याक पालन होगा हाईटेक! ICAR का स्मार्ट डिवाइस बताएगा पशु की सेहत से जुड़ी पूरी जानकारी

याक पालन होगा हाईटेक! ICAR का स्मार्ट डिवाइस बताएगा पशु की सेहत से जुड़ी पूरी जानकारी

देश के पहाड़ी इलाकों में याक पालन करने वाले पशुपालकों के लिए बड़ी खुशखबरी है. ICAR के नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन याक ने एक IoT आधारित स्मार्ट हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया है, जो याक की सेहत, तनाव और लोकेशन पर 24 घंटे रियल-टाइम नजर रखेगा.

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याक पालन होगा हाईटेक! ICAR का स्मार्ट डिवाइस बताएगा पशु की सेहत से जुड़ी पूरी जानकारीयाक पालन होगा हाईटेक

देश के पहाड़ी इलाकों में याक पालन करने वाले पशुपालकों के लिए अच्छी खबर है. दरअसल, अब याक की सेहत और सुरक्षा पर 24 घंटे नजर रखना आसान हो जाएगा. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन याक (ICAR-NRC on Yak), दिरांग ने असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी, गुवाहाटी के सहयोग से एक IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) आधारित स्मार्ट हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया है. यह नई तकनीक याक की सेहत, तनाव (Stress) और उसकी लोकेशन पर रियल-टाइम नजर रखेगी. इस स्मार्ट तकनीक का उद्देश्य याक पालन को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और वैज्ञानिक बनाना है, ताकि पशुपालकों को समय रहते जरूरी जानकारी मिल सके और पशुओं की मौत या बीमारी से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके.

क्या है स्मार्ट हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम?

इस तकनीक के तहत याक के गले में एक छोटा IoT डिवाइस लगाया जाता है. यह डिवाइस लगातार याक की गतिविधियों और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी रिकॉर्ड करता है और उसे डिजिटल माध्यम से पशुपालक या संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाता है. इससे पशुपालकों को हर समय यह जानकारी मिलती रहेगी कि उनका याक कहां है, उसकी सेहत कैसी है और कहीं वह किसी परेशानी में तो नहीं है.

स्मार्ट हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम की खूबियां

1. रियल-टाइम हेल्थ मॉनिटरिंग: यह डिवाइस याक की सेहत पर हर समय नजर रखता है. यदि पशु के स्वास्थ्य में कोई बदलाव होता है, तो तुरंत जानकारी मिल जाती है.

2. तनाव की समय रहते पहचान: कई बार बीमारी आने से पहले पशु के व्यवहार में बदलाव दिखाई देता है. यह सिस्टम ऐसे बदलावों की पहचान कर पहले ही अलर्ट देता है, जिससे समय पर इलाज कराया जा सके.

3. जियो-फेंसिंग से बढ़ेगी सुरक्षा: इस तकनीक में Geo-Fencing फीचर भी दिया गया है. यानी अगर याक तय किए गए सुरक्षित क्षेत्र से बाहर निकलता है, तो तुरंत अलर्ट मिल जाएगा. इससे पशुओं के खोने या जंगली इलाकों में भटकने का खतरा कम होगा.

4. दूरदराज के इलाकों में भी होगी निगरानी: हिमालयी क्षेत्रों में याक अक्सर दूर-दराज के चरागाहों में रहते हैं. ऐसे इलाकों में भी यह सिस्टम याक की गतिविधियों को ट्रैक करने में मदद करेगा.

5. समय पर मिलेगा पशु चिकित्सा सहयोग: यदि किसी याक की तबीयत खराब होती है या वह तनाव में होता है, तो समय रहते जानकारी मिलने से पशु चिकित्सक जल्दी इलाज कर सकेंगे. इससे पशुओं की मृत्यु दर कम होगी और उनकी उत्पादकता बढ़ेगी.

6. निगरानी में कम होगी मेहनत: पहले पशुपालकों को याक की निगरानी के लिए लगातार उनके साथ रहना पड़ता था. अब यह स्मार्ट सिस्टम कई काम अपने आप करेगा, जिससे समय, मेहनत और खर्च तीनों की बचत होगी.

पशुपालकों को क्या होगा फायदा?

इस तकनीक से याक पालन पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और आसान हो जाएगा. बीमारी का जल्दी पता चलने से इलाज समय पर होगा, पशुओं की उत्पादकता बेहतर होगी और आर्थिक नुकसान कम होगा. साथ ही, पशुपालकों को बार-बार पशुओं की तलाश या निगरानी करने की जरूरत भी कम पड़ेगी.

हिमालयी क्षेत्रों के लिए बड़ी पहल

ICAR के अनुसार, यह स्मार्ट IoT सिस्टम भारतीय हिमालयी क्षेत्रों में याक पालन को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे न केवल पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा, बल्कि पशुपालकों की आजीविका भी मजबूत होगी. भविष्य में इस तरह की स्मार्ट तकनीकें देश के अन्य पशुपालन क्षेत्रों में भी उपयोगी साबित हो सकती हैं. इस नई पहल से याक पालन में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ेगा और पशुपालकों को कम मेहनत में बेहतर प्रबंधन और अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है.

याक के दूध के क्या हैं फायदे?

यह मुख्य रूप से हिमालय और तिब्बती पठार जैसे अत्यधिक ठंडे और पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण दुधारू पशु है. याक का दूध गाय के दूध की तुलना में काफी गाढ़ा और पौष्टिक होता है. इसमें सामान्य गाय के दूध की तुलना में अधिक प्रोटीन, वसा, कैल्शियम और आयरन होता है. याक के दूध से मक्खन, घी, और स्थानीय पनीर (जैसे 'चुरपी') जैसे कई पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद बनाए जाते हैं. याक प्रतिदिन गाय जितना दूध नहीं देती, बल्कि इसका उत्पादन कम होता है.

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