Biogas Plant: गैस-बिजली की भीषण किल्लत में भी नहीं रुकेगी दूध की सप्लाई, जानें कैसे 

Biogas Plant: गैस-बिजली की भीषण किल्लत में भी नहीं रुकेगी दूध की सप्लाई, जानें कैसे 

Biogas Plant वाराणसी दुग्ध संघ का प्लांट रोजाना 50 पैसे किलो गोबर खरीद रहा है. हर महीने ढाई से तीन करोड़ रुपये का गोबर खरीदा जा रहा है. गोबर गैस प्लांट थर्मल और इलेक्ट्रि‍क दोनों ही जरूरतों को पूरा कर रहा है. प्लांट की एनर्जी जरूरत को गोबर से पूरा करने पर प्लांट को एक लीटर मिल्क प्रोसेसिंग पर 50 पैसे की बचत हो रही है.

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Biogas Plant: गैस-बिजली की भीषण किल्लत में भी नहीं रुकेगी दूध की सप्लाई, जानें कैसे पशुपालकों से दूध संग गोबर खरीदकर उन्हें करोड़ों रुपये का भुगतान किया जा रहा है.

वजह जो भी हो, लेकिन गैस की कमी को लेकर बहुत सारी चर्चाएं हो रही हैं. गैस की कमी को हर कोई अपनी जरूरत की चीजों से जोड़कर बात कर रहा है. सब कयास लगा रहे हैं कि गैस की कमी हो गई तो ये महंगा हो जाएगा, या फिर गैस की कमी से काफी सारी चीजों का तो उत्पादन ही बंद हो जाएगा. ऐसे ही डेयरी को भी गैस की कमी से जोड़कर तमाम तरह की बातें हो रही हैं. लेकिन आपको बता दें कि देश में गैस और बिजली की कितनी भी किल्लत या मारामारी हो जाए, लेकिन न तो देश में दूध की सप्लाई रुकेगी और न ही डेयरी प्लांट की मशीनरी थमेगी. और ये सब मुमकिन होगा नेशनल डेयरी डवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के प्लान से. 

ये एनडीडीबी की कोशि‍शों का ही नतीजा है कि गैस और बिजली से चलने वाले डेयरी प्लांट अब धीरे-धीरे गोबर से बनने वाली गैस और बिजली पर जा रहे हैं. कुछ डेयरी प्लांट 50 फीसद तक जा चुके हैं तो कुछ को 100 फीसद तक गोबर आधारित गैस-बिजली पर लाने की तैयारी चल रही है. देश के 15 राज्यों की 26 मिल्क कोऑपरेटिव को देश में हर रोज 16 करोड़ टन गोबर खरीद करने के लिए कहा गया है. पशुपालक अब रोजाना दूध संग गोबर भी बेच रहे हैं. 

सुबह दूध के साथ खरीदा जा रहा गोबर

  • ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी कोऑपरेटिव हर रोज पशुपालकों से दूध खरीदती हैं. 
  • कई बड़ी कोऑपरेटिव ने दूध संग गोबर की खरीदारी भी शुरू कर दी है. 
  • पशुपालक रोजाना सुबह दूध के साथ-साथ गोबर लेकर भी आते हैं. 
  • डेयरी कोऑपरेटिव पशुपालकों से 50 पैसे किलो के हिसाब से गोबर खरीद रही हैं. 
  • वाराणसी दुग्ध संघ का वाराणसी प्लांट हर महीने करीब दो हजार टन गोबर खरीदता है.
  • हर महीने पशुपालक 2.5 से तीन करोड़ रुपये का गोबर बेच रहे हैं. 

डेयरी प्लांट गोबर का कैसे कर रहे इस्तेमाल 

  • वाराणसी प्लांट में खरीदे गए गोबर से बायोगैस तैयार की जाती है. 
  • इस गैस का इस्तेमाल मिल्क प्रोसेसिंग में किया जाता है. 
  • ये गैस प्लांट की थर्मल और इलेक्ट्रि‍क दोनों ही जरूरतों को पूरा करती है. 
  • गोबर गैस की वजह से मीथेन गैस का उत्सर्जन भी कम हो रहा है. 
  • गोबर बिकने की वजह से गांव भी गंदगी से मुक्त स्वच्छ हो गए हैं. 
  • एक गाय रोजाना 10 किलो तो भैंस 15 किलो गोबर देती है. 
  • गैस बनने के बाद गोबर की स्लरी बनती है. 
  • बची हुई स्लरी को वापस पशुपालकों को ही बेच दिया जाता है. 
  • दूध बेचने वाले पशुपालकों को ही सस्ते दाम पर स्लरी बेची जाती है.
  • वाराणसी के इस प्लांट पर पशुपालक हर रोज 1.35 लाख लीटर दूध बेचते हैं. 

गैस प्लांट बनाने में यहां भी मदद कर रही NDDB 

पशुपालकों और डेयरी प्लांट के बीच बॉयो गैस प्लांट को नेशनल डेयरी डवलपमेंट बोर्ड प्रचारित कर रही है. गैस प्लांट का डिजाइन और दूसरी तकनीकी चीजें भी एनडीडीबी की मदद से ही तैयार की गई हैं. बि‍हार में सुधा डेयरी भी इसी पैटर्न पर काम कर रही है. हरियाणा में वीटा डेयरी प्लांट बना रही है. वहीं असम में तो 100 फीसद बिजली की जरूरत बॉयो गैस से ही पूरी की जाएगी. इसी को ध्यान में रखते हुए वहां डेयरी प्लांट बन रहा है.

NDDB के जकरिया मॉडल से घर भी हो रहे रोशन  

एनडीडीबी ने जकरिया मॉडल भी तैयार किया है. इसे खासतौर पर पशुपालक अपना रहे हैं. इस मॉडल के तहत घरों के लिए भी प्लांट बनाकर गैस इस्तेमाल की जा सकती है. इस मॉडल में रोजाना 40 से 50 किलो गोबर इस्तेमाल कर हर महीने डेढ़ से दो सिलेंडर के बराबर गैस बन जाती है. इसके साथ ही गैस बनने के बाद बची गोबर की स्लरी खेतों में इस्तेमाल की जा सकती है. इन सब के लिए सरकार सब्सिडी भी दे रही है.
 

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