
देश में मरीन फिश फार्मिंग यानि नदी और समुद्र से मछली पकड़ना कम होता जा रहा है. जबकि इनलैंड (तालाब में) मछली पालन बढ़ रहा है. अब सिर्फ तालाब में ही नहीं और भी दूसरे तरीके अपनाकर मछली पालन किया जा रहा है. और ये तेजी से बढ़ रहा है. इनलैंड फिशरीज के मामले में हरियाणा दूसरे नंबर पर है, जबकि यूपी इनलैंड फिशरीज में पहले नंबर पर है. लेकिन हरियाणा ने नंबर वन बनने की कोशिश शुरू कर दी है. इसके लिए राज्य सरकार अपने मछली पालकों को ज्यादा से ज्यादा प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना का फायदा दे रही है.
मछली पालकों को योजना के प्रति जागरुक किया जा रहा है. इसी के तहत कोल्ड स्टोरेज बनाए जा रहे हैं. मंडी बनाने और झींगा प्रोसेसिंग यूनिट बनाने की तैयारी चल रही है. फिशरीज एक्सपर्ट की मानें तो हरियाणा में मछली पालन में बहुत संभावनाएं हैं. सरकार का लक्ष्य है कि मछली उत्पादन के मामले में हरियाणा नंबर वन बने. इसी को देखते हुए सरकार कई बड़े काम करने जा रही है.
हरियाणा में मछली पालकों को राहत देते हुए सरकार ने 25 कोल्ड स्टोरेज तैयार कराकर दूसरे 18 कोल्ड स्टोरेज पर काम शुरू करवा दिया है. इसमे से 10 कोल्ड स्टोर पर किसानों को सब्सिडी दी गई है. मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए ही कोल्ड चेन बनाई जा रही है. ऐसा होने पर मछली फ्रेश रहेगी और मछली पालकों का माल भी सुराक्षित बना रहेगा. इतना ही नहीं मछली पालकों की परेशानी को दूर करने के लिए फरीदाबाद, गुरूग्राम और हिसार में मछली मंडी बनाने की योजना है.
जो किसान मछली पालन कर रहे हैं या मछली पालन में आना चाहते हैं ऐसे लोगों को सरकार मछली का उच्च क्वालिटी का बीज उपलब्ध करा रही है. प्रदेश में सरकारी 15 बीज केंद्र हैं. क्योकि इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा ग्रोथ है इसलिए मछली पालकों की सुविधा को ध्यान रखते हुए बीज से लेकर बाजार तक हर सुविधा प्रदान की जाएगी. मछली पालकों को अपने तालाबो पर सोलर सिस्टम लगाने के लिए सब्सिडी के 45 लाख रूपये दिए जा चुके हैं. वहीं उन्होंने अफसरों को निर्देश दिए कि जिन किसानों की सब्सिडी अभी पैंडिग है उसको भी जल्द दिया जाए.
हरियाणा में बहुत सारी जगह पर झींगा पालन भी होता है. लेकिन प्रदेश में झींगा प्रोसेसिंग यूनिट नहीं है. इसी को देखते हुए झीगा प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की योजना पर काम चल रहा है. साथ ही भिवानी के गांव गरवा में 24.5 एकड़ जमीन पर एकीकृत एक्वा पार्क बनाने की योजना पर भी काम हो रहा है. झींगा और मछली उत्पादन की उत्पादकता बढ़ाने के लिए एकीकृत एक्वा पार्क बनाने पर 98.90 करोड़ रूपये की लागत आएगी. निर्माण के लिए कंपनियों से टेंडर भी मांगे जा चुके हैं.
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