फिश ब्रूड बैंकबिहार में मछली पालन को बढ़ावा देने और किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. 8 अगस्त को सीतामढ़ी जिले के डुमरा अंचल स्थित राघोपुर बखरी में राज्य का पहला फिश ब्रूड बैंक शुरू किया गया. करीब 10.92 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस केंद्र को लगभग 40 एकड़ क्षेत्र में बनाया गया है. यहां वैज्ञानिक तकनीक की मदद से क्ववालिटी वाली प्रजनक मछलियां यानी ब्रूडर तैयार किए जाएंगे.
इस फिश ब्रूड बैंक के शुरू होने से बिहार में अच्छी क्वालिटी वाले मछली के बीज तैयार करने में मदद मिलेगी. अभी कई हैचरी संचालक मछली के बीज और प्रजनक मछलियों के लिए नदियों, तालाबों और दूसरे प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर रहते हैं. इन जगहों से मिलने वाली मछलियों की क्वालिटी हमेशा अच्छी नहीं होती. इससे मछलियों की ग्रोथ, उत्पादन और उनके जीवित रहने पर असर पड़ सकता है. लेकिन अब फिश ब्रूड बैंक में वैज्ञानिक तरीके से बेहतर प्रजनक मछलियां तैयार की जाएंगी, जिससे किसानों को अच्छी क्वालिटी वाला मछली बीज मिल सकेगा.
सीतामढ़ी के फिश ब्रूड बैंक में स्वस्थ और अच्छी नस्ल की बड़ी मछलियां तैयार की जाएंगी. इन मछलियों की मदद से अच्छी क्वालिटी और बीमारी से मुक्त मछली के बीज तैयार किए जाएंगे. इससे किसानों और हैचरी संचालकों को अच्छा मछली बीज स्थानीय स्तर पर ही मिल सकेगा. इस केंद्र को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत बनाया गया है. यहां मछलियों को रखने और बढ़ाने के लिए अलग-अलग तालाब बनाए गए हैं. साथ ही मछली बीज तैयार करने के लिए हैचरी भी बनाई गई है. इससे बड़ी संख्या में अच्छी क्वालिटी वाले मछली के बीज तैयार किए जा सकेंगे.
फिश ब्रूड बैंक में मुख्य रूप से भारतीय मेजर कार्प की प्रमुख प्रजातियों रोहू, कतला और मृगल को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके साथ ही जयंती रोहू, कॉमन कार्प, अमृत कतला और अमूर कार्प जैसी प्रजातियों पर भी काम किया जाएगा. स्थानीय स्तर पर बेहतर और सस्ता मछली के बीज मिलने से किसानों की उत्पादन लागत कम होने की उम्मीद है. इससे मछली पालकों की आय बढ़ सकती है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं. भविष्य में बिहार दूसरे राज्यों को भी मछली के बीज उपलब्ध कराने की स्थिति में आ सकता है.
फिश ब्रूड बैंक सिर्फ मछली बीज उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा. भविष्य में यहां मिट्टी और पानी की जांच, ट्रेनिंग और तकनीकी मार्गदर्शन जैसी सुविधाओं को भी बढ़ावा देने की योजना है. इससे मछली पालकों को वैज्ञानिक तरीके से पालन करने में मदद मिलेगी.
इसी कार्यक्रम में सीतामढ़ी के डेयरी क्षेत्र के लिए भी बड़ी सौगात मिली. राज्य योजना 2025-26 और 2026-27 के तहत 30 MTPD क्षमता वाले दूध से पाउडर बनाने वाला प्लांट की शुरुआत की गई है. इस परियोजना पर करीब 76.60 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इस प्लांट से सीतामढ़ी और आसपास के दूध उत्पादक किसानों और पशुपालकों को फायदा मिलने की उम्मीद है. यहां दूध को प्रोसेस कर दूसरे उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे. इससे दूध बेचने के लिए किसानों को बेहतर बाजार मिल सकता है और उनकी आमदनी बढ़ने की संभावना है.
कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, डेयरी, मत्स्य और पशु संसाधन विभाग के मंत्री नंद किशोर राम और उद्योग और खेल विभाग की मंत्री श्रेयसी सिंह समेत कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे.
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