट्रीय पास देने की स्कीम शुरू की है. मकसद है मछुआरे स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एसईजेड) और गहरे समुद्र में मछुआरों को मछली पकड़ने के लिए प्रेरित करना. 

इस पास की मदद से मछुआरे एसईजेड में मछली पकड़ सकेंगे. अंडमान और लक्ष्यदीप जैसे एसईजेड में टूना मछली भी पकड़ सकेंगे. गौरतलब रहे सीफूड एक्सपोर्ट को बढ़ाने में टूना मछली को एक बड़ी उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है. हाल ही में सरकार दो बार इस क्षेत्र में मीट का आयोजन कर चुकी है. टूना एक कीमती मछली है. ये दो तरह की होती है. इंटरनेशनल मार्केट में इसकी बहुत डिमांड है. 

24 लाख किमी का है समुद्री SEZ

मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक भारत मरीन रिसोर्स से भरा हुआ है. देश की समुद्री तटरेखा 11 हजार किमी से ज्यादा की है. वहीं अगर स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एसईजेड) की बात करें तो ये करीब 24 लाख वर्ग किमी का है. अभी ज्यादातर भारतीय मछली पकड़ने के लिए समुद्र तट से 40-50 समुद्री मील तक ही जाते हैं. जबकि एसईजेड का काफी कम इस्तेमाल किया जाता है. जबकि एसईजेड तमाम तरह के रिसोर्स से भरा हुआ है. जिसमे टूना मछली भी शामिल है. 

सीफूड एक्सपोर्ट बढ़ाने में मददगार बनेगी टूना 

फिशरीज एक्सपर्ट का कहना है कि भारत के एसईजेड में टूना मछली भरी पड़ी है. एक सर्वे के मुताबिक भारत के गहरे समुद्र में करीब दो लाख टन टूना मछली हैं. हमारे देश में दो तरह की टूना मछली पाई जाती हैं. एक येलोफिन और दूसरी स्किपजैक टूना. लेकिन दो लाख टन में से सिर्फ 25 हजार टन टूना मछली ही पकड़ी जा रही हैं. 

अंडमान में पाई जाती हैं ये चार टूना मछली 

अंडमान-निकोबार द्वीप समूह को टूना मछली का बैंक भी कहा जाता है. यहां बड़ी मात्रा में टूना मछली पाई जाती है. फिशरीज एक्सपर्ट की मानें तो यहां खासतौर पर येलोफिन टूना, स्किपजैक टूना, बिग आई टूना और नेरिटिक टूना पाई जाती है. लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि भारतीय टूना मछली को इंटरनेशनल मार्केट में वो दाम नहीं मिल पाते हैं जो दूसरे देशों की टूना को मिलते हैं. टूना क्योंकि गहरे समुद्र में पकड़ी जाती है और बाजार तक आते-आते काफी वक्त लग जाता है, जिसका असर इसकी क्वालिटी पर पड़ने लगता है.

ये हैं टूना खाने के फायदे

कहा जाता है कि दूसरी मछलियों के मुकाबले टूना मछली तैरने में बहुत तेज होती है. इतना ही नहीं टूना मछली खाने के फायदे भी बहुत हैं. अगर हड्डियों के हिसाब से बात करें तो टूना में कैल्शियम, विटामिन-डी और मैग्नीशियम बहुत अच्छी मात्रा में पाया जाता है. इसलिए टूना खाने से हड्डियां मजबूत होती हैं. टूना में ओमेगा-3 फैटी एसिड की मात्रा भी खूब होती है तो ये हॉर्ट को भी मजबूत करता है. आंखों को हेल्दी रखने और वजन घटाने के लिए भी टूना मछली फायदेमंद बताई जाती है.

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