Vector Problme in Animal: गर्मियों में भी गाय-भैंस को परेशान करते हैं मक्खी-मच्छर, ऐसे करें इलाज 

Vector Problme in Animal: गर्मियों में भी गाय-भैंस को परेशान करते हैं मक्खी-मच्छर, ऐसे करें इलाज 

Vector Problme in Animal परजीवी विरोधी प्रतिरोध (एंटीपैरासिटिक रेसिस्टेंस) के चलते अब परेशान करने वाली बात ये है कि बीते कुछ वक्त से दवाईयां भी पशुओं पर असर नहीं कर रही हैं. इसके चलते पशुओं की परजीवी जनित बीमारियों का इलाज करना मुश्किल हो गया है. ये बीमारी हमेशा से ही पशुपालकों की बड़ी परेशानी रही है. 

Advertisement
Vector Problme in Animal: गर्मियों में भी गाय-भैंस को परेशान करते हैं मक्खी-मच्छर, ऐसे करें इलाज 

पशुपालन में मच्छर-मक्खी, जोंक, किलनी एक बड़ी परेशानी है. पोल्ट्री में भी मक्खि यां बहुत परेशान करती हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि यही मच्छर-मक्खी, जोंक, किलनी पशुओं में बड़ी बीमारी की वजह बनती हैं. ये पशुओं से चिपककर उन्हें काटते और उनका खून चूसते हैं. कुछ कीट तो ऐसे भी हैं जो गाय-भैंस, भेड़-बकरी के खून में शामिल हो जाते हैं. और यही खून में शामिल होकर खुजली से लेकर कई तरह की गंभीर बीमारियां खड़ी कर देते हैं. मेडिकल की भाषा में इन्हें परजीवी रोग (पैरासाइटिक डिसीज) भी कहा जाता है. 

अभी तक परजीवी रोग का इलाज दवाईयों से हो जाता था. लेकिन एक रिपोर्ट के मुताबिक ये परेशानी अब और बड़ी हो गई है. यही वजह है कि परजीवी विरोधी प्रतिरोध (एंटीपैरासिटिक रेसिस्टेंस) के चलते पशुओं के डाक्टर भी परेशान हो उठे हैं. लेकिन जब तक इसका कोई समाधान नहीं आता है तब तक कुछ उपाय अपनाकर इससे बचा जा सकता है. इस बारे में डॉ. मैना कुमारी और डॉ. मनीष कुमार पशु विज्ञान केन्द्र, सूरतगढ़, राजस्थान ने कुछ उपाय अपनाने का सुझाव दिया है.  

ये है एंटीपैरासिटिक रेसिस्टेंस की बड़ी वजह 

दवाओं का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल (ओवरयूज). एंटीपैरासिटिक दवाओं का ज्यादा इस्तेमाल और उस पर कंट्रोल ना होना परजीवियों में प्रतिरोधकता बढ़ने की एक बड़ी वजह है. सही तरह से दवाई ना लेना, पशुओं को सही तरीके से दवाई ना देना, डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाई का पूरा कोर्स ना करना भी एक वजह है. पर्यावरणीय और जैविक कारण भी हैं. परजीवियों की प्राकृतिक चयन प्रक्रिया और उनके जीन में होने वाले बदलाव भी प्रतिरोधकता का कारण बन रहे हैं.

ऐसे रुकेगा एंटीपैरासिटिक रेसिस्टेंस

1 केवल पशु चिकित्सक की सलाह पर ही पशुओं को एंटीपैरासिटिक दवाई खि‍लाएं. 
2 पशुओं के लिए डाक्टर के बताए कृमिनाशक शेडयूल का पालन करें.
3 पशुचिकित्सक द्वारा बताई गई दवाओं के कोर्स को पूरा करें.
4 दवाई की डाक्टर द्वारा बताई गई डोज ही दें, कम या ज्यादा मात्रा ना दें.
5 पशुओं का इलाज नीम-हकीमों से ना करवायें.
6 दवा का इस्तेमाल करने से पहले ड्रग लेबल पर दिए गए निर्देशों को पढ़ लें.
7 एक ही पशु में परजीवी रोधी दवाओं को सालाना बदलें.
8 परजीवी विरोधी प्रतिरोधकता पर शैक्षिक और जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा दें.
9 अपने फार्म में कृमि नियंत्रण का पूरा रिकॉर्ड रखें.
10 पशुओं में परजीवी नियत्रंण के लिए एथनोवेटरनरी दवाई (ईवीएम) का इस्तेमाल करें.

पशुपालन में ये काम कभी न करें 

1 डाक्टर के अलावा किसी और की सुझाई गई परजीवी विरोधी दवाई पशुओं को ना खि‍लाएं.
2 लगातार एक जैसी दवाई पशुओं को ना खि‍लाएं. 
3 कभी भी पशुओं को खुद से कोई दवाई ना दें.
4 पशुओं में सामूहिक कृमिनाशन न करें.
5 खुद के अनुभव के आधार पर स्टोर से दवाई खरीदकर पशुओं को ना खि‍लाएं.

ये भी पढ़ें- Breed Production: OPU-IVF से मां बनेंगी सड़क-खेतों में घूमने वाली छुट्टा गाय

ये भी पढ़ें- Egg Production: पोल्ट्री फार्म में कैसे बढ़ेगा अंडा उत्पादन, पढ़ें पोल्ट्री एक्सपर्ट के 10 टिप्स

POST A COMMENT