घुड़सवारी खेलदेश में वैसे तो घोड़ों की कई नस्ल हैं, लेकिन खास 7 ऐसी नस्ल हैं जिन्हें भारत सरकार ने भी मान्यता दी हुई है. ये सभी रजिस्टर्ड नस्ल हैं. सभी 7 नस्ल देश में खासी मशहूर हैं. दो नस्ल तो ऐसी हैं जिनका विदेशों तक में नाम है. ये ऊंची कद-काठी वाली नस्ल के घोड़े हैं. दिखने में ये युद्ध में काम आने वाले घोड़े लगते हैं. सभी 7 नस्ल का अपना अलग-अलग काम है. एक नस्ल ऐसी भी है जिसे उसकी ऊंची कद-काठी और फुर्ती के चलते शौक के लिए पाला जाता है.
भारत में मारवाड़ी, काठियावाड़ी, स्पीती, जंसकारी और मणिपुरी आदि सात नस्ल के घोड़े हैं. अभी तक इन घोड़ों की खूबसूरती और काबलियत सिर्फ भारत तक ही सीमित थी, लेकिन अब इनके एक्सपोर्ट का रास्ता भी खुल गया है. दूसरे देशों में रहने वाले घोड़ों के शौकीन भी अब इन्हें खरीदकर अपना शौक पूरा कर सकेंगे.
कच्छी-सिंधी घोड़े की नस्ल रेगिस्तानी इलाके की है. इस नस्ल के घोड़े गुजरात के कच्छ और राजस्थान के जैसलमेर-बाड़मेर में खुद को बड़ी आसानी से ढाल लेते हैं. दूसरे घोड़ों के मुकाबले यह ज्यादा से ज्यादा गर्मी को भी सहन कर लेते हैं.
इस जोन के बन जाने से अब घोड़ों से जुड़े कई क्षेत्रों में इसका फायदा मिलेगा. जैसे खेलों में खरीद-फरोख्त में, प्रजनन (ब्रीडिंग) में और बायो सिक्योरिटी के साथ-साथ डीजीज फ्री कम्पार्टमेंट को मजबूत करने में इसका बड़ा फायदा मिलेगा. हालांकि अफ्रीकी हॉर्स सिकनेस के मामले में भारत साल 2014 में भी बड़ी कामयाबी हासिल कर चुका है.
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