Milk Price: फिर आई दूध पर आफत, क्या जल्द डेयरी कंपनियां बढ़ाएंगी दाम!

Milk Price: फिर आई दूध पर आफत, क्या जल्द डेयरी कंपनियां बढ़ाएंगी दाम!

Milk Price दूध और चाय पीने वालों को एक और जोर का झटका धीरे से लग सकता है. डेयरी सेक्टर से इस तरह की खबरें आ रही हैं कि एक बार फिर दूध के दाम बढ़ाए जा सकते हैं. हालांकि दाम बढ़ाने के पीछे डेयरी कंपनियों की भी मजबूरी बताई जा रही है. डेयरी एक्सपर्ट की मानें तो अभी कंपनियां खुद बढ़ी हुई लागत का बोझ उठा रही हैं. 

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Milk Price: फिर आई दूध पर आफत, क्या जल्द डेयरी कंपनियां बढ़ाएंगी दाम!

अभी बीते महीने ही डेयरियों ने दूध के दाम बढ़ाए हैं. प्रति लीटर दो रुपये की बढ़ोतरी की गई है. लेकिन एक बार फिर दूध पर आफत आ सकती है. सीधे शब्दों में बोलें तो दूध के दाम बढ़ सकते हैं. इस बात का इशारा डेयरी से जुड़े लोग भी दे रहे हैं. अभी जो दाम बढ़े हैं उन्हें हर साल की तरह होने वाली बढ़ोतरी के रूप में देखा जा रहा है. लेकिन अब अगर दूध के दाम बढ़े तो उसके पीछे ईरान-अमेरिका विवाद होगा. क्योंकि बीते कई दिनों से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं. 

और ये हम अच्छी तरह से जानते हैं कि मिल्क सप्लाई चैन में पेट्रोल-डीजल का कितना इस्तेमाल होता है. दाम बढ़ने को लेकर कुछ ऐसा ही इशारा नेशनल डेयरी डवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) के चेयरमैन ने किसान तक से हुई बातचीत में दिया है. डेयरी एक्सपर्ट की मानें तो पशुपालक के पास से लेकर डेयरी प्लांट तक दूध आने में हर जगह वाहनों का इस्तेमाल होता है.  

डीजल ने बिगाड़ा दूध का अर्थशास्त्र 

एनडीडीबी के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने किसान तक से बातचीत में बताया कि पेट्रोल-डीजल के जो दाम बढ़ रहे हैं उसका असर डेयरियों पर भी पड़ रहा है. मिल्क सप्लाई चेन में ट्रांसपोर्ट का बड़ा और अहम रोल है. पशुपालक के घर से शुरू होने वाला सिलसिला डेयरी प्लांट तक ट्रांसपोर्ट पर ही टिका होता है. पेट्रोल-डीजल के दाम पर हुई बढ़ोतरी का असर दूध और दूध से बनने वाले प्रोडक्ट पर दिखना शुरू हो गया है. लागत बढ़ गई है. लेकिन अभी बढ़ी हुई लागत का बोझ कंपनियां ही उठा रही हैं. लेकिन बढ़ी हुई लागत का बोझ उठाने की कंपनियों की भी अपनी एक क्षमता है. 

ऐसे चलती है मिल्क सप्लाई चेन 

डेयरी एक्सपर्ट ने बताया कि कोई भी पशुपालक अपने घर पर गाय-भैंस का दूध निकालकर उसे एक जगह जमा कर लेता है. फिर उस टोटल दूध को मिल्क कलेक्शन सेंटर पर लेकर जाता है. इसके लिए पशुपालक ज्यादातर दोपहिया वाहन का इस्तेमाल करता है जो पेट्रोल से चलता है. 

  • कुछ मिल्क कलेक्शन सेंटर पर चिलिंग प्लांट होते हैं और कुछ पर नहीं. जहां नहीं होते हैं तो वहां से छोटे-छोटे टैंकरों की मदद से जमा किया गया दूध चिलिंग सेंटर पर भेज दिया जाता है. वहां दूध को 4 से 5 डिग्री तापमान पर ठंडा किया जाता है. 
  • चिलिंग सेंटर से डेयरी प्लांट या यूनिट का बड़ा इंसुलेटेड (ठंडा) या रेफ्रिजरेटेड टैंकर दूध लेकर प्लांट पर सप्लाई करता है. 
  • डेयरी प्लांट या यूनिट पर चिलिंग प्लांट से आए दूध को पाश्चुरीकरण (Pasteurization) किया जाता है. फिर ये दूध पाउच और बोतलों में पैक किया जाता है. फिर यहां से पैक दूध डिमांड के हिसाब से अलग-अलग शहरों में भेज दिया जाता है. 
  • डेयरी प्लांट या यूनिट पर चिलिंग प्लांट से आए दूध के कुछ हिस्से को प्रोसेस भी किया जाता है. उसके अलग-अलग प्रोडक्ट बनाए जाते हैं. फिर इन्हीं प्रोडक्ट को बड़ी-बड़ी गाडि़यों से शहर और गांवों में भेजा जाता है. 

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