Egg Hygiene: धोने से साफ नहीं और ज्यादा गंदे और नुकसानदायक हो जाते हैं अंडे

Egg Hygiene: धोने से साफ नहीं और ज्यादा गंदे और नुकसानदायक हो जाते हैं अंडे

Egg Hygiene अंडे खरीदते वक्त और खरीदने के बाद अंडे की क्वालिटी इस बात पर निर्भर करती है कि उन्हें कितनी अच्छी तरह से स्टोर करके रखा गया है. अंडे ठंडे तापमान में खासतौर रेफ्रिजरेटर के अंदर स्टोर पर भी सबसे ज्यादा सेफ रहते हैं. लेकिन इसके साथ ही ये भी जरूरी है कि गंदे अंडे स्टोर करने से बचना चाहिए. 

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Egg Hygiene: धोने से साफ नहीं और ज्यादा गंदे और नुकसानदायक हो जाते हैं अंडे

बात बेहद चौंकाने वाली है. लेकिन माननी भी चाहिए, क्योंकि ये पूरी तरह इंसानों की हैल्थ से जुड़ी है. भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और पोल्ट्री एक्सपर्ट की मानें तो अंडों को कभी धोना नहीं चाहिए. ऐसा माना जाता है कि अंडे धोने से और ज्यादा गंदे और हैल्थ के लिए नुकसानदायक हो जाते हैं. क्योंकि अंडों को धोने पर उसमे और ज्यादा पोरस हो जाते हैं, जिससे बाहर की गंदगी अंडों के अंदर जाने का खतरा बना रहता है. इतना ही नहीं गंदे अंडे तोड़ते वक्त उसकी बाहरी गंदगी भी बर्तन में गिरने का डर बना रहता है. इसलिए बाजार में खरीदते वक्त अंडों को अच्छी तरह से देखभाल के ही लेना चाहिए. FSSAI भी अपनी एडवाइजरी में साफ कहता है कि गंदे और टूटे हुए अंडों का इस्तेमाल बिल्कुल न करें. 

टूटे हुए और गंदे अंडे के छिलके बैक्टीरियल इन्फेक्शन का एक बड़ा सोर्स होते हैं. एक्सपर्ट की मानें तो अंडों से हैल्थ को नुकसान तब होता है जब हम अंडा स्टोर करने में गलतियां करते हैं. जैसे बहुत ज्यादा तापमान होने पर अंडे कई-कई दिन तक खुले में ही रखे रहते हैं. कई बार ऐसा उस दुकान और स्टोर पर भी होता है जहां अंडे बिकने के लिए खुले में ही रखे रहते हैं. 

धोने से हट जाती है सेफ्टी लेयर 

पोल्ट्री एक्सपर्ट डॉ. वीके प्रसाद का कहना है कि हमेशा गंदे अंडों को धोने से बचना चाहिए. क्योंकि अंडे गीले होने पर उनमे ज़्यादा पोरस हो जाते हैं, जिससे बैक्टीरिया आसानी से अंडों के अंदर चले जाते हैं. अंडे के छिलकों पर बने ये पोरस नंगी आंखों से दिखाई नहीं देते हैं. एक अंडे पर सात से 15 हजार तक पोरस होते हैं.

जैसे ही अंडों को धोया जाता है तो इनके जरिए अंडों की बाहरी गंदगी अंदर चली जाती है. क्योंकि जैसे ही अंडे धोय जाते हैं तो उसके ऊपर से 'ब्लूम' या 'क्यूटिकल' नाम की सेफ्टी लेयर हट जाती है. यही लेयर पोरस को ढककर रखती है, जिससे बैक्टीरिया अंदर न जा सकें. एक्सपर्ट के मुताबिक अंडों के पोरस से ऑक्सीजन अंदर जाती है, कार्बन डाइऑक्साइड और नमी बाहर निकलती है. 

हरगिज स्टोर न करें गंदे अंडे 

FSSAI ने अपनी एडवाइजरी में साफ कहा है कि गंदे और टूटे हुए अंडों का इस्तेमाल बिल्कुल न करें. टूटे हुए अंडे के छिलके बैक्टीरियल इन्फेक्शन के बड़े सोर्स होते हैं. साथ ही गंदे अंडे खरीदने से भी बचें. गंदे अंडे स्टोरेज के दौरान खाने की दूसरी चीजों को भी खराब कर सकते हैं. ये जरूरी नहीं है कि गंदे अंडे दूषित हों और उसमे बदबू आए. 

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