Goat Breed: बकरों की ये खास तीन नस्ल तैयार कीं तो बकरीद पर होगा मोटा मुनाफा 

Goat Breed: बकरों की ये खास तीन नस्ल तैयार कीं तो बकरीद पर होगा मोटा मुनाफा 

Male Goat Breed देश में बकरी पालन तेजी से बढ़ रहा है. बकरी पालन के लिए लोन लेने वालों की संख्यां में भी इजाफा हो रहा है. नेशनल लाइव स्टॉक मिशन के तहत लोन के लिए सबसे ज्यादा आवेदन बकरी पालकों के आ रहे हैं. बाजार में बकरों की डिमांड के चलते ये बदलाव आ रहा है. तीन खास नस्ल सिरोही, उस्मानाबादी और संगमनेरी नस्ल के बकरों की खूब डिमांड है.

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Goat Breed: बकरों की ये खास तीन नस्ल तैयार कीं तो बकरीद पर होगा मोटा मुनाफा सिरोही नस्ल का बकरा. फोटो क्रेडिट-गोट वाला

बकरीद पर बकरों की डिमांड होती है. कुर्बानी भी सिर्फ बकरों की ही जाती है. मोटी-ताजी, तंदरुस्त और हर तरह से हेल्दी बकरों की डिमांड सबसे ज्यादा होती है. गोट एक्सपर्ट की मानें तो पूरे साल जितने बकरे नहीं बिकते हैं उससे ज्यादा तो बकरीद के मौके पर एक महीने में बिक जाते हैं. यही वजह है कि हर एक बकरी पालक ज्यादा से ज्यादा बकरे बाजार में बेचना चाहता है. इसी के चलते ही बकरी पालन भी तेजी से बढ़ रहा है. हालांकि इस बारे में केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थातन (सीआईआरजी), मथुरा के साइंटिस्ट का कहना है कि बकरे-बकरी का पालन दूध, मीट और ब्रीडिंग के लिए किया जाता है. लेकिन बड़े पैमाने पर बकरीद के लिए भी खूब बकरे पाले जाते हैं. यहां तक की बकरों की डिमांड विदेशों तक रहती है. बकरीद के लिए बकरों की खास तीन नस्ल खूब डिमांड में रहती हैं.

गोट एक्सपर्ट की मानें तो तीनों ही नस्ल की बकरे-बकरी का पालन मीट के लिए किया जाता है. सिरोही वैसे तो राजस्थान की नस्ल है. लेकिन महाराष्ट्र में भी इसका पालन अच्छे से हो जाता है. महाराष्ट्र में इनके मीट की बहुत डिमांड है. इतना ही नहीं पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान भी इनकी खासी डिमांड रहती है. बाकी की दो नस्ल महाराष्ट्र की ही हैं.  

ये है सिरोही नस्ल के बकरों की खासियत 

  • बकरे-बकरी का रंग भूरा और सफेद मिक्स होता है. 
  • शरीर पर बाल मोटे और छोटे होती हैं. 
  • बकरे-बकरी दोनों का शरीर मध्यम आकार का होता है. 
  • पूंछ मुड़ी हुई है और मोटे नुकीले बाल वाली होती है. 
  • सींग छोटे और नुकीले, ऊपर और पीछे की ओर मुड़े हुए होते हैं.
  • बकरे का औसत वजन 50 और बकरी का 23 किलोग्राम तक होता है.
  • जन्म के समय मेमने का औसत वजन दो किलोग्राम तक होता है.
  • इस नस्ल  की बकरी साल में एक बार जुड़वां बच्चे देती है. 
  • बकरी पहला बच्चा  19 साल की उम्र में देती है. 
  • बकरी का दुग्ध  काल 175 दिन का होता है. 
  • अपने दुग्धु काल में बकरी 71 लीटर तक दूध देती है. 

दूध-मीट के लिए पाली जाती है उस्मानाबादी

उस्मानाबादी नस्ल मुख्य रूप से महाराष्ट्र के उस्मानाबाद जिले के लातूर, तुलजापुर और उदगीर इलाकों में पाली जाती हैं. बकरियां आकार में बड़ी होती हैं. अगर कलर की बात करें तो 73 फीसद बकरे-बकरी पूरी तरह से काले रंग के होते हैं. वहीं 27 फीसद सफेद और भूरे रंग के होते हैं. इस खास नस्ल के बकरे-बकरी को दूध और मीट दोनों के लिए ही पाला जाता है. इस नस्ल की बकरी का दुग्ध काल चार महीने का होता है. बकरी हर रोज 500 ग्राम से लेकर डेढ़ लीटर तक दूध देती है. बकरी साल में दो बार दो-दो बच्चे देती है. बकरे में से ड्रेस किया हुआ 45 से 50 किलो तक मीट निकल आता है. 

सींगों से होती है इस नस्ल के बकरों की पहचान 

संगमनेरी नस्ल आमतौर पर महाराष्ट्र के पूना और अहमदनगर जिलों में पाई जाती है. इस नस्ल में मध्यम आकार के बकरे-बकरी होते हैं. संगमनेरी बकरे-बकरी का कोई एक समान रंग नहीं होता है, यह सफेद, काले या भूरे रंग के अलावा अन्य रंगों के धब्बों के साथ भी पाए जाते हैं. कान नीचे की ओर झुके हुए हैं. बकरे-बकरी दोनों के सींग पीछे और ऊपर की ओर होते हैं. संगमनेरी नस्ल की बकरी दिनभर में 500 से लेकर एक लीटर तक दूध देती है. बकरी का कुल दुग्धे काल 165 दिन का होता है.

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