Dry Fodder in Summer: बाजार में आने वाला है नया भूसा, गाय-भैंस को खि‍लाने से पहले जान लें ये जरूरी बात 

Dry Fodder in Summer: बाजार में आने वाला है नया भूसा, गाय-भैंस को खि‍लाने से पहले जान लें ये जरूरी बात 

Dry Fodder in Summer सर्दियों के मुकाबले गर्मियों में पशु बहुत ज्यादा बीमार होते हैं. अगर ठीक से इनकी देखरेख कर ली जाए तो हम पशुओं को बीमार होने से बचा सकते हैं. जैसे कुछ दिनों बाद बाजार में नया भूसा (तूड़ी) आने वाली है. नया भूसा पशुओं को बीमार करता है. इसलिए इसे खि‍लाने में ऐहतियात बरतनी चाहिए. 

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Dry Fodder in Summer: बाजार में आने वाला है नया भूसा, गाय-भैंस को खि‍लाने से पहले जान लें ये जरूरी बात 

गेहूं की फसल कटने का वक्त नजदीक आ रहा है. फसल कटने के साथ ही नया गेहूं बाजार में आ जाएगा. नए गेहूं के साथ-साथ नया भूसा (तूड़ी) भी आने लगेगा. बहुत सारे पशुपालक ऐसे होते हैं जो हर रोज या दो दिन बाद भूसा खरीदकर गाय-भैंस को खि‍लाते हैं. लेकिन, एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक भूसा खि‍लाने का ये तरीका सही नहीं है. क्योंकि बाजार में जब नया भूसा आता है तो वो अपने साथ कुछ बीमारियां भी लेकर आता है. इसलिए ये जरूरी है कि पशुओं को नया भूसा खि‍लाने से पहले एक्सपर्ट के बताए कुछ टिप्स को जान लें. 

क्योंकि नया भूसा पशुओं को लगातार खि‍लाया जाता है तो उन्हें पाचन संबंधी कब्ज या बंधा होना या दस्त लगने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. एक्सपर्ट के मुताबिक सर्दी-गर्मी हो या बरसात, हर मौसम में पशुओं के चारे के बारे में पूरी सावधानी बरतनी चा‍हिए. जैसे बरसात के दौरान पशुओं को ज्यादा हरा चारा नहीं खिलाया जाता है उसी तरह से पशुओं को नया भूसा भी एक साथ बड़ी मात्रा में नहीं दिया जाना चाहिए. उसे देने का एक तरीका है,  जिसके बारे में यहां बात की जा रही है.  

ऐसे बिगड़ता है पशुओं पाचन सिस्टम 

एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि पशुओं का पेट चार हिस्सों में बंटा होता है. जो रूमन, रेटिकुलम, ओमेंसम और अबोमेसम नाम से जाने जाते हैं. खास बात ये है कि जुगाली करने वाले पशुओं में चारे का पाचन सूक्ष्म जीवों द्वारा फर्मेटेड किया जाता हैं. आहार में एकदम बदलाव करने से सूक्ष्म जीवो का रूमन में संतुलन बिगड़ जाता हैं और इसके चलते पशुओ में पाचन संबंधी परेशानियां होने लगती हैं. 

नया भूसा खि‍लाते वक्त इन बातों को रखें याद 

  • नया भूसा एकदम से पशु आहार में शामिल ना करें. 
  • नया भूसे की मात्रा धीरे-धीरे सात से दस दिनों में पशुओं की खुराक में बढ़ाते रहें. 
  • पुराने भूसे को नया भूसा आने तक बचा कर रखे और उसे नये भूसा के साथ मिला कर दें.
  • शुरुआत में पुराने भूसा की मात्रा ज्यादा रखें और धीरे-धीरे नये भूसा की मात्रा बढ़ाते जाएं. 
  • नये भूसे को छान कर कुछ घंटे भिगो कर रख सकते हैं. ऐसा करने से पशु आसानी से पचा लेता है. 
  • नया भूसा खि‍लाते वक्त पशुओं को सेंधा नमक, हरड़, हींग भी खिला सकते हैं. 
  • पशु का पाचन बढ़ाने के लिए प्रोबायोटिक जैसे यीस्ट कल्चर आदि चाटने के लिए दे सकते हैं.
  • पशु चिकित्सक की सलाह से पशु को कब्ज सही करने के लिए अरंडी का तेल, पैराफीन, अलसी का तेल पिला सकते हैं.

गरमुंडा के फल और जड़ो से करें इलाज 

रोज 20 ग्राम प्रति 100 किलो शरीर के वजन के अनुसार खिलाने से पशुओं की कब्ज सही हो जाती है. 
अफारा हो तो 200 एमएल अरंडी के तेल को गरम पानी के साथ अच्छे से मिला कर पशुओं को हर चार से छह घंटों के अंतराल पर पिला सकते हैं. 
पशुओ को दस्त लगने की स्थिति मे नीम, अनार, अमरूद के पत्तो, सूखी अधरक व गुड़ के साथ दे सकते हैं.
कोई भी ज़हरीली दवा (कीटनाश्क स्प्रे) आदि भूसा के साथ स्टोर में न रखें.
मशीनों के चलते गेंहू कटाई के दौरान भूसा में सूल, मिट्टी की मात्रा आने से छानना जरूरी है. 

गर्मी के दौरान पशुपालन में ये जरूर करें 

 गर्मियों के दौरान पशुओं को खुराक दिन के ठंडे समय में यानि सुबह-शाम में ही दें.
भैंस का रंग काला और पसीने की सीमित ग्रंथियां होने से गर्मी का तनाव उन्हें ज्यादा होता है. इसलिए दिन में दो-तीन बार जरूर नहलाएं. 
संभव हो तो 24 घंटे साफ और ठंडा पानी पिलाएं.

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