Test for New Animals: ये खास तीन टेस्ट कराने के बाद ही खरीदें नया पशु, गर्मियों में ऐसे खिलाएं तूड़ी Test for New Animals: ये खास तीन टेस्ट कराने के बाद ही खरीदें नया पशु, गर्मियों में ऐसे खिलाएं तूड़ी
Test for New Animals नया पशु खरीदकर लाने से पहले उसके जिन तीन टेस्ट को कराने पर जोर दिया जाता है, उसमे पहला टेस्ट टीबी रोग, दूसरा जेडी रोग और तीसरा ब्रूसेलोसिस या गर्भपात संक्रामण का है. पशुओं को होने वाली टीबी पशुपालकों को भी हो सकती है. टेस्ट के दौरान पशुओं की चमड़ी में टीका लगाकर टीबी का पता लगाया जाता है. जेडी बीमारी भी टीबी की तरह जीवाणु माइकोबैक्टेरियम से होती है. इस बीमारी में पशु लगातार दस्त करता है. इसका टेस्ट भी टीबी की तरह से ही होता है.
कानपुर में गाय-बछड़ों को पहनाए गए कोट. (Photo: Screengrab)
आप जिस पशु को खरीदकर लाए हैं अगर वो बीमार है तो आपको दोहरा नुकसान दे सकता है. एक तो बाड़े में पहले से मौजूद पशुओं को बीमार कर देगा और खुद भी उत्पादन नहीं देगा. जिसके चलते पशुपालकों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है. यही वजह है एनिमल एक्सपर्ट नया पशु खरीदने से पहले उसके तीन तरह के टेस्ट कराए जाने पर जोर देते हैं. क्योंकि बीमार पशु उत्पादन नहीं देते हैं और उनकी ग्रोथ भी रुक जाती है. अगर नया पशु खरीदने से पहले ये तीन टेस्ट कराए जाते हैं तो पशुओं की बीमारी और उत्पादन घटने जैसी परेशानी से बचा जा सकता है.
इतना ही नहीं बीमारियों के इलाज पर होने वाले खर्च को रोकर दूध की लागत को बढ़ने से भी बचाया जा सकता है. एक्सपर्ट की मानें तो पशु उत्पादन की लागत को चारे का बढ़ता खर्च या फिर पशु को होने वाली बीमारियों के खर्च घटाते और बढ़ाते हैं. इसलिए जरूरी है कि पशुओं को बीमारी से बचाने के लिए उनके टेस्ट कराए जाएं, खासतौर पर तब जब नया पशु खरीदकर घर ला रहे हों.
गर्मियों में पशुओं को ऐसे खिलाएं तूड़ी
- नई तूड़ी सीधे तौर पर खिलाने से पशु का पेट खराब हो सकता है.
- फसल कटाई के दौरान शुरुआत में पशुओं को नई तूड़ी कम ही खिलाएं.
- तूड़ी में लगी मिट्टी पशु न खाए, इसलिए तूड़ी छान और भिगो कर खिलाएं.
- पशु का पेट खराब न हो इसके लिए नई और पुरानी तूड़ी मिलाकर खिलाएं.
- पशुओं को दी जा रही तूड़ी में सेंधा नमक, हींग, हरड़, मोटी सौफ मिला लें.
- पशुओं को गर्मी से बचाने के लिए खुली जगह के बजाय शेड में बांधे.
- गर्मियों में पशुओं को ऐसी जगह रखें जहां उन्हें सीधी हवा और लू न लगे.
- गर्मियों में दूध उत्पादन कम न हो इसके लिए 24 घंटे साफ पानी पिलाते रहें.
- गर्मियों में हरे चारे की कमी हो तो अजोला से इसकी भरपाई की जा सकती है.
- छायादार जगह में 2.5 ×1.5 x 0.2 मीटर गहरा गड्डा बनाकर और एक पॉलीथीन शीट बिछा दें.
- अजोला के लिए तैयार किए गए गड्डे में 10 सेमी (आधा) पानी का स्तर बना रहे.
- अजोला के गड्डे में 15 किलो छानी हुई मिट्टी को पांच किलो गोबर के साथ फैला दें.
- पानी में मिट्टी-गोबर के साथ-साथ 500 ग्राम अजोला कल्चर भी डाल दें.
- अजोला का सात दिनों में 10 किलो तक उत्पादन हो सकता है.
- सात दिन बाद हर रोज 1.5 किलो तक अजोला निकाल सकते है.
- पशुओं को खिलाने से पहले अजोला को जरुर धो लें.
ये भी पढ़ें-
PDFA: ये हैं 80 और 30 लीटर दूध देकर ट्रैक्टर जीतने वालीं गाय-भैंस, गांव में हो रहा स्वागत
Economic Survey: कृषि क्षेत्र की धीमी चाल, डेयरी-पोल्ट्री और मछली पालन ने कैसे ली ऊंची उड़ान?