Animal Care in Summer: गर्मियों में कम बीमार पड़ेंगे पशु और ज्यादा होगा मुनाफा, जानें कैसे Animal Care in Summer: गर्मियों में कम बीमार पड़ेंगे पशु और ज्यादा होगा मुनाफा, जानें कैसे
Animal Care in Summer गर्मी के मौसम में पशुओं की देखभाल कैसे करनी चाहिए, इसे लेकर सरकार और संबंधित विभाग एडवाइजरी जारी करते रहते हैं. इसका फायदा ये होता है कि घर पर ही कुछ जरूरी कदम उठाकर पशुओं को राहत दे दी जाती है. खासतौर पर पहले से बीमार और गर्भवती पशुओं का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है.
यूपी की गौशालाओं में लगेंगे सीसीटीवी. (Photo: Representational)नासिर हुसैन - New Delhi,
- Apr 13, 2026,
- Updated Apr 13, 2026, 10:10 PM IST
45 से 48 डिग्री तापमान, गर्मी संग लू के थपेड़े, बीच-बीच में उमस भरी दोपहर या शाम. कुछ ऐसा ही होता है गर्मियों वाला मई-जून का महीना. ऐसे में पानी की कमी के चलते दूध देने वाले पशुओं को परेशान करता हीट स्ट्रैस और डिहाईड्रेशन. ये देखने और सुनने में छोटी और एक आद परेशानी लग रही है, लेकिन पशुपालन में इसके नुकसान बहुत है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें ते गर्मियों में पशुओं को सबसे ज्यादा परेशानी हीट स्ट्रैस और डिहाईड्रेशन के चलते होती है. इसीलिए कहा जाता है कि बदलते मौसम के हिसाब से पशुओं के शेड में बदलाव करना चाहिए.
पीने के पानी और चारे में भी मौसम के हिसाब से बदलाव करना होता है. इतना ही नहीं पशु को शेड से कब बाहर ले जाना है या फिर कब से कब तक शेड में ही रखना इसका पालन भी एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक ही करना चाहिए. पशुओं के हीट स्ट्रेस और डिहाईड्रेशन में आते ही उनका दूध उत्पादन घट जाता है. जबकि कम दूध देने की हालत में भी पशु चारा सामान्य दिना जितना ही खाता है.
गर्मी-लू में ऐसे करें गाय-भैंस की देखभाल
- गाय-भैंस के हीट में आने पर वक्त रहते गाभिन कराएं.
- पशु को दिन के वक्ते सीधे तौर पर तेज धूप से बचाएं.
- खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव के लिए टीके लगवाएं.
- डॉक्टर की सलाह पर पशु पेट के कीड़ों की दवाई खिलाएं.
- दूध के ज्यादा दाम हासिल करने के लिए उसके प्रोडक्ट बनाकर बेचें.
- गेहूं के भूसे की पौष्टिकता बढ़ाने के लिए यूरिया का इस्तेामाल करें.
- दुधारू पशुओं को थैनेला रोग से बचाने के लिए डाक्टर की सलाह लें.
- पूरा दूध निकालने के बाद पशु के थन कीटाणु नाशक घोल में डुबाएं.
- सुबह-शाम के वक्त गर्भवती और बीमार पशु को टहलाने जरूर ले जाएं.
- पशुओं को साफ और ताजा पानी पिलाएं, ठंडा पानी ना दें.
- बछड़े को बैल बनाने के लिए छह महीने की उम्र पर उसे बधिया करा दें.
- पशुओं को अफरा होने पर 500 ग्राम सरसों के तेल में 50 ग्राम तारपीन का तेल मिलाकर दें.
- पशु की सेहत और उसके दूध को बढ़ाने के लिए 50 से 60 ग्राम मिनरल मिक्चिर दें.
- गर्मियों में हरे चारे की कमी दूर करने के लिए गेहूं की कटाई होते ही ज्वार, मक्का और लोबिया की बुआई करें.
Meat Production: पश्चिम बंगाल नहीं, UP को दिया गया मीट उत्पादन में नंबर वन बनने का टॉरगेट
Egg Expiry: अंडे की एक्सपायरी प्रिंट करने पर NECC ने कही ये बड़ी बात, पढ़ें CEO का इंटरव्यू