एक बार फिर बांग्लादेश भारत से चार करोड़ अंडे खरीदने आ रहा है.पोल्ट्री सेक्टर इस वक्त एक अलग तरह की परेशानी से जूझ रहा है. परेशानी भी ऐग एक्सपोर्ट से जुड़ी हुई है. ऑल इंडिया पोल्ट्री एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने इस मुद्दे को उठाया है. उनका आरोप है कि हमारे अंडे की ढुलाई लागत पांच गुना हो गई है. शिपिंग के चलते अंडा खासतौर से खाड़ी के देशों में नहीं जा पा रहा है. अंडा भारत में ही डंप हो गया है. अंडा डंप होने से घरेलू बाजार में उसकी कीमतें गिर रही हैं. हालात यहां तक आ गए हैं कि पोल्ट्री फार्मर को अपने अंडे की लागत निकालना मुश्किल हो गया है. इसे देखते हुए ही ऑल इंडिया पोल्ट्री एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव वलसन परमेश्वरन ने सरकार अंडों की ढुलाई लागत को कम करने के लिए सब्सिाडी की मांग की है.
साथ ही जो जहाज पोल्ट्री प्रोडक्ट लेकर जा रहे हैं उनके फेरे बढ़ाने की भी मांग की गई है. लेकिन इससे भी बड़ी एक परेशानी ये है कि जो अंडा रास्ते में फंसा हुआ है उसकी आधी शेल्फ लाइफ बीत चुकी है. इसलिए अब वक्त भी बहुत खास हो गया है. अगर 90 दिन में अंडा अपनी मंजिल तक नहीं पहुंचा तो फिर उसका खराब होना शुरू हो जाएगा.
सचिव वलसन परमेश्वरन का कहना है कि अंडे के निर्यातक पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण शिपिंग में रुकावटों और माल ढुलाई लागत में लगभग पांच गुना बढ़ोतरी से जूझ रहे हैं, जबकि निर्यात की मांग मज़बूत बनी हुई है. लेकिन सस्ता होने के बाद भी घरेलू बाजार में डिमांड कमज़ोर पड़ गई है. इसका नतीजा ये निकला कि अंडे की कई खेपें फंस गई हैं. घरेलू बाजार में अंडे की भरमार हो गई है.
अंडे की कीमतें गिर रही हैं. लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है. ईरान,इजराइल और अमेरिका की लड़ाई के चलते अभी भी अंडों के कंटेनर अटके हुए हैं. 125 कंटेनरों में से 90-95 अब अपनी मंजिल तक पहुँच गए हैं, जिससे कुछ राहत मिली है. लेकिन 5-10 कंटेनर अभी भी JNPT पर अटके हुए हैं. वहीं करीब 30 कंटेनर अभी भी दम्माम के पास एक जहाज पर फंसे हुए हैं. हालांकि अब सीज फायद के ऐलान के बाद से उम्मीद बंधी है कि कुछ दिनों में फंसे हुए कंटेनर निकल जाएंगे.
वलसन परमेश्वरन का कहना है कि अंडों की 90 दिनों की शेल्फ लाइफ (खराब न होने का वक्त) होता है. अब अंडों की कई खेप ऐसी हैं जिनका आधा वक्त पहले ही बीत चुका है. इसलिए समय बहुत कम बचा है. हालांकि, इससे भी ज्यादा मार अंडों की ढुलाई पर पड़ी है. अंडे ले जाने वाले कंटेनर के रेट करीब 1800 डॉलर से बढ़कर 9500 से 10500 डॉलर तक पहुंच गए हैं. जिसके चलते पोल्ट्री ऐग एक्सपोर्टर्स का मुनाफा कम हो गया है.
हालांकि एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (ECGC) से कुछ राहत मिली है. गौरतलब रहे इस लड़ाई से पहले भारत से रोजाना 80 लाख से एक करोड़ अंडे (करीब 20 कंटेनर) एक्सपोर्ट होते थे. ज्यादातर ऐग एक्सपोर्ट नामक्कल से होता है. लेकिन अब बामुश्किल एक-दो कंटेनर ही एक्सपोर्ट हो रहे हैं.
वलसन परमेश्वरन ने बताया कि ऐग एक्सपोर्ट में आई कमी के चलते घरेलू बाजार में अंडों की भरमार हो गई है. इस लड़ाई से पहले 100 अंडे 540 रुपये के बिक रहे थे. लेकिन अब हाल ये है कि बाजार में कोई 100 अंडों के 430 रुपये भी देने को तैयार नहीं है. अगर पोल्ट्री एक्सपर्ट की मानें तो 4.30 रुपये तो अंडे की लागत भी नहीं है. पोल्ट्री फार्मर को नुकसान उठाना पड़ रहा है. उनका कहना है कि दक्षिण भारत के पोल्ट्री फार्मर को रोजाना करीब 5 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है.
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