सीआईआरजी में चारा खाते ब्रीडर बकरे. फोटो क्रेडिट-किसान तकबकरे-बकरी के दूध-मीट से तो पशुपालक को मुनाफा होता ही है, साथ में उनकी मेंगनी (मैन्योर) से भी इनकम हो सकती है. ये कहना है केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी), मथुरा के साइंटिस्ट का. गोट एक्सपर्ट का कहना है कि अगर आपका खेत है और उसमे आप चारा या फिर दूसरी फसल उगाते हैं तो यह सोने पर सुहागा भी हो सकता है. एक्सपर्ट का कहना है कि गोबर और दूसरी खाद के मुकाबले बकरी की मेंगनी से बनी खाद अच्छी मानी जाती है. यही वजह है कि बकरी की मेंगनी लेने के लिए किसान छह महीने से लेकर एक-एक साल का एडवांस देकर बुकिंग तक कराते हैं.
एक्सपर्ट का कहना है कि खेत में इस्तेमाल करने के साथ ही बकरी की मेंगनी को सीधे भी बाजार में बेचा जा सकता है. मेंगनी से कम्पोस्ट और वर्मी कम्पोस्ट बनाकर भी बेचा जा सकता है. इसके अलावा बहुत सारे पशु पालक ऐसे भी हैं जो अपनी जमीन पर पशु का चारा उगाते हैं तो उस खेत में बकरी की मेंगनी का इस्तेमाल खाद के रूप में करते हैं. वहीं बकरी की मेंगनी ऑर्गनिक खेती का भी एक अच्छा स्त्रोत है.
ये भी पढ़ें: Animal Husbandry: 7 साल में डेयरी, फिशरीज-पोल्ट्री की बदल जाएगी तस्वीर, नौकरी-रोजगार के होंगे लाखों मौके
सीआईआरजी के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. मोहम्मद आरिफ ने किसान तक को बताया कि फसल चारे की हो या फिर कोई और दूसरी, खाद के रूप में उसे नाइट्रोजन, पोटेशियम और फॉस्फोरस की जरूरत होती है. वहीं बकरी की मेंगनी में तीन फीसद नाइट्रोजन, दो फीसद पोटेशियम और एक फीसद फॉस्फोररस होता है. मेंगनी की कुछ और खासियत यह भी हैं कि यह मिट्टी में मौजूद भौतिक और रसायनिक गुणों में पॉजिटिव बदलाव लाती है. इतना ही नहीं मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को भी बढ़ाती है. जबकि दूसरी खाद में यह गुण बिल्कु ल भी नहीं हैं या कम हैं.
डॉ. आरिफ ने बताया कि हम संस्थान में बकरी पालन की ट्रेनिंग लेने के लिए आने वाले किसानों को ऑर्गेनिक चारा उगाने के बारे में बता रहे हैं. इतना ही नहीं हम खुद भी अपने संस्थान के खेतों में ऑर्गेनिक चारा उगा रहे हैं. ऑर्गनिक चारे के लिए मेंगनी के इस्तेामाल पर कई साल से हमारी रिसर्च चल रही है. इसके अलावा हमने ऑर्गनिक चारे के लिए जीवामृत, नीमास्त्र और बीजामृत बनाया है. जीवामृत बनाने के लिए गुड़, बेसन और देशी गाय के गोबर-मूत्र में मिट्टी मिलाकर बनाया जा रहा है. यह सभी चीज मिलकर मिट्टी में पहले से मौजूद फ्रेंडली बैक्टीरिया को और बढ़ा देते हैं. इसी का फायदा चारे को मिलता है.
इसे भी पढ़ें: Goat Farming: ब्रीडर बकरे में हैं ये क्वालिटी तो बाड़े में होगी ज्यादा दूध देने वाली बकरियों की फौज
मथुरा, यूपी के बकरी पालक राशिद ने किसान तक को बताया कि अगर किसी बकरी फार्म में 200 बकरी हैं तो यह तय मान लें कि 25 से 30 दिन में एक ट्राली मेंगनी जमा हो जाती है. अगर मेंगनी की इस ट्राली को बेचा जाए तो यह 1200 रुपये से लेकर 1400 रुपये तक की बिक जाती है. वहीं अगर हम इसे वर्मी कम्पोोस्टा बनाकर बेचते हैं तो यह आठ से 10 रुपये किलो तक बिकती है. वर्मी कम्पोस्टर बनाने में थोड़ी मेहनत जरूरत लगती है, लेकिन इससे मुनाफा अच्छा हो जाता है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today