राजस्थान में गोवंश के नाम पर करोड़ाें का घोटाला. (Photo: Sharat Kumar/ITG)ऐसा कहा और माना जाता है कि गर्मियों के दौरान पशुओं को पानी खूब पिलाना चाहिए. गर्मियों में पशुओं को पानी की बहुत जरूरत होती है. क्योंकि पानी की कमी होते ही पशु बीमार होने लगते हैं. ये बात सही है, लेकिन ऐसा नहीं है कि ये सिर्फ गर्मियों पर ही लागू होती है. सर्दियों और बरसात के दौरान भी पशुओं को पानी की बहुत जरूरत होती है, लेकिन ये जरूरी है कि पशुओं के चारे और उन्हें पिलाए जा रहे पानी में बैलेंस बनाकर रखा जाए. क्योंकि सर्दियों के मौसम में भी पानी की वजह से गाय-भैंस बीमार हो सकती हैं.
लेकिन दोनों के बीच बैलेंस बनाए रखना बहुत जरूरी है, अगर चारे और पानी में से किसी एक की भी मात्रा ज्यादा हुई तो पशु की तबियत खराब हो सकती है. वैसे तो हरा चारा ज्यादातर समय महंगा बिकता है, लेकिन सर्दियों के दौरान हरा चारा कम रेट पर आसानी से मिल जाता है. लेकिन सवाल ये है कि इस मौसम के हरे चारे को सुखाए बिना सीधे नहीं खिला सकते हैं. लेकिन फिर भी ज्यादातर पशुपालक इसी गलती को दोहराते हैं और पशुओं को हरा चारा ही ज्यादा खिलाते हैं.
फोडर एक्सपर्ट का कहना है कि सर्दियों के दौरान सुबह के वक्त ओस गिरती है. ओस के चलते चारा गीला हो जाता है. इसके अलावा चारे में भी नमी की मात्रा भरपूर होती है. अगर हरे चारे में पानी की बात करें तो एक किलो हरे चारे में औसत तीन से चार लीटर तक पानी होता है. अब पशुओं को हरा चारा भी खाने को भरपूर दिया जाता है. अगर मामूली से मामूली 10 किलो चारा भी खाने को दिया तो 30 से 40 लीटर तक पानी की पूर्ति तो सिर्फ चारे से ही हो जाती है. इसके अलावा पशुओं को बाड़े में पानी पीने के लिए भी दिया जाता है. अब ऐसे में इसी बात का खास ख्याल रखा जाता है कि पशु हरा चारा कितना खा रहा है और उसे पीने के लिए पानी कितना देना है.
एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो दूध देने वाली गाय-भैंस के लिए पानी की बहुत जरूरत होती है. क्योंकि पानी की कमी का असर दूध उत्पादन पर भी पड़ता है. गाय अगर दूध दे रही है तो दिनभर में उसे कम से कम 30 से 50 लीटर पानी पीने के लिए चाहिए. अगर दूध देने वाली भैंस है तो उसे दिनभर में 40 से 70 लीटर पानी की जरूरत होती है. सर्दियों में जमीन से निकला सामान्य पानी पिलाना चाहिए. नल की सप्लाई वाला पानी है तो वो बहुत ज्यादा ठंडा नहीं होना चाहिए. करना तो ये चाहिए साफ हौज या बर्तन में सामान्य तापमान वाला पानी पशु के सामने ही रख देना चाहिए, जिससे जब भी उसे प्यास लगे तो वो जरूरत के हिसाब से पी ले.
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